शहर में नजर आता है विकास, गांवों में मूलभूत सुविधाओं की कमी

लोकमतसत्याग्रह/हज, सरल और सौम्य स्वभाव के धनी ग्वालियर सांसद विवेक नारायण शेजवलकर को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता स्व. नारायण कृष्ण शेजवलकर पहले भारतीय जनसंघ और फिर भाजपा से ग्वालियर संसदीय क्षेत्र के सांसद रह चुके हैं। भाजपा के गढ़ ग्वालियर में महल यानी सिंधिया राजघराने का दबदबा हमेशा रहा है। यह सीट दिग्गज सांसदों के कारण भी पहचानी जाती है। वर्ष 1984 में दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी को हराकर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया ने वर्ष 1998 तक लगातार पांच बार इस सीट का नेतृत्व किया। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे जयभान सिंह पवैया भी ग्वालियर से सांसद रह चुके हैं।

85 प्रतिशत सांसद निधि का उपयोग किया

विवेक नारायण शेजवलकर ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) यानी अपनी सांसद निधि का भरपूर उपयोग किया है। उनका दावा है कि करीब 85 प्रतिशत सांसद निधि जनहित के कार्यों में खर्च की जा चुकी है। शेष 10 से 15 प्रतिशत राशि से विकास कार्य प्रस्तावित हैं। सांसद निधि का कोरोना काल में जयारोग्य अस्पताल सहित ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर सुधारने के लिए उपयोग किया गया था। जयारोग्य अस्पताल के लिए 50 लाख रुपये एकमुश्त दिए गए थे। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर करने के लिए इस निधि का उपयोग किया। संसदीय क्षेत्र में विद्युतीकरण पर एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, सड़कों व सामुदायिक भवनों के निर्माण कराने के लिए सांसद निधि का उपयोग किया।

गांवों में सड़कें हैं पर सामुदायिक भवनों का अभाव

ग्वालियर संसदीय सीट के आठ विधानसभा क्षेत्रों में से पांच ग्रामीण क्षेत्र में हैं। तीन शहरी क्षेत्र में हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी नजर आती है। गांवों में सीसी रोड व डामर की रोड का जाल तो बिछा है, किंतु अब भी कई गांवों में सामुदायिक भवनों की आवश्यकता है। बिजली घर-घर तक पहुंचाने के लिए खंभे तो हैं, लेकिन कई गांवों के रास्ते अंधेरे में रहते हैं। कई गांवों में पेयजल की समस्या आज भी है। शहरी क्षेत्र में भी सड़कों की हालत खराब है। ट्रैफिक जाम अब भी बड़ी समस्या बनी हुई हैं। ग्वालियर शहर में सार्वजनिक यातायात की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण इसे अच्छे और विकसित शहर का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

आदर्श ग्राम सहौना में कई काम बाकी

विवेक नारायण शेजवलकर का गोद लिया गांव सहौना डबरा विधानसभा क्षेत्र में आता है। करीब 1200 की आबादी वाले इस गांव में सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए वर्ष 2019 में 25 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। किंतु अब तक केवल 10 लाख रुपये ही जारी हुए हैं। इससे भवन निर्माण अधूरा है। गांव में बिजली-पानी की समस्या है। कुछ सड़कों की हालत जरूर सुधरी है। घरों में पक्के शौचालयों का निर्माण हुआ है। कुछ ग्रामीणों को केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी मिला है। देखने में लगता ही नहीं है कि यह आदर्श गांव है। पंचायत भवन पर आदर्श ग्राम पंचायत सहौना अवश्य लिखा हुआ है लेकिन इस पर ज्यादातर समय ताला लगा रहता है।

नल-जल योजनाओं में हुआ विशेष काम

इतने बड़े नेताओं का नेतृत्व पा चुके इस क्षेत्र में खास बात यह देखने को मिलती है कि शहर का विकास तो हुआ लेकिन ग्रामीण इलाके आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। विवेक शेजवलकर के कार्यकाल में केंद्रीय योजनाओं, खासकर नल-जल योजनाओं में विशेष काम हुआ। उनके प्रयास से घाटीगांव ब्लाक के 186 गांवों में घर-घर पेयजल पहुंचाने के लिए चेक डैम के निर्माण पर 386 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस क्षेत्र के भूजल में कैंसर उत्पन्न करने वाले तत्व पाए गए थे। इस कारण क्षेत्र के इन गांवों में कैंसर के मरीज निरंतर बढ़ रहे थे। केंद्रीय दल से जल स्रोतों का सर्वे कराया गया और इस समस्या का स्थायी समाधान इस योजना के रूप में सामने आया।

भागदौड़ पूरी पर श्रेयलेने में रहे जाते हैं पीछे

विवेक नारायण शेजवलकर क्षेत्र में पूरे पांच वर्ष सक्रिय रहे। केंद्रीय मंत्रियों को कई पत्र भी लिखे। अपने कार्यकाल में ग्वालियर संसदीय क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होने वाली कोई विशेष उपलब्धि अपने नाम दर्ज नहीं करवा पाए। इसकी एक वजह करीब तीन वर्ष तक कोरोना संक्रमण का दौर रहना भी है। एलिवेटेड रोड का निर्माण शुरू होना, नया एयरपोर्ट बनकर तैयार होना, रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का काम शुरू होना आदि उनकी कार्यकाल की उपलब्धियां हैं।

मेरे कार्यकाल में ग्वालियर संसदीय क्षेत्र का अच्छा विकास हुआ है। कुछ विकास कार्य इसी कार्यकाल में पूरे होने थे, किंतु कोरोना की वजह से उनकी गति धीमी रही। ग्वालियरआगरा सिक्स लेन, ग्वालियरइटावा रोड की स्वीकृति हो चुकी है। इसके साथ मोहना में फ्लाईओवर का निर्माण, रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का कार्य और एयरपोर्ट विस्तार का काम भी हुआ है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को केंद्र सरकार में उड्डयन मंत्री का दायित्व मिलने के बाद इस कार्य को और गति मिली। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग खेल परिसर का लोकार्पण हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय बस अड्डे का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर कई ट्रेनों के स्टापेज मिले हैं। हरिशंकपुरम ओवरब्रिज का निर्माण जारी है। महूजमाहर ओवरब्रिज तैयार है। मेरी दिली इच्छा थी कि शहर में फूलबाग से किले तक रोपवे का निर्माण हो। इसका 25 प्रतिशत कार्य भी हुआ। फिर अटक गया। अब फिर जाने कैसे स्थान परिवर्तन हो गया है। रोपवे का निर्माण होना चाहिए।

विवेक नारायण शेजवलकर, भाजपा सांसद, ग्वालियर

गांव में सड़कें हैं। नलजल योजना से पानी भी आता है। उम्मीद है कि सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य जल्द पूरा होगा। सांसद जी गांव की चिंता करते हैं।

सुशीला देवी जाट, सरपंच, सहौना आदर्श गांव

छछोंदा नदी पर रपटे की मांग लंबे समय से ग्रामवासी कर रहे हैं। बारिश के समय नदी का बहाव अधिक हो जाता है। दो लोगों की डूबने से मौत भी हो चुकी है।

श्रीनिवास सिंह, स्थानीय निवासी

खेतीकिसानी के अलावा रोजगार का दूसरा कोई साधन नहीं होने के कारण गांव के लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। रोजगार की तलाश में शहरों में जाना पड़ता है।

मुकेश शर्मा, स्थानीय निवासी

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