लोकमतसत्याग्रह/स्वच्छ सर्वेक्षण के अंतर्गत गार्बेज फ्री सिटी का सर्वे पूरा होने के बाद सफाई व्यवस्था में ढील छोड़ दी गई है। न तो सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी अब फील्ड में निकल रहे हैं और न ही जिम्मेदारों को अब शहर की सफाई व्यवस्था की फिक्र है। सफाई व्यवस्था का दायित्व संभालने वाले कई जिम्मेदार अधिकारी चुनाव ड्यूटी में भी व्यस्त हो गए हैं। यही कारण है कि अब फिर से शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आने लगे हैं। इसके साथ ही सफाई व्यवस्था की शिकायतें भी बढ़ गई हैं। अब दीपावली पर नगर निगम ने स्वच्छ दीपावली-शुभ दीपावली का नारा तो दिया है, लेकिन इसकी पोल ये कचरे के ढेर खोल रहे हैं।
दीपावली की वजह से निकल रहा है 8 सौ टन कचरा रोजाना
आम दिनों में शहर से प्रतिदिन 450 से 500 टन कचरे का उत्सर्जन होता है, लेकिन दीपावली के त्योहार के समय प्रतिदिन 800 टन तक कचरा निकलता है यानी कचरे की मात्रा लगभग दोगुना हो जाती है। शहर में नियमित कचरा उठाने की व्यवस्था मानिटरिंग के अभाव में चरमराई रहती है। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन ठीक से नहीं होने के कारण लोग घर का कचरा सड़क किनारे फेंक रहे हैं। नतीजा यह है कि शहर के मुख्य मार्गों सहित कालोनियों, गली-मोहल्लों में जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं।
अफसरों का कहना व्यवस्थाएं कर ली गई हैं
उधर जिम्मेदार अधिकारियों का अब भी यही कहना है कि सारी व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। जल्द ही सारी व्यवस्थाएं पटरी पर आ जाएंगी। अतिरिक्त वाहनों की नहीं हो रही व्यवस्था: पिछले दिनों नगर निगम आयुक्त हर्ष सिंह ने निर्देश दिए थे कि दीपावली के अवसर पर विशेष साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि शहर में कचरे के ढेर नजर आ सकें। इसके लिए प्रत्येक विधानसभा में दो-दो अतिरिक्त डंपर और एक-एक जेसीबी की व्यवस्था की जानी है। नगर निगम द्वारा ये वाहन किराये पर लिए जाते हैं, लेकिन दो माह से भुगतान नहीं होने के कारण संबंधित ठेकेदार ने अतिरिक्त वाहन देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में अब सेकंडरी वेस्ट वाहनों के माध्यम से ही कचरा उठवाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो नाकाफी साबित हो रहे हैं।


