लोकमतसत्याग्रह/मध्य प्रदेश में चारों तरफ चुनावी हवाएं चल रही हैं। विधानसभा चुनाव में वोटिंग करने के लिए सिर्फ कुछ ही दिन बाकी हैं। जहां बात चुनाव की आती है वहां कहीं न कहीं मत और मतदान के कुछ ऐसे पहलू भी सामने आते हैं जो हर जगह की कहानी है। यहां बात कर रहे हैं फर्जी तरीके से वोट डाले जाने और वोटर पर वोटिंग से पहले बनाए जाने वाले दवाब के बारे में।
अक्सर देखने में आता है कि चुनाव के दौरान कई पोलिंगों पर गड़बड़ियां होती हैं। खासतौर पर वोटिंग को लेकर यानि किसी व्यक्ति का वोट कोई अन्य व्यक्ति डाल जाता है। ऐसे में जब मूल व्यक्ति अपना वोट डालने जाता है तो उसे बताया जाता है कि उसका वोट तो डाला जा चुका है।
अब ऐसे में उसे क्या करना है उसको समझ नहीं आता है। इस बारे में जानकारी साझा करते हुए अधिवक्ता राहुल यादव बताते हैं कि आमतौर पर ऐसे मामलों में लोग शिकायत करने से बचते हैं लेकिन कई बार व्यक्ति ऐसे मामलों में शिकायत करने की सोचता भी है तो यह नहीं समझ पाता कि शिकायत कहां करें और कैसे?
ऐसी ही एक समस्या और भी सामने आती है वह है वोटर पर बनाए जाने वाले दवाब की। वोटिंग बूथ के पास खड़े कुछ पार्टी विशेष के लोग वोटर को बरगलाने या उस पर दवाब बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में वह व्यक्ति भी इस चीज का विरोध कर सकता है साथ ही इसकी शिकायत कर संबंधित लोगों पर कार्रवाई भी करवा सकता है।
इस सब के लिए कानून में प्रावधान मौजूद हैं, जिनके अंतर्गत कोई भी वोटर अपने अधिकार के लिए आवाज उठा सकता है। साथ ही अगर उसके अधिकार का हनन होता है तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी करवा सकता है।
धोखाधड़ी का मामला लगेगा
अधिवक्ता राहुल बताते हैं कि ऐसी स्थिति में जब कोई किसी वोटर के स्थान पर फर्जी वोट डाल जाए तो वोटर इसके खिलाफ शिकायत कर सकता है। पुलिस को दी शिकायत के बाद इस मामले में आइपीसी 416 के अंतर्गत कार्रवाई हो सकती है। इसमें व्यक्ति को जुर्माना और जेल दोनों भुगतना पड़ सकता है। पोलिंग पर तैनात कोई चुनावी ड्यूटी वाला कर्मचारी ऐसा करता है तो द रिप्रेजेंटेटिव आफ पीपुल एक्ट में उसे भी सजा हो सकती है।
धमकाने पर तीन साल की सजा
चुनाव के समय अगर कोई व्यक्ति किसी वोटर को प्रभावित करने की कोशिश करता है या फिर उसे डरा-धमका कर उस पर किसी पार्टी या व्यक्ति विशेष के लिए वोट करने का दवाब बनाता है तो ऐसी स्थिति में उस वोटर की शिकायत पर आइपीसी 383 के अंतर्गत मामला दर्ज होगा। इस मामले में संबंधित व्यक्ति को 3 साल की जेल तक हो सकती है।


