लोकमतसत्याग्रह/ विधानसभा चुनाव-2023 के लिए मतदान की घड़ी आ गई है। अधिकतर सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को चुनाव डयूटी में लगाया गया है। इसी कारण आमजन की बुनियादी सुविधाओं और योजनाओं पर भी इसका असर पड़ा है। सफाई, सड़क, बिजली और सीवर की शिकायतों के ढेर हैं। खासकर दीपावली के बाद से सफाई पटरी पर नहीं आ पाई है। दो दिन कर्मचारियों के अवकाश के बाद बुधवार को काम पर आने का दावा भले ही किया गया, लेकिन शहरभर में कचरे के ढेर फिर दिखे। राशन वितरण की पूरी व्यवस्था में लगे अधिकारियों को चुनाव डयूटी में लगाया गया है तो परिवहन से लेकर वितरण तक पर निगरानी हटने से 40 फीसद ही वितरण अभी हो सका है। इसको लेकर कलेक्टर तक शिकायतें भी पहुंची हैं जिसके बाद मंगलवार को खाद्य आपूर्ति विभाग ने बैठकें भी कीं। सबसे अहम नामांतरण-बंटवारे, सीमांकन जैसे कार्य पूरी तरह पिछले एक-डेढ़ माह से ठप पड़े हुए हैं। परेशान लोग अब मतदान व मतगणना हो जाने का इंतजार कर रहे हैं।
बता दें कि विधानसभा चुनाव-2023 को लेकर पिछले दो माह से जिला सरकार चुनाव की तैयारियों में लगी हुई है। अधिकतर विभागों के अधिकारियों को सेक्टर अधिकारी बना दिया गया है। इसी कारण संबंधित अधिकारी अपने विभागों पर चुस्त मानीटरिंग नहीं कर सके। विशेषकर रेवेन्यू को लेकर सबसे ज्यादा हालत खराब है जिसमें लोगों के रूटीन काम प्रभावित हुए हैं। आचार संहिता लगने के साथ ही जनता की सुनवाई के फोरम भी बंद हो जाते हैं, इसलिए और परेशानी बढ़ जाती है।
ऐसे परेशान हो रही जनता: काम प्रभावित
1-साफ सफाई
दीपावली के पहले से बेपटरी हुई सफाई व्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं आ सकी है। नगर निगम के अफसरों ने चुनावी व्यस्तता के चलते मानीटरिंग न के बराबर की,नतीजा सड़कों पर कचरा होने के साथ साथ वार्डों में भी कचरा कलेक्शन गाड़ी नहीं पहुंच रही। दीपावली पर दो दिन सफाईकर्मी अवकाश पर रहे और नगर निगम ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी नहीं कीं। चुनावी डयूटी के अलावा मैदान में होने वाले सफाई अमले व अधिकारियों ने भी मानीटरिंग सुस्त कर दी। सिटी सेंटर, मुरार, लश्कर से लेकर सिरोल ऐसे कई पाश इलाको में पाश कालोनियों में कचरे के ढेर लगे हैं।
2-राशन वितरण लेट
चुनावी व्यस्तता के कारण राशन वितरण की व्यवस्था भी गड़बड़ा गई है। अभी तक 40 फीसद ही राशन वितरण हुआ है और शेष अभी बाकी है। सहकारी समितियां, नागरिक आपूर्ति निगम से लेकर ट्रांसपोर्ट व्यवस्था व खाद्य आपूर्ति निगम के स्तर पर सुस्ती हुई। राशन वितरण में देरी का मामला कलेक्टर तक भी पहुंचा जिसके बाद अधिकारियों की बैठक बुलाकर इस संबंध में सुधार के निर्देश दिए गए।
3-स्ट्रीट लाइटें नहीं सुधार पा रहे
शहर में स्ट्रीट लाइटों की स्थिति न दीपावली पर सुधार सके न अब व्यवस्था दुरूस्त हुई है। शहर के पाश इलाकों में शाम ढ़लते ही अंधेरे के हालत हो जाते हैं। जिस कंपनी के पास काम का ठेका है वह आपूर्ति नहीं कर पा रही है और अफसर इसका इलाज भी नहीं निकाल पा रहे। इस कारण पिछले काफी समय से ऐसे ही हालात पड़े हैं। शहर के अधिकतर इलाके इस समस्या से जूझ रहे हैं।
4-राजस्व के कार्य ठप
जिला प्रशासन के चुनावी कार्य मे व्यस्त होने के चलते सबसे ज्याद राजस्व के कामों पर असर पड़ा है, आचार संहिता से पहले पटवारियों की हड़ताल एक माह तक चली इसके बाद चुनाव की तैयारियां शुरू हो गईं। जनता की राजस्व कार्यालयों में सुनवाई से लेकर जनसुनवाई भी बंद हो गई तो मैदानी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। सीमांकन,बंटवारा, नामांतरण जैसे काम लटके पड़े हैं।


