लोकमतसत्याग्रह/आचार संहिता से पहले जनप्रतिनिधियों के दबाव के चलते कराए गए विकास कार्यों और फिर ठेकेदारों को किए गए भुगतान के कारण बजट की कमी से जूझ रहे नगर निगम में मद बदलने की प्रक्रिया पर निगमायुक्त हर्ष सिंह ने रोक लगा दी है। दीपावली पर कर्मचारियों को वेतन देने के लिए चुंगी क्षतिपूर्ति, संपत्तिकर की वसूली और निगम के पास मौजूद रिजर्व फंड से 19 करोड़ रुपए की राशि की व्यवस्था कर ली गई है, लेकिन दो एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्स पर लगे 1200 कर्मचारियों के वेतन के लिए लगभग डेढ़ करोड़ रुपए की आवश्यकता है। इनमें एक एजेंसी सफाई कर्मचारी उपलब्ध कराती है। यदि इन कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला, तो दीपावली पर सफाई व्यवस्था चरमरा सकती है।
हालांकि निगम अधिकारियों का दावा है कि इस राशि की व्यवस्था भी कर ली जाएगी। इस मामले को लेकर 6 नवंबर को ठेकेदारों के भुगतान से निगम में वेतन के लाले शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। नगर निगम के वित्त विभाग ने आचार संहिता लगने से पहले बिना सोचे समझे ठेकेदारों को भुगतान कर दिए, इसके चलते निगम का खजाना खाली हो गया। कर्मचारियों को वेतन देने तक के लाले पड़ गए थे। हालांकि निगम अधिकारियों ने छह हजार से ज्यादा स्थायी, विनियमित और राज सिक्योरिटी के आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन देने के लिए 12 करोड़ रुपए की चुंगी क्षतिपूर्ति, चार करोड़ रुपए संपत्तिकर और निगम के खाते में बची शेष रकम से 19 करोड़ रुपए की राशि की व्यवस्था कर ली है, लेकिन अब शर्मा सिक्योरिटी के माध्यम से लगाए गए सुरक्षा गार्ड और सेंगर सिक्योरिटी के माध्यम से लगाए गए 1200 से अधिक सफाई कर्मचारियों के वेतन के लिए डेढ़ करोड़ रुपए की आवश्यकता है। इसी बीच वित्त विभाग ने प्रधानमंत्री आवास योजना के मद से 10 करोड़ रुपए की राशि दूसरे हेड में लेने के प्रयास किए थे, लेकिन निगमायुक्त ने अपरआयुक्त वित्त रजनी शुक्ला को पत्र लिखकर केंद्र व राज्य शासन से किसी विशेष प्रयोजन, कार्य या योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि को उसी प्रयोजन में खर्च करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही इन योजनाओं के रिकार्ड तैयार करने को कहा है।
40 करोड़ रुपए की उधारी में निगम
नगर निगम इस समय 40 करोड़ रुपए की उधारी में है। दरअसल, नगर निगम के पीएचई विभाग के लगभग सात करोड़, जनकार्य विभाग के लगभग 25 करोड़, भंडार सहित अन्य विभाग मिलाकर कुल 40 करोड़ रुपए के बिल नगर निगम के वित्त विभाग में लंबित हैं। ये वे बिल हैं, जिनके काम हो चुके हैं और ठेकेदारों को भुगतान किया जाना है, लेकिन निगम के पास बजट की कमी है। अब दीपावली के आसपास भुगतान न मिलने के कारण ठेकेदार बार-बार निगम के चक्कर काट रहे हैं और विकास कार्य ठप करने की चेतावनी भी दे रहे हैं।
कहीं दीपावली पर न हो जाए कचरा
हालांकि नगर निगम आयुक्त ने संपत्तिकर व जलकर के अमले को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे बड़े बकायादारों से वसूली में जुट जाएं और प्रतिदिन एक करोड़ रुपए की राशि निगम के खजाने में जमा करें। समस्या यह है कि त्योहार नजदीक होने के कारण लोग इस समय बकाया राशि का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते अमला भी फील्ड में संघर्ष कर रहा है। हालांकि डेढ़ करोड़ रुपए की रकम ज्यादा नहीं है और दीपावली से पहले इसकी व्यवस्था हो जाएगी, लेकिन समय रहते यदि वेतन नहीं मिला, तो फिर दीपावली पर आउटसोर्स सफाई कर्मचारी दिक्कत खड़ी कर सकते हैं।


