लोकमतसत्याग्रह/जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त मुरैना जिले के शिवशक्ति कॉलेज का मामला एक बार फिर उठ रहा है । मामले के शिकायतकर्ता अरुण शर्मा ने इस मामले की एफआईआर दर्ज करवाने के लिए विश्वविद्यालय थाने में आवेदन दे दिया है । जल्दी ही इस मामले में एफआईआर हो सकती है । बता दें की हाल ही में जेयू से जांच दल कॉलेज की जांच करने गया था ।जांच अधिकारियों का कहना है कि जांचदल जब मौके पर गया तो वहां मौके पर कोई कॉलेज नहीं मिला । जिसकी जांच रिपोर्ट दल ने जेयू में सबमिट कर दी है, जिसके बाद जेयू ने कॉलेज के दस्तावेज मंगवाए । उल्लेखनीय है की इस मामले का शिकायतकर्ता और उस कॉलेज का कथित प्राचार्य अरुण शर्मा पिछले लंबे समय से जीवाजी यूनिवर्सिटी में एक मानसेवी शिक्षक के तौर पर काम करते थे। पिछली 10 अगस्त को इन्हे जीवाजी विश्वविद्यालय ने नोकरी से निकाल दिया है । इसके पीछे का कारण ये रहा की हाल ही में झुंडपुरा के शिवशक्ति कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर अरुण का काम करना बताया जा रहा था लेकिन अरुण इस बात से इंकार कर रहे है। इसको ले कर उन्होंने जेयू को कई बार शिकायत भी दी है। एसपी से मुलाकात कर अपनी शिकायत भी दर्ज कराई है। लेकिन इस मुद्दे को इसके अलावा निष्पक्ष जांच की भी मांग की है।
शिकायत करने वाले से ही कागज मांगे
अरुण शर्मा का कहना है कि वह पिछले लंबे समय से जेयू से इस मामले की शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है लेकिन जेयू ने बजाय मामले की जांच कराने के उस प्राचार्य से ही दस्तावेज मांग लिए। जिस पर नाराजगी जताते हुए अरुण शर्मा ने एसपी से मुलाकात कर मामले में निष्पक्ष कार्यवाही करने की मांग की है।
आप वो अरुण नहीं है
जब जेयू ने इस मामले को लेकर कथित प्राचार्य से बात की और प्राचार्य अरुण शर्मा ने उनसे इस मामले को निष्पक्ष तौर पर जांचने के लिए कहा तो उनका कहना था कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कॉलेज से जानकारी मांगी है और कॉलेज वालों का कहना है कि जिस डॉक्टर अरुण शर्मा को उन्होंने प्राचार्य बनाया है वह आप नहीं है।


