लेखक ,भरत सिंह परमार,
वैश्विक जेहादियों द्वारा इस नवीनतम युद्ध रणनीति को देखकर भारत को क्या सबक सीखना चाहिए? क्या “हमास” की तरह किसी दिन पाकिस्तान के सैनिक भी उग्रवादियों के रूप मैं भारत में नरसंहार करने की कोशिश कर सकते हैं ?
जब से इज़राइल और फ़िलिस्तीन ने एक घोषित ‘युद्ध’ की घोषणा की है तब से मध्य पूर्व निवासी यहूदी और अरब पीड़ा ,आतंकवाद और बदले की आग में लगातार जल रहे हैं। फिलिस्तीनी इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन ने “हमास” को जन्म दिया। इस चरमपंथी समूह की आईएसआईएस जैसे क्रूर संघठन से अत्यंत समानता होना और हमारे पडोसी पाकिस्तान से संबंध होना कई शंकाओं को जन्म देता है। हमास और आईएसआईएस की समानताएं और अंतर भारत और उसके निवासियों को समझने की बहुत जरूरत है। इसके साथ ही , हमास के लिए पाकिस्तान का समर्थन भारत के लिए बड़ी खतरे की घंटी होनी चाहिए।

पहले समझिये की ये दोनों संगठन स्वभाव से उग्रवादी और हिंसक हैं। ये आतंकवाद और क्रूरता को इस्लाम के विस्तार के लिए एक उपकरण के रूप में उपयोग करने के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा, ये हथियारों और गोला-बारूद के साथ-साथ भविष्य के उग्रवादियों के प्रशिक्षण के लिए एक-दूसरे का परस्पर समर्थन करते रहे हैं। हमास सैनिकों के हालिया व्यवहार और वायरल वीडियो से पता चलता है कि ये आतंकवादी मानवता के किस निचले स्तर तक गिर गए हैं। हमास और आईएसआईएस संगठन निम्नलिखित तरीके से समान हैं:
* हमास और आईएसआईएस दोनों ही इस्लाम की सख्त और क्रूर व्याख्या रखते हैं।
*वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के साधन के रूप में ‘जिहाद’ को प्राथमिकता देते हैं।
*हमास और आईएसआईएस दोनों बंदी नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और महिलाओं को ‘पकड़ी गई दासियों’ के रूप में मानते हैं।
*वे पकडे गए सैनिकों और उनकी लाशों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और ऐसे कार्यों में गहरा आनंद लेते हैं।
*उन्हें जीत के बर्बर जश्न में सैनिकों का सिर काटना पसंद है.
*जबकि दोनों समूहों पर अत्याचार करने का आरोप है, वे दोनों अपने दुश्मनों या उनके शवों को अपमानित करके दुनिया का ध्यान आकर्षित करते हैं। इससे पहले भी मृत इजरायलियों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करने के हमास के कृत्य की वैश्विक आलोचना हुई थी। इसके बावजूद , वे हिंसा के अपने कृत्यों का भय और व्यापक प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए बार-बार निहत्ते नागरिकों को निशाना बनाने का प्रयास करते हैं। इसी तरह, आईएसआईएस पर सामूहिक हत्याओं का आरोप है।
*वे अपनी सत्ता के अधीन क्षेत्रों में नरसंहार और उसका व्यापक प्रचार करने के लिए भी जाने जाते हैं। यौन दासता और बंदी मानव दास बनाना इन दोनों संगठनों के क्रियाकलापों का हिस्सा हैं।
आज हमास आतंकवादियों द्वारा इजरायली सैनिकों एवं निहत्ते नागरिकों ,महिलाओं के शवों का अपमान करने के वायरल वीडियो की वैश्विक निंदा हो रही है। ये रीलें इज़रायल और फ़िलिस्तीन के बीच तनाव को और बढ़ा रही हैं। इस तरह की कार्रवाइयों से हमास को एक घृणित आतंकवादी समूह के रूप में पहचान मिली है । इसके अलावा, मानव ढाल रणनीति के रूप में इजरायलियों के बार-बार उपयोग की रिपोर्टों ने दुनिया को हमास की सड़ी हुई मूल विचारधारा भी दिखा दी है।
इसके अलावा, आईडीएफ सैनिकों के सिर काटने और लाशों को अपमानित करने के नए वीडियो यह सुनिश्चित करते हैं कि दुनिया इस्लामी चरमपंथ का असली चेहरा नहीं भूले। हमास दुनिया को इस्लामिक चरमपंथ के बारे में निम्नलिखित बातें सिखाता है:
*इसके आतंकवादी अमानवीय कार्यों को भी सही ठहराने के लिए ‘अल्लाह’ का इस्तेमाल करते हैं।
*इसके नेताओं का रुख पकड़ी गई महिलाओं को यौन गुलामों के रूप में इस्तेमाल करने का है।
*इसके चरमपंथियों को स्त्रियों , पुरुषों और बच्चों की हत्या, हमला या अपवित्रता करने के लिए ’72 हूर’ का वादा किया जाता है।
*इनकी रणनीति जब खुद पर हमला हो तो अपनी रक्षा के लिए अपने बच्चों , महिलाओं को आगे कर सहिष्णुता ,मानवता ,और शांति को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जाना है ; जबकि विरोधियों के पकडे जाने पर के अवसर पर उनको अमानवीय यातनाये ,गुलामी और अपमान से नष्ट किया जाना है ।

हमास के लिए पाकिस्तान के लगातार मिल रहे समर्थन में वित्तीय और सैन्य सहायता शामिल है। इसके अलावा, हमास और आईएसआईएस दोनों के कार्यकर्ताओं को पाकिस्तान की सीमाओं के भीतर अपना तंत्र विकसित करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। कई विश्लेषकों ने कहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद के लिए प्रशिक्षण स्थल के रूप में काम करता है। भारत का समस्याग्रस्त पड़ोसी हमास को आतंकवादी गतिविधियों को सफलतापूर्वक पूर्ण करने में मदद करता है। बदले में हमास भी गाजा से सीखे गुर पाकिस्तान को सिखाता है. कैसे पाकिस्तान में ड्रोन या जम्मू-कश्मीर में सुरंगों के इस्तेमाल पर बढ़ोतरी हुई । ये दोनों बातें पाकिस्तानी आतंकवादी समूहों ने गाजा में हमास के ऑपरेशन के तरीके से सीखी थीं।
हमास लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे आतंकवादी संगठनों का भी समर्थन करता है। दोनों संगठन भारत में आंतकवाद फैलाते हैं और भारत की संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा पैदा करने का प्रयास करते हैं। कुछ रिपोर्टों से पता चलता है कि हमास के कार्यकर्ता सक्रिय रूप से भारतीय मुसलमानों को भी कट्टरपंथी बनाने की कोशिश करते हैं, जिसमे इन समुदायों में योजनाबद्ध भर्ती के प्रयासों को देखा गया है ।
अंत में,
गाजा में युद्ध सिर्फ मध्य-पूर्व की समस्या नहीं है। हमास और आईएसआईएस की साझा विचारधारा एक वैश्विक चिंता का विषय होनी चाहिए। दुनिया और भारत को इस्लामिक दुनिया के एक और आईएसआईएस जैसे आतंकवादी समूह के रूप में हमास के उदय से सावधान रहना चाहिए। इसके अतिरिक्त, हमास के लिए पाकिस्तान के दृढ़ समर्थन के कारण भारत को इजराइल-फिलिस्तीन युद्ध के संभावित प्रभाव पर ध्यान देना चाहिए। क्या भारत भी इस युद्ध से फैले किसी व्यापक आतंकवाद से और पीड़ित होगा? शांतिप्रिय ,धर्मनिरपेक्षतावादी, और उदारवादी लोग जब ट्विटर पर हमास और आईएसआईएस रीलों को देखकर क्या सबक सीखते हैं? दु इसके अलावा, भारतीयों को यह भी याद रखना चाहिए कि जो देश आज फ़िलिस्तीन के साथ खड़े हैं, वे जल्द ही आपके पडोसी पाकिस्तान के साथ भी इसी तरह खड़े होंगे।

