चैंबर ने कहा-मेले का गिर रहा स्वरूप, मुख्य द्वार पर अंधेरा, सचिव बोले-बोर्ड गठित नहीं

लोकमतसत्याग्रह/ग्वालियर व्यापार मेला को और बेहतर बनाने के लिए बुधवार को चैंबर आफ कामर्स की कार्यकारिणी समिति और मेला प्राधिकरण के बीच सुझाव देने के लिए बैठक का आयोजन किया गया है। बैठक में मेले को बेहतर बनाने के सुझाव तो आए, लेकिन चैंबर पदाधिकारियों ने मेला की बदहाली का दर्द भी सामने रखा। अव्यवस्थाओं से लेकर गिरते वैभव और बुनियादी समस्याओं की बात व्यापारियों ने उठाई। वहीं मेले की बेहतरी को लेकर मेला अपनी निर्धारित अवधि में प्रारंभ हो और वर्ष भर आयोजन का सुझाव दिया गया। बैठक में सौ कार्यकारिणी सदस्य शामिल हुए। मेला सचिव ने पीड़ा जताई कि बोर्ड गठित न होने से निर्णय लेने में परेशानी आती है। अध्यक्षता करते हुए डा. प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि मेले मे बैठक का आशय है कि आज हम केवल मेले की बेहतरी के सुझावों पर ही चर्चा करेंगे। कहा कि मेले की पहचान के रूप में स्थापित पशु मेला, दंगल, कबड्डी स्थानीय खेल और संस्कृति का भी फोकस कर चालू किया जाये जिससे स्थानीय प्रतिभाओं के साथ ग्रामीण परिवेश को भी जोड़ा जा सके। मेला के लिए मौसम के सीजन के हिसाब से नाइट चाट बाजार के साथ कैलेंडर बनना चाहिए जिससे वर्ष भर आयोजन हो सके। मानसेवी सचिव दीपक अग्रवाल ने कहा कि हम सभी को आज ऐसे सुझाव देना है जिससे मेला अपने पुराने स्वरूप को प्राप्त कर सके।

मेला को बेहतर बनाने के लिए बैठक में यह आए सुझाव

·  नाइट चाट बाजार लगे, फेसिलेटेशन सेंटर का वास्तविक उपयोग हो द्य प्रगति मैदान की तर्ज पर मेले में औद्योगिक और व्यापारिक मेला लगे।

·  मेला अवधि के बाद अनाधिकृत प्रवेश रोकने सुरक्षा के लिए गेट बंद हो।

·  मेला का एक सेक्टर की दुकानें पक्की बने धीरे-धीरे सारी दुकानें पक्की बनाई जाएं।

·  दंगल के लिए एक स्टेडियम बना था करोड़ों रुपये की लागत से बना यह स्टेडियम नशे का स्थल हो गया है उसे पूरा कर उसका उपयोग हो

·  मेले का आधुनिकीकरण होकर तकनीक का इस्तेमाल कर आनलाइन दुकानों की बुकिंग और आनलाइन पार्किंग की पर्ची भी कटे। झूले सुरक्षित लगे।

बाल रेल स्थानीय आयोजन बंद, पार्किंग भी ऊबड खाबड़

उपाध्यक्ष डा. राकेश अग्रवाल ने कहा कि मेला का अपना इतिहास है, लेकिन इसका स्वरूप निरंतर गिरावट की और है। निरंतर इस पर कार्य करना होगा। संयुक्त सचिव पवन अग्रवाल ने कहा कि पार्किंग की स्थिति ऊबड़-खाबड़ है, वहीं रेसकोर्स रोड के मुख्य द्वार पर अंधेरा रहता है जिससे मुख्य सड़क से लगता ही नहीं है कि इतने बड़े आयोजन स्थल हैं। कोषाध्यक्ष संदीप नारायण अग्रवाल ने कहा कि मेले में पहले विभागों की प्रदर्शनी बाल रेल और स्थानीय आयोजन होते थे जो अब नहीं दिखते है जो पहले सिर्फ मेला में दिखते थे जिसका लोगों को इंतजार रहता था। मेला प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक प्रेमी ने कहा कि सौ एकड़ से अधिक जगह पर 120 वर्षो से लगने वाले इस मेला की शुरुआत माधव महाराज प्रथम ने की थी लेकिन अव्यवस्थाओं की वजह से यह अपने वैभव को खो चुका है इसके सुधार के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करने होंगे।

बोर्ड का गठन नहीं हो तत्काल निर्णय नहीं ले पाते: सचिव

बोर्ड का गठन नहीं तो तत्काल निर्णय नहीं ले पाते: सचिव मेला सचिव ने कहा कि हम निरंतर मेला सुधार के लिए कार्य कर रहे हैं, लेकिन बोर्ड का गठन नहीं होने के कारण कई बार तत्काल निर्णय लेने मे असुविधा होती है, सुझावों में जो नीतिगत है उसका प्रस्ताव भेजेंगे। चैंबर सुझावों का प्रस्ताव सरकार को भेजेगा। ग्वालियर की पहचान को बनाये रखने के लिए हरिद्वार मिष्ठान भंडार के संचालक ललित अग्रवाल को सम्मानित भी किया गया।

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