नैनो यूरिया के परिणामों पर शोध, इफिको सहित देश की आठ कृषि विश्वविद्यालय के विज्ञानी जुटे

लोकमतसत्याग्रह/फसलों पर नैनो यूरिया के प्रभावों को पता करने के लिए ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय व इफिको सहित आठ इंस्टीट्यूट एवं विश्वविद्यालयों के कृषि विज्ञानी शोध कर रहे हैं। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय को बाजरा, चना और सोयाबीन की फसल पर नैनो यूरिया के प्रभाव का पता लगाने की जिम्मेदारी मिली है। अन्य विश्वविद्यालय के विज्ञानी अलग अलग फसलों पर नैनो यूरिया के प्रभाव व दुष्प्रभाव का पता लगा रहे हैं।

यह शोध वर्ष 2025 में पूरा होगा और साइंटिफिक डेटा जनरेट किया जाएगा। यह डेटा स्टेट डिपार्टमेंट,इफिको और केंद्रीय कृषि मंत्रालय को भेजा जाएगा। जिसके बाद किसानों का नैनो यूरिया की उपयोगिता और उसके प्रभाव से अवगत कराते हुए उपयोग करने की सलाह दी जाएगी।

नैनो यूरिया बाजार में आ चुका है पर शोध अब भी जारी

असल में ईफिको ने नैनो यूरिया तैयार किया और उसे बाजार में लेकर आ चुका है। लेकिन किसान अभी नैनो यूरिया पर पूरी तरह से भरोसा नहीं जता पा रहे हैं जिसके कारण उसकी उपयोगिता नहीं बढ़ी है। इसी को लेकर अब सरकार ने कृषि विज्ञानियों को नैनो यूरिया के विषय में पूरी पड़ताल करने की जिम्मेदारी दी है। जिससे किसानों को उसके लाभ के विषय में बताया जा सके।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह राष्ट्र व्यापी प्रकल्प है। जिसको लेकर अब भारत सरकार नैनो डीएपी जल्द लेकर आने वाला है। इसके साथ ही मालनपुर में नैनो यूरिया की एक यूनिट लगाने के लिए जगह भी एक कंपनी को आवंटित की गई है।

इन यूनिवर्सिटी के विज्ञानी कर रहे शोध

ग्वालियर की कृषि यूनिवर्सिटी सहित देश की आठ कृषि यूनिवर्सिटी के विज्ञानी फसलों पर नैनो यूरिया के प्रभाव का पता लगाने के लिए शोध कर रहे हैं।

इस प्रोजेक्ट को तमिलनाडु एग्रीकल्चर कृषि यूनिवर्सिटी नेतृत्व कर रही है इसके अंतर्गत इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टिट्यूट नई दिल्ली में गेहूं और सरसों पर शोध हो रहा है, क्रीडा हैदराबाद यह मक्का और अरहर पर शोध, जीबी पंत यूनिवर्सिटी पंतनगर उत्तराखंड में धान व सरसों पर शोध।

बसंत राव नायक मराठबाड़ा परभणी महाराष्ट्र यंहा अरहर मक्का, गेहूं पर शोध होगा। इंस्टिट्यूट ओफ़ नैनो साइंस आफ टेक्नोलाजी मोहाली पंजाब में माइक्रो न्यूट्रीयंट्स में बायोलाजिकल, नाइट्रोजन फिक्सेशन, ग्रीनहाउस गैसेस का इम्यूनिशन आदि का पता किया जाएगा। जबकि ग्वालियर राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय सरसों चना और सोयाबीन पर शोध हो रहा है इसको ओवर ओल यूनिवर्सिटी के संपर्क में इफिको रहेगा।

नैनो यूरिया पर चार तरीके से होगा शोध

  • सुपर नैनो यूरिया
  • सुपर नैनो यूरिया के साथ सल्फर
  • नैनो एनपीके जिसमें नाइट्रोजन पोटाश और फास्फोरस शामिल है।
  • नैनो ट्रेस एलिमेंट्स जिसमें माइक्रोन्यूट्रिएंट्स इसमें मैंगनीज मोलीविडनम, कापर, जिंक, आयरन कैल्शियम शामिल है
  • ईनका पौध की पत्ती और मिट्टी पर तथा पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा इसका पता लगाया जाएगा।

यह कर रहे शोध

इसमें ग्वालियर के विज्ञानी डाक्टर एकता जोशी, डा. सुषमा तिवारी, डा. निशांत, डा. अंकित साहू और डा. प्रियदर्शनी की टीम काम कर रही है

दो हेक्टेयर जमीन पर होगा उर्वरक का प्रयोग

कृषि विज्ञानी डा. एकता जोशी का कहना है कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय को बाजारा, चना और सोयाबीन की फसल पर नैनो यूरिया के प्रभाव को देखना है। इसके लिए इन फसलों को दो हेक्टेयर भूमि में बोया गया है। जिस पर मशीन की मदद से नैनो यूरिया का छिड़काव किया जा रहा है।

इसी तरह से दिल्ली की आईआरआई कृषि यूनिवर्सिटी को गेहूं और सरसों की फसल पर शोध करना है। वहीं महाराष्ट्री की दोनों यूनिवर्सिटी में जिन फसलों पर नैनो यूरिया का शोध किया जाना है उन फसलों पर उर्वरक का छिड़काव ड्रोन की मदद से होगा। जिससे इस बात का भी पता चलेगा कि नैनो यूरिया का छिड़काव सामान्य हाथ की मशीन या ड्रोन से करने पर अधिक प्रभावी होगा।

शोध में इन बातों का लगेगा पता

  • नैनो यूरिया का फसल पर छिड़काव में ड्रोन व सामान्य पद्दति के प्रयोग से होने वाले अंतर।
  • फसल पर नैनो यूरिया कैसे काम करता है
  • नैनो यूरिया से कितने बैग यूरिया रिप्लेस होगा।
  • नैनो यूरिया के प्रयोग बढ़ने से किसान की आय पर क्या प्रभाव होगा ,कितनी बचत होगी।
  • फसल की उत्पादकता पर क्या प्रभाव होगा।
  • मिट्टी के स्वास्थ्य,पर्यावरण और मनुष्य के स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव होगा।

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