लोकमतसत्याग्रह/हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शहर के बीचोंबीच बहने वाले स्वर्ण रेखा नाले में सीवर का गंदा पानी रोकने के लिए अलग से समानांतर सीवर लाइन डाली जाएगी। 13 किमी लंबी स्वर्ण रेखा के दोनों तरफ कुल 26 किमी लंबाई में ये लाइनें डालने का प्लान तैयार किया गया है। इसके अलावा पानी की लाइनों को भी अलग किया जाएगा। इसके लिए शुरूआत में बनाए गए एस्टीमेट की राशि 457 करोड़ रुपए से अधिक बताई गई है, लेकिन अभी प्लान को फाइनल नहीं किया गया है। संभावना यह देखी जा रही है कि स्वर्ण रेखा के अंदर ही खुदाई कर अलग से बड़ी ट्रंक लाइन डाली जाए। इसको लेकर निगमायुक्त हर्ष सिंह ने बुधवार को पीएचइ और जनकार्य के अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से बैठक की। बैठक में उन्होंने इंजीनियरों को दोबारा सर्वे कर फाइनल प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अधिकारियों को स्वर्ण रेखा में सीवर का गंदा पानी मिलने से रोकने के निर्देश दिए थे। इसके बाद से जिला प्रशासन, नगर निगम, स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन, जलसंसाधन विभाग सहित केंद्र सरकार के सेंट्रल वाटर कमीशन के अधिकारी स्वर्ण रेखा के जीर्णोद्धार की कवायद में लगे हुए हैं। कई साल पहले स्वर्ण रेखा में खोदाई कर सीवर की लाइन डाली गई थी, जो अब पूरी तरह से टूट चुकी है। इसके अलावा कई नाले-नालियों का मिलान भी इसमें होने से 13 किमी लंबाई में गंदा पानी बहता रहता है। इसको रोकने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है कि नाले-नालियों का स्वर्ण रेखा से मिलान बंद किया जाए और इसके दोनों तरफ के हिस्से में नई सीवर लाइन बिछा दी जाए। नई सीवर लाइन बिछाकर बाकी लाइनों को उसमें जोड़ दिया जाए।
कम हो सकता है खर्चा
नगर निगम आयुक्त हर्ष सिंह के निर्देश पर इंजीनियर इस प्रोजेक्ट का खर्चा कम करने के प्रयास कर रहे हैं। ट्रंक लाइन बिछाने पर यदि सहमति बनती है तो यह खर्चा 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है, लेकिन पूर्व में स्वर्ण रेखा में सीवर लाइन बिछाकर इसे पक्का करने के बावजूद प्रोजेक्ट फेल होने के कारण इस पर संशय की स्थिति बन सकती है। हालांकि इंजीनियर इस एस्टीमेट को और कम करने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि नमामि गंगे मिशन से बजट मिलने में कोई दिक्कत नहीं हो।
स्वर्ण रेखा में सीवर का गंदा पानी रोकने के लिए शुरूआती प्लान तैयार हुआ है। इसका एस्टीमेट भी बना है, लेकिन वह फाइनल नहीं है। इसके लिए गुरुवार को फिर से सर्वे किया जाएगा। इसके बाद प्लान फाइनल कर नमामि गंगे मिशन को भेजा जाएगा।
हर्ष सिंह, आयुक्त नगर निगम


