लोकमतसत्याग्रह/केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना (पीएम जन आरोग्य योजना, पीएम-जय) के तहत 5 लाख रुपए तक का फ्री इलाज मिलता है। अब इस राशि को 10 लाख रुपए किए जाने पर काम चल रहा है। केंद्र के इस फैसले ने राज्य सरकारों की टेंशन बढ़ा दी है।
असल में योजना पर 60 से 70 फीसदी खर्च राज्य सरकारों को ही करना पड़ रहा है। इससे राज्यों के खजाने पर बोझ बढ़ता जा रहा है। इसके चलते कई राज्य इस योजना को तेजी से आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। अब कुछ राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा कि योजना के तहत खर्च होने वाली राशि का 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार उठाए।
सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। उन्होंने आग्रह किया था कि केंद्र सरकार ने 2018 में योजना लागू होने के बाद से प्रीमियम राशि की समीक्षा नहीं की है। इसे तत्काल बढ़ाया जाए।
राज्यों ने दायरा बढ़ाया, बीमा कवर 10 लाख रुपए
योजना के तहत राज्यों का खर्च बढ़ने की वजह यह भी है कि केंद्र सिर्फ सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना (एसईसीसी) में शामिल लोगों को ही लाभ देता है। जबकि कुछ राज्य सरकारों ने इसका दायरा बढ़ा दिया है। वे दूसरे वर्गों को भी लाभ दे रही हैं। वहीं कुछ राज्यों ने बीमा कवर भी 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपए कर दिया है।
केंद्र सरकार ने 5 साल से हिस्सेदारी नहीं बढ़ाई
शुरुआती दौर में केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों के आकलन के आधार पर प्रति परिवार पांच लाख के बीमा के लिए प्रीमियम राशि 1051 रुपए तय की थी। केंद्र अपनी 60% हिस्सेदारी के तहत प्रीमियम की राशि 630.60 रुपए देता है। अब प्रीमियम करीब दो हजार रुपए पहुंच गई है। ऐसे में 75% रकम राज्यों को वहन करनी पड़ रही है।
NHA का तर्क: सब राज्यों में नहीं बढ़ी बीमा की प्रीमियम
नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA ) के एक अधिकारी का कहना है कि कुछ राज्यों में बीमा की राशि बढ़ गई है। हालांकि अब भी कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां बीमा राशि 1052 रुपए तक सीमित है।
MP: 6.50 लाख कर्मी आयुष्मान योजना से जुड़ेंगे, 5 लाख तक कैशलेस इलाज
मध्य प्रदेश सरकार राज्य के 6.50 लाख कर्मियों, संविदा कर्मियों (आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आशा एवं ऊषा कार्यकर्ता और आशा सुपरवाइजर) को आयुष्मान योजना में शामिल करेगी। इन कर्मियों को 5 लाख रुपए तक का इलाज कैशलेस मिल सकेगा। सरकार ने इसके लिए सोमवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति का गठन किया है। उधर, प्रदेश के 4.50 लाख नियमित कर्मियों को 10 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। इसके बाद कर्मचारी के इलाज में खर्च राशि को सरकार रीइंबर्समेंट करती है।
17 सितंबर 2023 से शुरू हुआ था तीसरा फेज
आयुष्मान योजना का तीसरा फेज (आयुष्मान 3.0) 17 सितंबर से शुरू हुआ था। तीसरे फेज में कार्ड बनवाने की प्रोसेस को आसान बनाया गया था। तीसरे फेज के बाद लोगों के तेजी से कार्ड बने। लोग खुद ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करके यह काम कर रहे थे।
आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए केंद्र सरकार ने मोबाइल फोन पर भी आयुष्मान कार्ड ऐप के जरिए अप्लाई करने की सुविधा दी है। ऐप डाउनलोड करने के बाद लाभार्थी को मोबाइल नंबर की मदद से रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद ओटीपी, आइरिस और फिंगरप्रिंट और फेस-आधारित वेरीफिकेशन की मदद से रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को पूरा करना होगा।
यहां आपको जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे राशन कार्ड, आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो पैन कार्ड या अन्य अपलोड करना होगा। इसके बाद सरकार आपकी रिक्वेस्ट को वैरिफाई करने के बाद आपका नाम योजना में रजिस्टर्ड कर देगा। हालांकि इस प्रोसेस से पहले आपको ये चेक कर लेना चाहिए की आप इसके लिए पात्र हैं या नहीं।
कॉल करके पता करें आप आयुष्मान कार्ड के लिए पात्र हैं या नहीं
इस योजना के लिए कुछ पात्रता निर्धारित की गई है। यह पात्रता रखने वाले लोग आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए अप्लाई कर सकेंगे। आयुष्मान योजना के लिए पात्रता जांचने के लिए आप 14555 पर काल कर सकते हैं। इसके अलावा आप pmjay.gov.in साइट के जरिए भी अपनी पात्रता चेक कर सकते हैं।
इस योजना सभी बीमारियां होती हैं कवर
योजना में पुरानी बीमारियां भी कवर होती हैं। किसी बीमारी में अस्पताल में एडमिट होने से पहले और बाद के खर्च इसमें कवर होते हैं। ट्रांसपोर्ट पर होने वाला खर्च इसमें कवर होता है। सभी मेडिकल जांच, ऑपरेशन, इलाज जैसी चीजें इसमें शामिल हैं। इस योजना के तहत अब तक साढ़े 5 करोड़ से ज्यादा लोग अपना इलाज करा चुके हैं।


