लोकमतसत्याग्रह/आपने नमामि गंगे को भेजने के लिए 625.18 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाया है, आपको इस बात की जानकारी तो होगी कि क्या प्रस्ताव भेज रहे हो और इसमें क्या स्वीकृत होगा? आप आला अधिकारी हैं यह नहीं पता कि कोई प्रस्ताव कैसे बनाया जाता है? 599 करोड़ रुपये सिर्फ सीवरेज और वाटर ड्रेनेज प्रोजेक्ट के लिए हैं, जिनका नमामि गंगे से कोई लेना देना ही नहीं है। जिस स्वर्ण रेखा नदी का पुनरुद्धार किया जाना है, उसके लिए सिर्फ 27 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। देखिये, मैं इस मामले को लेकर बहुत गंभीर हूं, एक नदी देखते ही देखते नाले में बदल गई तो आप सभी को भी गंभीर होना पड़ेगा।ज् यह बात बेहद नाराजगी के साथ हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में स्वर्ण रेखा नदी के पुनरुद्धार और सालिड वेस्ट व वाटर ड्रेनेज से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए युगलपीठ के जस्टिस रोहित आर्या ने आयुक्त नगर निगम हर्ष सिंह से कही। सुनवाई के दौरान जस्टिस आर्या ने नगर निगम आयुक्त को जमकर लताड़ा। नमामि गंगे योजना के अंतर्गत स्वर्ण रेखा नदी के पुनरुद्धार के लिए कितना फंड देना है, इसको लेकर जब आयुक्त स्थिति स्पष्ट नहीं कर सके तब हाई कोर्ट ने पूछा कि स्वर्ण रेखा के लिए कितना पैसा चाहिए तो इसका भी कोई संतुष्टिजनक जवाब नहीं दे पाए, जिसपर हाई कोर्ट ने सख्त आदेश देते हुए कहा कि इस मामले में कितना फंड स्वीकृत होना है और प्रक्रिया कहां तक पहुंची है, इसकी पूरी जानकारी लेकर अगली तारीख में नगर निगम और स्मार्ट सिटी के सभी जिम्मेदार अधिकारी हाई कोर्ट में मौजूद रहें। इस मामले में अगली सुनवाई 17 जनवरी को होगी।
कोर्ट का समय क्यों बर्बाद करते हो
जस्टिस आर्या ने सुनवाई के दौरान अधिकारियों से कहा कि अगर आप लोग चाहते हो कि यह याचिका इस कोर्ट से चली जाए तो ठीक है, मैं इसे जबलपुर बैंच में ट्रांसफर करवा देता हूं । हमारा और इस कोर्ट का समय फिर क्यों बर्बाद कर रहे हो ? अपनी कलम कोई नहीं चलाना चाहता है अपनी परेशानी सभी को एक दूसरे के पाले में डालनी होती है।
2 साल तक सिर्फ फंड लेते रहोगे
इसी जनहित याचिका के साथ सीवर लाइन से जुडी जनहित याचिका पर भी सुनवाई हुई । हाईकोर्ट ने कहा कि कहानी नहीं क्या प्लान है आपका वह बताओ। इस पर प्रशासन की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कहा कि 40 साल पुरानी पाइप लाइन हैं , ब्लाकिंग से समस्या का समाधान तब तक नहीं होगा जब तक जलालपुर से फ्रेश लाइन को जोड नहीं दिया जाता । इस पर जस्टिस आर्या ने पूछा कि कितना समय लगेगा इसमें तो उन्होंने कहा कि दो साल का प्रोजेक्ट है । जिसमें तल्ख टिप्पणी करते हुए जस्टिस आर्या ने कहा कि 2 साल तक क्या करेंगे आप , चीफ सेक्रेटरी से फंड ही लेते रहेंगे ? 6 महीन में तो आप फंड ले नहीं पाए।
यही दिन आने वाले हैं , भीख मांगो:
इस याचिका में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वन विभाग से आए अधिकारी से पूछा कि क्या काम किया है आपने अब तक, जिस पर उस संबंधित अधिकारी ने बताया कि हनुमान बांध तक 200 मीटर का क्षेत्र चयनित किया गया है साथ ही फंड के लिए राज्य शासन को पत्र भी भेज दिया है। अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि इसके साथ एनजीओ और सिविल सोसाइटी की भी सहभागिता के साथ प्लांटेशन करेंगे। इस पर कोर्ट ने कहा कि च्यही दिन आने वाले हैं, सरकार का खजाना खाली दिख रहा है। तो भीख मांगो, जनता से पैसा इकट्ठा कर के उन्हीं के काम करो। चैरिटी का आफिस खोल लो, जनता से काहे कि पैसे नहीं हैं , पैसे दे दो तो हम पेड पौधे लगा लें।ज्
हाईकोर्ट ने इन बातों पर जोर दिया
- ध्यान रखें सीवरेज के काम में स्वर्णरेखा नदी का काम प्रभावित न हो।
- नदी के ट्रैक पर जो फ्लो है उसे ब्लाक करने से पहले उसको डायवर्ट करने की व्यवस्था करें।
- सीवर के पानी को डायवर्ट करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि यह पानी डायवर्ट हो कर जाएगा कहां ।


