लोकमतसत्याग्रह/मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक अपील पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए ग्वालियर सेंट्रल जेल के अधीक्षक विदित सरवैया को जमकर फटकार लगाई। मेडिकल ऑफिसर की सिफारिश की अनदेखी कर कैदी को नई दिल्ली स्थित एम्स में इलाज को नहीं भेजने पर जस्टिस रोहित आर्या ने कहा कि दुनिया भर के प्रोटोकॉल के लिए मध्य प्रदेश पुलिस के पास बल है, लेकिन कैदी को इलाज के लिए भेजने बल की कमी पड़ रही है।
कोर्ट ने जेल अधीक्षक से कहा कि वह स्वयं कैदी को दिल्ली ले जाएं और अच्छे इलाज की व्यवस्था करें। आवश्यकता पड़े तो उसकी सर्जरी भी करवाएं। हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक से कहा- दुनिया भर के प्रोटोकॉल के लिए फोर्स है, कैदी के लिए नहीं, आप खुद दिल्ली ले जाकर इलाज कराएं…
दरअसल, कोर्ट में जेल अधीक्षक ने बताया कि पुलिस फोर्स न मिलने के कारण कैदी को इलाज के लिए दिल्ली एम्स नहीं ले जाया जा सका है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश की जेल में रह रहे प्रत्येक कैदी के स्वास्थ्य की चिंता करने का दायित्व जेल प्रबंधन का है और यह आदेश मध्यप्रदेश की सभी केंद्रीय व अन्य जिलों पर लागू होता है।
कोर्ट ने कैदी की खराब स्वास्थ्य अवस्था को देखते हुए उसे तत्काल दिल्ली ले जाने का भी आदेश दिया। कोर्ट ने मेडिकल ऑफिसर अमर शर्मा को निर्देश दिया कि वह कैदी को आवश्यकता अनुसार एंबुलेंस में ले जाए और जेल प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उसे सही सलामत दिल्ली पहुंचना सुनिश्चित करें। साथ ही कोर्ट ने जेल अधीक्षक को पुलिस बल की उपलब्धता के लिए ग्वालियर एसपी से समन्वय स्थापित करने के लिए भी कहा है।
कोर्ट रूम लाइव
जज बोले– बंदी मरीज के जीवन की सुरक्षा का जिम्मा जेल प्रबंधन का है
जज – मेडिकल रिपोर्ट किसने तैयार की थी?
अधीक्षक – जेल में पदस्थ डॉक्टर आरके सोनी ने ।
जज – रिपोर्ट में क्या लिखा था?
अधीक्षक – मरीज को एम्स दिल्ली के लिए रेफर किया है।
जज – तो मरीज को मरने के बाद ले जाया जाएगा या पहले
अधीक्षक – पुलिस बल की मांग की थी सर; आरआई से कहा बल उपलब्ध कराने को गया था।
जज – आदमी भले ही बंदी है लेकिन यदि वह मरने की कगार पर है तो उसके जीवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी है। यदि उसकी मृत्यु हो गई तो जवाबदेही किसकी होगी। पुलिस बल जहां से लाना है वहां से लाएं। यह तमाशा बंद करें, यह मूर्खता की पराकाष्ठा है।
7 साल से जेल में है कैदी, पेशाब की नली खराब, गोली का घाव
हत्या के केस में 7 साल से जेल में बंद जितेंद्र नाई की ओर से पैरवी करते हुए एडवोकेट आशाराम शिवहरे ने बताया- पहले अगस्त और फिर 12 अक्टूबर को भी हुई सुनवाई में जेल प्रबंधन द्वारा जितेंद्र को दिल्ली ले जाने की बात कही गई। कोर्ट के आदेश की अनदेखी कर जेल प्रबंधन ने पुलिस बल न होने के कारण शुक्रवार तक जितेंद्र को एम्स दिल्ली में भर्ती नहीं कराया। इस गैर जिम्मेदार रवैया के कारण ही कोर्ट ने अधिकारियों की लताड़ लगाई।


