लोकमतसत्याग्रह/खेलकूद की उम्र में बढ़ता पढ़ाई का बोझ बच्चों की कमर के साथ-साथ मन को भी तोड़ रहा है, इधर फीस के नाम पर कोचिंग संचालक अभिभावकों से साल का एक लाख रुपये तक वसूल रहे हैं, जिससे माता-पिता पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। महंगी और बोझिल पढ़ाई के नीचे बचपन दब गया है और परिवार भी कर्ज में डूब रहे हैं, लेकिन इसपर न तो शिक्षा विभाग का ध्यान है और न ही प्रदेश सरकार का। इस बात का सीधा लाभ पढ़ाई के नाम पर गली-मोहल्लों में जगह-जगह खुल चुकीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाला कोचिंग सेंटर का मकड़जाल ले रहा है, जिनकी चपेट में आकर कई बार तो बच्चे मौत तक को गले तक लगा लेते हैं। इसी बात को लेकर केंद्र सरकार ने कदम उठाया कि 16 साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा कोचिंग पर नहीं पड़ेगा और अभिभावक से फीस क्या ली जा रही है उसका भी हिसाब रखा जाए, लेकिन यह निर्णय अब तक न तो राज्य सरकार ले सकी और न ही जिला शिक्षा विभाग को कोई निर्देश मिल सके।
अधिकांश सेंटर पर कक्षा छह से कर रहे तैयारी
शहर में कोचिंग की कई फ्रेंचाइजी खुल चुकी हैं, जिनमें अधिकांश सेंटर पर कक्षा छह से ही प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कराने लगते हैं। कुछ कोचिंग प्रबंधन का कहना है कि कक्षा आठवीं के लिए स्कालरशिप को लेकर परीक्षा कराई थी। एक क्लास में 45 से 50 बच्चे पढ़ाई करते हैं। सप्ताह में दो दिन शनिवार, रविवार को ही 4-4 घंटे की कक्षा लगती है, जिसमें ओलंपियाड परीक्षा की तैयारी कराते हैं।
इस तरह से है क्लास और फीस का स्ट्रक्चर
- कक्षा फीस सप्ताह में दिन
- आठवीं 95000 दो
- नैवीं- 10वीं 109000 तीन
- 11वीं-12वीं 419000 छह
- 12वीं 170000 छह
नोट: इस तरह से फीस और दिन की पढ़ाई का करिकुलम अलग–अलग कोचिंग का अपना अपना होता है।
शासन से किसी भी तरह की कोई गाइडलाइन अभी नहीं मिली है। प्रदेश सरकार से गाइडलाइन मिलने के बाद ही आगे एक्शन लिया जा सकता है, लेकिन अभिभावक को भी इस बात पर ध्यान देना होगा कि कम उम्र में पढ़ाई का बोझ उन्हें बेहतर नहीं बना सकता, क्योंकि बच्चों का मानसिक विकास जरूरी है, इसके लिए खेलकूद भी पढ़ाई के साथ–साथ जरूरी है।
–अजय कटियार, जिला शिक्षा अधिकारी
अभी तक 16 साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं पढ़ाना है, इस तरह के कोई निर्देश नहीं मिले हैं। यदि जिला प्रशासन से कोई निर्देश जारी होंगे तो उनका पालन किया जाएगा। अभी तो कक्षा आठवीं के बच्चों को भी दो दिन की कोचिंग दी जाती है, बाकी 10वीं और 12वीं के छात्र पढ़ने आते हैं।
रवि प्रकाश शर्मा, फिटजी


