लोकमतसत्याग्रह/प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी और बेपरवाही से मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की अरबों की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। मामला 220 केव्ही सबस्टेशन सिथौली की लगभग 32 हेक्टेयर जमीन के एक बड़े हिस्से में अनाधिकृत लोगों द्वारा कब्जा किए जाने का है। कब्जे के चलते 400 केवी सबस्टेशन का निर्माण अटक गया है। ट्रांसमिशन कंपनी प्रशासनिक अफसरों को अतिक्रमण हटाने के लिए पत्राचार कर चुकी है, लेकिन अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई न होने से कब्जे बरकरार हैं। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण के चलते नेटवर्क का विस्तार करने में दिक्कत आ रही है।
मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल द्वारा 1990 में ग्वालियर शहर की उस समय और भविष्य में विद्युत पारेषण व्यवस्था मजबूत करने के लिए सिथौली, नागौर तुरारी के पास 32 हेक्टेयर निजी भूमि को भू-अर्जन अधिनियम के तहत अर्जित किया था। इसके लिए विद्युत मंडल द्वारा एक करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। इसके बाद यहां 220 केवी सबस्टेशन तैयार किया गया। साथ ही 400 केवी सबस्टेशन बनाया जाना प्रस्तावित था। लेकिन सब स्टेशन निर्माण की प्रक्रिया शुरू होती उससे पहले ही पावर ग्रिड ने अपना 400 केवी सब स्टेशन बनाकर उर्जीकृत कर लिया। जिससे मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी को उस समय सब स्टेशन बनाने की जरूरत नहीं पड़ी। अब ग्वालियर शहर विस्तारित होने के कारण जरूरत महसूस हुई, लेकिन अब जमीन पर कब्जे हो गए।
कंपनी को प्रारंभिक सर्वे में मिला अतिक्रमण
400 केवी सब स्टेशन निर्माण के लिए ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकारियों ने जब सर्वे करवाया तो पता लगा कि जिस जमीन पर उनका हक है वहां पर खेती होने के साथ निर्माण तक कर लिए गए हैं। इस कारण सब स्टेशन निर्माण के साथ नेटवर्क को मजबूत करने में दिक्कत आ रही है। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि एक निर्माण पर अदालत में मामला चला था और उच्चतम न्यायालय ने कंपनी के पक्ष में फैसला देकर अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, लेकिन अतिक्रमण नहीं हटा।
जमीन पर अतिक्रमण के चलते नेटवर्क विस्तार करने में दिक्कत आ रही है। प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार पत्राचार कर चुके हैं, लेकिन अब तक अतिक्रमण नहीं हट सके हैं। इससे 400 केवी सब स्टेशन का निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हो पा रहा है।
शशिकांत ओझा, जनसंपर्क अधिकारी, मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी जबलपुर


