मंदिर स्पष्ट तौर पर शासकीय, पुजारी की वसीयत भी अवैध

लोकमतसत्याग्रह/फालका बाजार स्थित श्रीराम जानकी मंदिर जरी पटका के मामले में अब नायब तहसीलदार के बयानों में मंदिर स्पष्ट तौर पर शासकीय ही बताया गया है। इतना ही नहीं बल्कि मंदिर के पुजारी ने पत्नी के नाम अवैध वसीयत की थी, यह जानकारी भी न्यायालय के सामने रखी है। उक्त वसीयत के आधार पर कार्तिक कालोनाइजर के नाम जो क्रय पत्र तैयार कराया गया, वह त्रुटिपूर्ण है। यह मंदिर माफी औकाफ का है। इसी रामजानकी मंदिर के मामले में पूर्व में पदस्थ तहसीलदार की ओर से तत्कालीन कलेक्टर को पत्र भी लिखा गया था कि शासकीय अधिवक्ता शासन की छवि बिगाड़ रहे हैं।

वहीं इसी मंदिर के मामले में मीडिएशन की अनुमति दे दी गई थी जिसका राजफाश होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया था। यहां बता दें कि फालका बाजार में श्रीरामजानकी मंदिर जरी पटका है जो 1916 के मंदिर रजिस्टर में दर्ज है। इस मामले में पूर्व में पुजारी की ओर से की गई अवैध वसीयत को आधार बनाकर जमीन का विक्रय कर दिया गया था, जो कि नहीं किया जा सकता। इस मामले में समीर सिंह की ओर से हाईकोर्ट में रिट पिटीशन लगाई गई कि माफी के मंदिर की जमीन को बचाया जाए। इसी मामले में तत्कालीन एसडीएम अखिलेश जैन ने कोर्ट में यह जवाब पेश कर दिया कि यह जमीन निजी है। माफी की जमीन को निजी बताने के मामले में कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया और लोकायुक्त को एसडीएम पर कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच में यह भी पाया गया कि इस मंदिर के पुजारी को पूर्व से नेमनुक मिलती थी। हाइकोर्ट के इस आर्डर पर एसडीएम की ओर से रिव्यू लगाया गया जिसे खारिज कर दिया गया था और उनके पूर्व के तत्कालीन एसडीएम ने यह स्वीकारा था कि यह जमीन माफी की है।

2018 में शासन की ओर से लगा था दावा

2018 में इस मामले में तहसील स्तर से शासन की ओर से दावा लगाया गया। पहले शासकीय अधिवक्ता विजय शर्मा के पास यह मामला था लेकिन शासन की ओर से जवाब नहीं पेश हुए। इसके बाद विजय शर्मा को यहां से बदल दिया गया। इस मामले में शासन की ओर से जो दावा लगाया उसमें प्रतिवादी कार्तिक कालोनाइजर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर संजीव गुप्ता, सीतादेवी, प्रदीप शर्मा व प्रीति शर्मा हैं। तहसीलदार के कोर्ट में बयान-ये षडयंत्र: पुजारी रामचरणदास से फर्जी वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण कराकर मदनलाल शर्मा ने अपने नाम नामांतरण कराया और उनकी मृत्यु के बाद उक्त भूमि पत्नी सीतादेवी ने नामांतरण कराया। वर्तमान में सीतादेवी ने विक्रय पत्र कराकर कार्तिक कालोनाइजर के डायरेक्टर द्वारा शासकीय मंदिर की भूमि को अपने पक्ष में क्रय पत्र कराया जो कि खुदबुर्द करने का षडयंत्र है। मंदिर के रामचरण दास महंत नियुक्त थे न कि भूमि स्वामी। उन्हें केवल मंदिर के सरंक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। इसमें उन्हें वसीयत कराने का अधिकार नहीं था।

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