लोकमतसत्याग्रह/स्वर्णरेखा नदी के पुनरोद्धार की मांग वाली जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान बुधवार को हाई कोर्ट की युगलपीठ के जस्टिस रोहित आर्या ने फिर नगर निगम के अधिकारियों की क्लास लगा दी। आदेश का ठीक से क्रियान्वयन न होने से नाराज हाई कोर्ट ने नगर निगम के उपायुक्त और अपर आयुक्त को उनके द्वारा दायर हलफनामे पर जमकर फटकारा।
जस्टिस ने अपर आयुक्त विजयराज से पूछा- किसके कहने पर खुराफात करते हो? हलफनामा जिन बिंदुओं पर पर पेश करना था, उनके बारे में सरकार के कौन-से रिकार्ड जांचे हैं आपने? अदालत ने कहा कि अथारिटी लेटर दिखाओ, जिसके तहत आपने निरीक्षण किया और क्या जानकारी प्राप्त की? जो 50 लाख रुपये अगर पहले कभी स्वीकृत हुए हैं तो उनके बारे में आपने क्या जांच पड़ताल की है? अदालत ने आगे कहा- वास्तव में अपने कोई जांच पड़ताल की ही नहीं।
केवल लिप सर्विस करने के लिए यहां खड़े हो। जस्टिस ने यहां तक कह दिया कि यहां कोई मूट कोर्ट तो चला नहीं रहे हैं, गंभीरता बरतो। पिछली कई सुनवाइयों से यही सब हो रहा है। कुछ करना है या मेरे रिटायर होने का इंतजार कर रहे हो। हाई कोर्ट ने उपायुक्त एपीएस भदौरिया को भी खूब फटकारा।
नगर निगम आयुक्त हर्ष सिंह और स्मार्ट सिटी सीईओ नीतू माथुर को भी सवालों के घेरे में लिया। सभी अधिकारी हाई कोर्ट में अपनी सफाई देते रहे लेकिन अंत तक में जस्टिस आर्या ने नाखुश होकर मामले की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 27 फरवरी को दोबारा सुनवाई की तारीख तय कर दी।


