मोबाइल का अधिक उपयोग बढ़ा रहा कंधे और गर्दन का दर्द, 40 प्रतिशत तक बढ़ गए मरीज

लोकमतसत्याग्रह/जिंदगी में तनाव और काम की अधिकता के साथ मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल कंधे और गर्दन दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ा रहा है। ये सभी मरीज फिजियोथेरेपी से इलाज करा रहे हैं। अकेले जिला अस्पताल में ही 30 से 40 प्रतिशत मरीज बढ़ चुके हैं। अस्पताल की ओपीडी में हर रोज कंधे का दर्द लेकर 10 से 12 और गर्दन दर्द के 20 से 25 मरीज फिजियोथेरेपी विभाग में पहुंच रहे हैं, इसके अलावा भी शहर में अन्य फिजियोथेरेपी सेंटर पर भी लोग इलाज करा रहे हैं। शरीर में जो दर्द 40 साल की उम्र के बाद होते थे, वे अब 25 साल की उम्र से ही शुरू हो गए हैं। यह दर्द युवाओं की कार्यक्षमता प्रभावित कर रहा है।

बिस्तर में आड़े तिरछे लेटकर घंटों मोबाइल चलाना है वजह

लंबे समय तक बिस्तर में दुबके रहकर आड़े-तिरछे लेटकर-बैठकर घंटों मोबाइल और टीवी देखने से भी कंधे और गर्दन अकड़ रहे हैं। दर्द असहनीय होने पर लोग डाक्टर को दिखाने पहुंच रहे हैं। हड्डी रोग विभाग और फिजियोथेरेपी विभाग में 40 प्रतिशत ऐसे ही मरीज हैं। आर्थोपेडिक सर्जन डा. जितेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि ओपीडी में पहुंचने वाले मरीज कंधों में दर्द और हाथ में सुन्नपन की दिक्कत बताते हैं। इनमें 20 से 40 साल के करीब के मरीज हैं। मांसपेशियों, नस और हड्डियों पर दबाव अधिक पड़ने से दर्द हो रहा है।

यह कारण प्रमुख

  • बदली लाइफस्टाइल द्य बैठने का गलत तरीका
  • ज्यादा तकिए रखकर मोबाइल और टीवी ज्यादा देर तक देखना
  • खराब सड़कें
  • पहले ऐसी शिकायत डायबिटीज के कारण या चोट के कारण होती थी अब कभी भी हो रही है।

फिजियोथेरेपी में कंधे गर्दन दर्द के सबसे अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। ओपीडी में रोजाना कंधे दर्द के 10 से 12 और गर्दन दर्द के 20 से 25 मरीज पहुंच रहे हैं। इस थेरेपी से दर्द का इलाज सबसे जल्दी होता है, इसलिए ओपीडी में संख्या बढ़ी है।

डा. विजेन्द्र धाकड़, प्रभारी फिजियोथेरेपी विभाग, जिला अस्पताल

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