चंबल से पानी लाने के प्रोजेक्ट के लिए 458 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति

लोकमतसत्याग्रह/महापौर डा. शोभा सिकरवार की अध्यक्षता में आयोजित मेयर इन काउंसिल (एमआइसी) की बैठक में बुधवार को 11 बिंदुओं पर चर्चा की गई। इनमें से 10 बिंदुओं को एमआइसी ने स्वीकृत कर दिया। एमआइसी ने चंबल से पानी लाने के प्रोजेक्ट में खर्च होने वाले 458 करोड़ रुपए से अधिक की राशि की वित्तीय स्वीकृति देने के साथ ही महाराज बाड़ा और थीम रोड पर नवीन होर्डिंग, यूनीपोल, पोस्टर, फ्लैक्स, बैनर, कटआउट आदि समस्त प्रकार से विज्ञापन करना प्रतिबंधित किया है। वहीं हुरावली की 23 बीघा जमीन पर व्यवसायिक एवं आवासीय परिसर व स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स की डीपीआर बनाने के बिंदु को वापस लौटाते हुए इस जमीन को निजी बिल्डरों को बेचने का विकल्प पूछा। जब अधिकारियों ने तकनीकी अड़चनों का हवाला दिया, तो एमआइसी ने इस प्रस्ताव को वापस लौटा दिया।

बाल भवन स्थित टीएलसी कक्ष में आयोजित बैठक में महाराज बाड़ा एवं थीम रोड महल गेट से कटोराताल होते हुए मांढरे की माता चौराहा तक पर्यटन एवं हेरिटेज क्षेत्र की दृष्टि से विज्ञापन से संबंधित समस्त संसाधनों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने के निगमायुक्त के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इसके बाद हुरावली स्थित निगम स्वामित्व की 23 बीघा जमीन पर व्यवसायिक एवं आवासीय परिसर के निर्माण के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर 238 करोड़ रुपए की लागत आएगी, जबकि संपत्ति की बिक्री लगभग 331 करोड़ रुपए की होगी। निगम को 95 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ होने का अनुमान है। इस पर एमआइसी सदस्य अवधेश कौरव ने अधिकारियों से पूछा कि यह प्रोजेक्ट पूरा करने में कितना समय लगेगा। अधिकारियों ने कहा कि प्रोजेक्ट 24 माह में पूरा होगा। इस पर सदस्यों का कहना था कि 95 करोड़ रुपए कमाने के लिए दो साल का इंतजार करना पड़ेगा। इससे बेहतर है कि इस जमीन को निजी बिल्डरों को बेच दिया जाए। इससे तुरंत ही निगम को पैसा मिल सकता है। इस पर अधिकारियों ने कहा कि इस जमीन का बाजार मूल्य अधिक है, जबकि बिल्डर को बेचने की स्थिति में कलेक्टर गाइडलाइन का पालन करना होगा। एमआइसी सदस्यों ने कहा कि जमीन की नीलामी करने से ज्यादा रकम मिल सकेगी, तो अधिकारियों ने बताया कि जमीन बेचने के लिए शासन स्तर से स्वीकृति लेनी होगी, जबकि यह प्रोजेक्ट तैयार होने पर स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स की लगभग 12 बीघा जमीन सदैव निगम के स्वामित्व की रहेगी। इस पर एमआइसी सदस्यों ने इस जमीन को बेचने के लिए शासन से स्वीकृति लेने सहित अन्य विकल्प की विस्तृत जानकारी के साथ प्रस्तुत करने के निर्देश देकर प्रस्ताव को लौटा दिया।

हुरावली को रोका, सागरताल पर दी स्वीकृति

निगमायुक्त ने हुरावली की तरह ही सागरताल स्थित निगम भूमि पर भी व्यवसायिक एवं आवासीय परिसर के निर्माण की डीपीआर बनाने और टेंडर बुलाने की सैद्धांतिक स्वीकृति का प्रस्ताव भेजा था। इस पर चर्चा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि सागरताल स्थित खाली भूमि पर थ्री बीएचके के 80, टू बीएचके के 160 और वन बीएचके के 80 फ्लैट तैयार करने की योजना है। इसके अलावा 140 वर्गमीटर एरिया में क्लब हाउस एरिया के साथ ही तलघर और भूतल पर पार्किंग का प्रविधान किया गया है। यहां 101 दुकानें भी बनाई जाएंगी, जिनकी नीलामी से राजस्व कमाया जाएगा। प्रारंभिक तौर पर फ्लैटों की कीमत आठ से 30 लाख रुपए रखने का विचार किया गया है। इस परियोजना में नगर निगम 63.76 करोड़ रुपए खर्च करेगा, जबकि 79.25 करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा। ऐसे में एमआइसी ने इस परियोजना को स्वीकृत कर दिया।

संविदा नियुक्ति का प्रस्ताव लेकर पहुंचे अधीक्षण यंत्री

बैठक के दौरान हाल ही में अधीक्षण यंत्री के पद पर पदोन्नत हुए डा. अतिबल सिंह यादव अपनी सेवानिवृत्ति के बाद एक साल की संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव लेकर पहुंचे। इस पर चर्चा करते हुए एमआइसी सदस्यों ने कहा कि पूर्व में विद्युत विभाग के प्रभारी इंजीनियर देवी सिंह राठौर को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव हमने पास किया था, लेकिन अधिकारियों ने इसे शासन को नहीं भेजा। वैसे भी यह शासन स्तर का निर्णय है। ऐसे में एमआइसी ने इस प्रस्ताव को स्वीकृत करने से इनकार कर दिया।

इन बिंदुओं को भी किया स्वीकृत

  • -गालव विश्रांति गृह में लाइट, टैंट, साउंड का ठेका देने के लिए नवीन आफसेट राशि 40 लाख रूपये प्रतिवर्ष निर्धारित करने और तीन साल के लिए विभागीय शर्तों पर आफर आमंत्रित करने को स्वीकृति दी गई।
  • -वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए पेड पार्किंग, रेत, भूसा, गिट्टी, पत्थर, अंतर्राज्यीय बस स्टैंड झांसी रोड पर अनुरक्षण शुल्क वसूली के लिए आफसेट व डिपाजिट राशि निर्धारित कर तीन साल के लिए आफर आमंत्रण को स्वीकृत किया।
  • -कार्यशाला में पुराने मोटर पार्ट्स व अन्य अनुपयोगी सामान, जनकार्य विभाग में उपलब्ध लोहे एवं प्लास्टिक के खाली ड्रम, पीएचइ विभाग से प्राप्त पुरानी मोटरें एवं अन्य स्क्रेप को केंद्र सरकार की फर्म एमएसटीसी लिमिटेड के माध्यम से नीलाम कर अनुमानित राशि 40.69 लाख की आय के प्रस्ताव को स्वीकृत किया गया।
  • -कार्यशाला के 192 कंडम वाहनों को एमएसटीसी के माध्यम से नीलाम कर 1.85 करोड़ रुपए से अधिक की आय के अनुमान के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।
  • -मुरार छावनी बोर्ड के आबादी के इलाके को नगर निगम में शामिल करने के प्रस्ताव पर शासन स्तर पर खर्चे की प्रतिपूर्ति होने पर ही स्वीकृति प्रदान करने का निर्णय लेकर परिषद को भेजा गया।

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