कंपनी को सर्वे में मिली लाइटें कम, निगम भी नहीं बता पा रहा कहां लगी 62 हजार एलईडी

लोकमतसत्याग्रह/शहर में 62 हजार एलईडी कहां पर लगी निगम को भी नहीं पता। क्योंकि शहर में 62 हजार एलईडी लगी ही नहीं है। लेकिन जिस कंपनी ने एलईडी लगाने का दावा किया उसे निगम ने कंपलीशन सर्टिफिकेज जरूरी जारी कर दिया। एचपीएल कंपनी के अफसरों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि सर्वे रिपोर्ट स्मार्ट सिटी को सौंपी जा चुकी है।

सर्वे रिपोर्ट में 62 हजार लाइट लगी नहीं पाई गई। नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अफसर उन पर 62 हजार लाइट का मेंटेनेंस करने की बात कर रहे है। जबकि हकीकत में इतनी लाइट ही उपलब्ध नहीं है तो ऐसे में अनुबंध के अनुसार 62 हजार एलईडी का मेंटेनेंस भला कैसे किया जा सकता है। क्योंकि उनका अनुबंध 1 से 60 वार्ड में लगी एलईडी के लिए हुआ है। ईईएसएल कंपनी द्वारा जितनी एलईडी लगाई गई हैं उतने के लिए हमारे पास स्टाफ उपलब्ध है।शहर में उजाला लाने के नाम पर लगाई गई स्ट्रीट लाइट में बड़ी गड़बडी सामने आई है। क्योंकि स्मार्ट सिटी जहां 1 से 60 वार्ड में 62 हजार स्ट्रीट लाइट लगाने का दावा कर रही है। वहीं हकीकत इससे उलट है। क्योंकि स्ट्रीट लाइट मेंटेनेंस का काम कर रही एचपीएल कंपनी के सर्वे में केवल 49 हजार लाइट ही शहर में लगी मिली हैं। जिसकी रिपोर्ट कंपनी स्मार्ट सिटी को भी सौंप चुका है। लेकिन इस रिपोर्ट पर ना तो स्मार्ट सिटी ने कोई एक्शन लिया और ना ही 62 हजार लाइट की उपलब्धता कंपनी को बता सकी। इसलिए कंपनी केवल शहर में 49 हजार लाइट का मेंटेनेंस कर रही है। कंपनी का कहना है कि उसके हिसाब से उनके पास स्टाफ की उपलब्धता पर्याप्त है।

गौरतलब है कि ईईएसएल कंपनी को शहर की 1से 60 वार्ड में एलईडी लाइट लगाने का टेंडर स्मार्ट सिटी ने वर्ष 2019 में 27 करोड़ का दिया था। जिसमें एनर्जी सेविंग के लिए शहर में 62 हजार लाइट लगाई जानी थी। जिसका मेंटेनेंस का काम जुलाई 2023 में एचपीएल कंपनी को दिया गया। जब एचपीएल कंपनी ने काम संभाला तो शहर में लगी 62 हजार लाइट का मेंटेनेंस करने से पहले सर्वे किया। डेढ़ महीने में सर्वे का काम पूरा हुआ जिसकी रिपोर्ट में बताया गया कि 1 से 60 वार्ड में कुल 49 हजार लाइट ही लगी है।, जिसमें एलईडी और नगर निगम की लगी लाइट भी शामिल हैं।

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