पूरी दुनिया में गूंज रहा ‘अनिवार्य भारत’, अब विश्व की प्रमुख कंपनियों के लिए भारत अहम

लोकमतसत्याग्रह/सॉफ्टवेयर व संबंधित सेवाएं देने वाली कंपनियों के संगठन नासकॉम की अध्यक्ष देबजानी घोष ने अपने नए लेख में दावा किया कि तकनीक की दुनिया में आज ‘अनिवार्य भारत’ गूंज रहा है। सितंबर में हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू में भारत को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट से यह शब्द लेकर उन्होंने बताया कि देश में विकसित सार्वजनिक डिजिटली बुनियादी ढांचे (डीपीआई) ने भारत की आर्थिक प्रगति की ऐसी जमीन तैयार की है, जिसमें कोई पीछे नहीं छूटेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज दुनिया में भारत को कैसे देखा जा रहा है, यह इस लेख ने संक्षेप में बताया है। कहा, हमारे मिले-जुले प्रयास और इनोवेशन ‘अनिवार्य भारत’ को हकीकत में बदल सकते हैं। उन्होंने कहा, आज उत्तरी अमेरिका, यूरोप, वैश्विक दक्षिण से लेकर दुनियाभर की कंपनियों के मुख्य अधिकारी जब तकनीकी सहयोग व रणनीतिक साझेदारियों पर चर्चा करते हैं तो ‘भारत’ शब्द सबसे आगे होता है। उनके लिए भारत केवल विकल्प नहीं, अनिवार्यता बन चुका है।



2075 तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान
गोल्डमैन साक्स ने 2075 तक भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे बड़ी होने का अनुमान दिया है और फाइनेंशियल टाइम्स में अर्थव्यवस्था के जाने माने पत्रकार मार्टिन वोल्फ के अनुसार 2050 में भारत की क्रय क्षमता अमेरिका से 30 प्रतिशत अधिक होगी। 


ऐसे आया बदलाव
आधार कार्ड: इसी से बदलावों की यात्रा शुरू हुई। 140 करोड़ लोगों के हाथ में आई इस डिजिटल पहचान का उपयोग रोज 8 करोड़ बार हो रहा है। इसने समावेशी डिजिटल अर्थव्यवस्था की आधारशिला रखी।

इंडिया स्टैक: डिजिटल भुगतान के लिए एक से दूसरे क्षेत्र में काम आने वाले सहमति आधारित डाटा उपयोग को मिलाकर इंडिया स्टैक बना।
जमीनी समावेशन: पश्चिम के भारी-भरकम तकनीकी इनोवेशन के बजाए भारत ने जमीनी स्तर पर डिजिटल समावेशन पर जोर दिया।
तकनीकी कौशल स्टार्टअप: भारतीयों के तकनीकी कौशल, प्रतिभाओं और स्टार्टअप ने इन अवसरों को भुनाया। इसमें सरकार ने भी पूरा सहयोग दिया।

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