शाकाहार अपनाने से हर साल बच सकती हैं दो लाख जानें, दावा- कृषि आधारित आहार से मिलेगी बेहतर सेहत

लोकमतसत्याग्रह/शाकाहार अपनाने से दुनियाभर में हर साल असमय होने वाली करीब 2.36 मौतों को रोका जा सकता है। शाकाहार से जहां वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद बढ़ सकता है, वहीं लोगों को साफ हवा और बेहतर सेहत भी मिल सकती है। 

नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, एक वेजिटेरियन डाइट एक संपूर्ण आहार है। इसमें फाइबर, विटामिन, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम और कई फाइटोकेमिकल्स का लाभ शरीर को मिलता है। यही कारण है कि शाकाहारियों में कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप और हृदय रोगों का खतरा कम होता है। इसके अलावा शाकाहारी भोजन पचने में आसान होता है।  अध्ययन के अनुसार खाद्य प्रणालियां दुनिया भर में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के एक तिहाई के लिए जिम्मेदार हैं। यदि इसे अनियंत्रित छोड़ दिया जाता है तो ये उत्सर्जन 2060 के दशक में पृथ्वी के औसत तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ाने के लिए काफी होगा और यह अतिरिक्त तापमान को बढ़ा देगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि पशुपालन अमोनिया उत्सर्जन का एक प्रमुख स्रोत है। यह उत्सर्जन अन्य प्रदूषकों के साथ प्रतिक्रिया करके सूक्ष्म कण बनाते हैं, जो हृदय रोग, फेफड़ों के कैंसर और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

कृषि आधारित आहार से घटेगा वायु प्रदूषण
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2019 में बाहरी वायु प्रदूषण से जुड़ी 40 लाख असामयिक मौतें हुईं। इनमें से लगभग पांचवें हिस्से के लिए कृषि जिम्मेदार है। अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि पौधे-आधारित आहार की ओर बढ़ने से वायु प्रदूषण में काफी कमी आई है। बहुत सारे पशुधन वाले क्षेत्र जहां शाकाहार को बढ़ावा दिया गया जैसे कि बेल्जियम, नीदरलैंड, उत्तरी इटली, दक्षिणी चीन और मध्य-पश्चिम अमेरिका में सूक्ष्म कणों की मात्रा में विशेष रूप से स्पष्ट कमी देखी गई ।

पशु उत्पाद कम खाने से तेजी से बढ़ते हैं स्वास्थ्य लाभ
अध्ययन के अनुसार पशु उत्पाद कम खाने स्वास्थ्य लाभ तेजी से बढ़ते हैं। अगर, हर कोई शाकाहारी हो जाए तो वायु प्रदूषण से असमय होने वाली करीब 2 लाख मौतों को रोका जा सकता है। शोधकर्ताओं ने यूरोप और उत्तरी अमेरिका में 1500 लोगों पर अध्ययन के बाद वायु प्रदूषण से असमय होने वाली मौतों को लगभग 20% तक कम करने का दावा किया है। 

मांसाहार से बचने की सलाह
विशेषज्ञों ने मांसाहारियों को अपने आहार में रेड मीट, चिकन और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह दी है । लगातार मांसाहार का सेवन मोटापा, मधुमेह और कैंसर का कारण बनता है। इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से जीवन प्रत्याशा भी कम हो जाती है।

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