इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा, स्टाफ नहीं, खामियाजा भुगत रहे मरीज

लोकमतसत्याग्रह/300 बिस्तर के जिला अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही है। पर्याप्त संख्या में नर्स न होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मेडिसिन सहित अन्य विभागों में भर्ती मरीजों की देखभाल भी ठीक तरह से नहीं हो पा रही है। पलंग संख्या बढ़ने के साथ अस्पताल में न नर्सों की संख्या बढ़ी है न ही पैरा मेडिकल स्टाफ की, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल में बेड संख्या के हिसाब से 200 नर्सों की जरूरत है। अभी महज 130 नर्सों के जिम्मे ओपीडी सहित भर्ती रोगियों का भार है। जबकि इंडियन नर्सिंग काउंसिल के अनुसार जनरल वार्ड में तीन बेड पर एक नर्स जरूरी है। यानि 24 घंटे के लिए तीन बेड के लिए तीन नर्स, आइसीयू में हर मरीज के लिए हमेशा एक नर्स चाहिए, ओटी-लेबर रूम और आउटडोर के लिए भी नर्सों की जरुरत होती है। अस्पताल में ओटी असिस्टेंट और ट्रालीमैन की भी कमी है। अस्पताल सिर्फ नर्स की कमी झेल रहा है, ऐसा नहीं है। अस्पताल में 56 डाक्टरों के पद स्वीकृत हैं जिसमें से 35 पदस्थ हैं और 21 की आवश्यकता है। अस्पताल प्रबंधन मानव संसाधनों की कमी मानता है। सरकारी काम में वक्त लगता है की बात दोहराते हुए अस्पताल प्रबंधन ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि बहुत जल्द ही व्यवस्थाएं सुधरेंगी।

मेडिसिन में नहीं बढ़ पा रहे 40 बेड

नर्सिंग स्टाफ की कमी के चलते मेडिसिन वार्ड में 40 पलंग नहीं बढ़ पा रहे हैं। हालांकि मेडिसिन विभाग में आईसीयू को मिलाकर 80 पलंग क्षमता है, लेकिन गर्मी के मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ने से करीब चालीस पलंग बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। अस्पताल प्रबंधन पलंग बढ़ाने की कवायद में लगा है, लेकिन स्टाफ की कमी रोड़ा बन रही है। अगर अस्पताल प्रबंधन 40 पलंग मेडिसिन में बढ़ाता है तो उसे करीब 13 नर्स की आवश्यकता होगी

एक नर्स पर दो से तीन वार्ड में भर्ती मरीज का जिम्मा

एक नर्स के पास दो से तीन वार्ड में भर्ती मरीज का जिम्‍मा

नर्सिंग स्टाफ की कमी के चलते जिला अस्पताल में सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को झेलनी पड़ रही है। वर्तमान में एक नर्स पर दो से तीन वार्ड में भर्ती मरीजों की देखभाल का जिम्मा है। वहीं पोस्ट आपरेटिव वार्ड से लेकर आपरेशन थियेटर तक में नर्सिंग स्टाफ कम है। नर्सिंग स्टाफ की कमी के चलते प्रसूति गृह में एचडीयू आब्स आइसीयू शुरू नहीं हो पा रहा है। इससे प्रसूताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नर्सिग स्टाफ की कमी के चलते जिला अस्पताल में प्रशिक्षण लेने आने वाले नर्सिंग छात्रों का सहारा लेना पड़ता है।

इनका कहना है

नर्सिंग स्टाफ के साथ पैरामेडिकल स्टाफ की कमी बनी हुई है। शासन स्तर पर भी स्टाफ बढ़ाए जाने की मांग कर चुके हैं। इस बार फिर प्रस्ताव बनाकर भेजा जा रहा है। नर्सिंग स्टाफ की कमी के चलते व्यवस्थाएं बनाने में दिक्कत रही है।

डा.राजेश शर्मा, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल

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