बिजली खर्चे को कम करने के लिए JAAH में लगने थे सोलर प्लांट, छह साल पहले बनी योजना हुई फेल

लोकमतसत्याग्रह/गजराराजा मेडिकल कालेज और जयारोग्य अस्पताल में बिजली पर होने वाले व्यय को रोकने के लिए बनी सोलर प्लांट योजना फेल साबित हुई है। योजना छह साल पहले बनी थी। कमलाराजा अस्पताल में एक सोलर प्लांट लगा भी, लेकिन अभी वह भी बंद पड़ा हुआ है, अन्य स्थानों पर प्लांट लगने से पहले संबंधित एजेंसी काम बंद कर चली गई। अब फिर से सोलर प्लांट लगाए जाने की तैयार चल रही है।

दिसंबर 2018 में सोलर प्राइवेट लिमिटेड की टीम ने जेएएच की न्यूरोलाजी, कमलाराजा, आइसीयू, ओपीडी एवं ट्रामा सेंटर की छतों का सर्वे किया था। सर्वे में अस्पताल में बिजली की खपत और सोलर प्लांट लगाने की संभावना तलाशी गई थी। जेएएच व जीआरएमसी में 1000 किलोवाट के प्लांट की आवश्यकता महसूस की गई थी। इसके बाद कंपनी ने सिर्फ कमलाराजा अस्पताल में सोलर प्लांट लगाया। कुछ समय से यह प्लांट भी खराब पड़ा हुआ है।

सरकार ने बिजली का खर्च कम करने के लिए सभी मेडिकल कालेजों में सोलर प्लांट लगाने का निर्णय लिया था।लाखों रुपये की होती बचतजीआरएमसी और जेएएच का बिजली बिल लाखों में होता है। जबकि उस समय सोलर प्लांट लगने पर प्रति यूनिट करीब 1.25 रुपए का खर्च आना बताया गया था। इससे लाखों की बचत होती। इस बची हुई राशि का उपयोग मरीजों को अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में हो सकता था, लेकिन सोलर प्लांट लगने की योजना ही फेल साबित हो गई।

ये भी होता फायदा

बिजली खपत के साथ ही जेएएच में जनरेटर का इस्तेमाल भी करना पड़ता है। जिससे दोहरी मार पड़ती है। इसके बाद भी बिजली गुल होने की समस्या बनी रहती है। सोलर प्लांट लगने से यह परेशानी भी हमेशा के लिए खत्म हो जाती।

इनका कहना है

सोलर प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा है। पहले क्या योजना बनी थी इसे भी दिखवाए लेते हैं। हमने नए सिरे ये सोलर प्लांट लगाने के लिए प्रक्रिया शुरू की है। –डा.अक्षय निगम, डीन, जीआरएमसी।

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