लोकमतसत्याग्रह/कोई इंसान जब किसी मामले में परेशान हो जाता है या सिस्टम से बहुत दुखी होता है तब वह किसी मामले मे आरटीआइ लगाकर संबंधित जानकारी मांगता है। ऐसे मामले में लोगों की समस्या को गंभीरता से समझते हुए अधिकारियों काे आरटीआइ का निराकरण संवेदनशील तरीके से करना चाहिए , या फिर ऐसी दुरुस्थ व्यवस्था रखना चाहिए जिससे व्यक्ति को आरटीआइ लगाने की आवश्यकता ही न पडे। यह बात प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने शहर में एक परिचर्चा के दौरान कही। उन्हाेंने लोगों के आरटीआई से जुड़ी समस्याएं और उनके समाधान के बारे में विस्तार से बताया । इस परिचर्चा में शामिल लोगों ने उनसे अपने कुछ सवाल भी पूछे जिनका उन्होंने काफी सुलझा हुआ जवाब देकर उनकी शंका दूर की।
कागजों को घुमाना गलत
राहुल सिंह बताते हैं कि कई बार ऐसा देखने में आता है कि कोई व्यक्ति आरटीआइ लगा तो देता है लेकिन उसकी आरटीआइ का जवाब नहीं मिलता है। उसकी फाइल काे सिर्फ घुमाया जाता है और अंत में जवाब में भेजा जाता है कि जानकारी उपलब्ध नहीं है। यदि जानकारी उपलब्ध नहीं है तो ऐसा क्यों है इसके बारे में भी आवेदन कर्ता को अवगत करवाना चाहिए । सिर्फ यह कह देना कि जानकारी उपलब्ध नहीं है , यह पर्याप्त नहीं होता।
सबसे ज्यादा आरटीआइ पंचायत की
राज्य सूचना के आयुक्त ने तुलनात्मक रूप से प्रदेश मे आरटीआइ की स्थिति साझ़ा करते हुए बताया कि प्रदेश में सबसे ज्यादा आरटीआइ इस समय पंचायत विभाग में लगाई जा रही है। इसके बाद लोगों को नगरी निकाय से काफी शिकायतें होती हैं जिनके बारे में उन्हें जानकारी लेना होती है। वहीं बात करें पुलिस की तो इस मामले में पुलिस विभाग तीसरे स्थान पर है। दरअसल आरटीआइ एक्ट में सद्भावना के तहत कार्यवाही करने का भी प्रावधान है। अगर कोई अधिकारी भी आरटीआइ की जानकारी देने में गड़बड़ करता है ताे उसके खिलाफ 25 हजार तक की पेनल्टी या अनुशासनिक कार्यवाही की जा सकती है।


