इन्होंने त्याग दिया “धीमा जहर”, अब खुशहाल है जिंदगी

लोकमतसत्याग्रह/तंबाकू धीमा जहर है, जो शरीर काे धीरे-धीरे खोखला कर देता है। यह स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। इससे कैंसर सहित अन्य बीमारियां भी सकती हैं। ऐसे कई मामले हैं, जिसमें तंबाकू के कारण ही कैंसर होना पाया गया है। तंबाकू जीवन से बढ़कर नहीं है। इसे छोड़ा जा सकता है। शहर में कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने जीवन के महत्व और तंबाकू के नुकसान को जाना और अपनी जिंदगी से इसे दूर कर दिया। आज वह खुशहाल हैं। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर हम आपको कुछ ऐसे ही लोगों से परिचित करा रहे हैं, जिन्होंने तंबाकू को एकदम से छोड़ा और फिर उनका संकल्प काम आया।

अचलेश्वर मंदिर में पत्नी ने मांगा वचन, 15 साल की तंबाकू अचानक छोड़ दी

मैंने तकरीबन 15 साल तंबाकू गुटखा खाने के बाद 13 अक्टूबर 2013 को पूरी तरह से त्याग दिया। एक बार मैं डेंटिस्ट के पास मिसेज को दांत निकलवाने गया। वहीं मजाकमजाक में मैं भी सीट पर बैठ गया और बोला के मेरे भी दांत चेक करो। दरअसल मुझे कभीकभी ठंडा गर्म पानी भी लगता था। डाक्टर ने दांत चेक किए और बोले कि तंबाकू खाते हो, मैंने कहा हां। उन्होंने बताया कि आपके गाल में कुछ व्हाइट सा जमा हो रहा है, जो आने वाले समय में कैंसर बन सकता है। उसी दिन हम दर्शन करने अचलेश्वर मंदिर गए। पत्नी शिवजी के सामने बाेली की मुझे एक वचन दो। मैंने बोला क्या, उसने कहा तंबाकू, गुटखा त्याग दो। उसी दिन मैंने उसे वचन दिया और आज तक तंबाकू गुटखा का सेवन नहीं किया।

राकेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष, चैंबर आफ कामर्स

दोस्तों के देखा लंग्स में इंफेक्शन होते, दृढ़ निश्चय किया और आज खुशहाल हूं

मैं सन् 1990 से सिगरेट पी रहा था और 2019 में एकदम से छोड़ दी। वह समय कोविड का था। मैंने अपने साथ के तंबाकू खाने वालों और सिगरेट पीनों वालों के लंग्स में इंफेक्शन होते देखा। उससे मैं बहुत डर गया। मैंने उसी समय से सिगरेट त्याग दी। जबकि मैं एक दिन में 30 से 40 सिगरेट पी जाता था। छोड़ते ही खूब तलब लगी, लेकिन मैंने तंबाकू और सिगरेट को हाथ नहीं लगाया। कभीकभी पान खा लिया करता था, वह अभी भी खा लेता हूं, लेकिन उसमें तंबाकू नहीं होती। तंबाकू छोड़ने के बाद मैं कई बार दोस्तों के साथ बैठा। उन्होंने गुटखा और सिगरेट का आफर किया, लेकिन मैंने हर बार मना किया। अब आलम यह है कि उन्होंने मुझसे पूछना ही बंद कर दिया है। मेरे इस बदलाव से मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं और हर महीने 10 से 12 हजार रुपए भी बचा रहा हूं।

धीरज गोयल, बिजनेसमैन

तंबाकू खाता तो बच्चे देखते थे, उन पर असर न पड़े इसलिए छोड़ दी तंबाकू

मैंने सन् 1989 से 2002 तक तंबाकू खाई। उस समय मेरे बच्चे छोटे थे। मैं जब भी तंबाकू खाता, बच्चे बहुत गौर से देखते। एक दिन में विचार आया कि मेरी इस आदत का बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यह सोचकर मैंने तंबाकू छोड़ दिया। दूसरा कारण यह भी था कि मेरे परिवार में तीन मामा, बुआ और पापा को भी कैंसर हुआ। इसलिए मैं बहुत डरा हुआ था। उस दिन जब मैंने तंबाकू छोड़ा, तब से 22 साल होने को हैं, मैंने तंबाकू को हाथ नहीं लगाया। लोग कहते हैं कि तंबाकू छोड़ी नहीं जा सकती, मैं कहता हूं कि बुरी आदत को छोड़ना है तो एकदम से छोड़ो। आगे आपका संकल्प काम करता है। मैंने इसे अपना मिशन बनाया और अभी तक चार स्टूडेंट्स की तंबाकू की लत से दूर कर चुका हूं। चूंकि मैं एनएसएस से भी जुड़ा रहा, तो सभी मुझे फालो भी करते रहे।

प्रो रविकांत अदालतवाले, एसलएपी कालेज

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