सरकार आपकी हेल्थ पॉलिसी के संबंध में लायी नए नियम ,जानिए कैसे आपको प्रभावित करेंगे !

लोकमत सत्याग्रह/भरत सिंह परमार

New Delhi ,31-May-24

बीमा उद्योग को नियमित करने वाली सरकारी संस्था IRDAI द्वारा स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों को ग्राहकों के अधिक उपयोगी बनाने के हेतु स्वास्थ्य बीमा नियमों में कुछ बदलाव किए हैं।

IRDAI ने नयी स्वास्थ पॉलिसियों में प्रतीक्षा अवधि को 4 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष करने, पूर्णतः कैशलेस दावा निपटान प्रणाली स्थापित करने और आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसे उपचारों को मुख्यधारा के एलोपैथी के साथ शामिल करने जैसे कई बदलाव किए हैं, हम ने स्वास्थ्य बीमा विनियमों में पांच प्रमुख विकासों को सूचीबद्ध किया है जो आपको स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों से सम्बंधित नियमों को अधिक प्रभावी ढंग से समझने में मदद कर सकते हैं।

आइए उन पर नजर डालें:

1)वरिष्ठ नागरिक अनुकूल नीति

IRDAI ने बीमा कंपनियों के लिए स्वास्थ्य योजनाएं बेचने के लिए अधिकतम आयु सीमा हटा दी है। अब तक, व्यक्ति 65 वर्ष की आयु तक ही नई बीमा पॉलिसी खरीद सकते थे। नए बदलाव आने के साथ, कोई भी व्यक्ति, चाहे उसकी उम्र कुछ भी हो, नई स्वास्थ्य पॉलिसी खरीद सकता है।

दरअसल, IRDAI द्वारा स्वास्थ्य बीमा कंपनियों से वरिष्ठ नागरिकों जैसे वर्गों के लिए विशेष पॉलिसी बनाने करने को कहा गया है।

IRDAI ने बीमाकर्ताओं को वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य बीमा संबंधी दावों और शिकायतों के समाधान के लिए एक अलग व्यवस्था स्थापित करने का भी निर्देश दिया है।

2) 5 वर्ष के बाद क्लेम मना नहीं किया जा सकता

IRDAI ने स्पष्ट किया कि 5 साल के बाद किसी भी दावे को अस्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसके साथ, 5 साल के बाद गैर-प्रकटीकरण (पूर्व में हुई बीमारी की सुचना न देना )और गलत बयानी के आधार पर कंपनी द्वारा किसी भी पॉलिसी या दावे को चुनौती नहीं दी जा सकती है।

हालाँकि, यदि कोई बीमा कंपनी किसी पॉलिसी या दावे में किसी धोखाधड़ी पता चलता है , तो ऐसी पॉलिसी या दावे को बीमा कंपनी द्वारा 60 महीने के बाद भी अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

3) छूट और रिफंड

यदि किसी ग्राहक ने एक वर्ष में कोई दावा नहीं लिया है , तो ग्राहक यह तय कर सकता है कि वह बीमा राशि बढ़ाना चाहता है या प्रीमियम राशि कम करना चाहता है।

वर्तमान में, गाड़ियों का बीमा करने वाली जनरल बीमा कंपनियां किसी दावे के न आने पर मोटर बीमा पॉलिसियों के रिन्यूअल के समय छूट देती हैं। हालाँकि, वही कंपनियां स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों के विषय में क्लेम न आने पर ग्राहक की बीमा कवर राशि में वृद्धि करते हैं, जो आमतौर पर उपयोग में नहीं आती है।

एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि अब पॉलिसीधारक ग्राहक अपनी स्वास्थ्य पॉलिसी को किसी भी समय बंद कर सकेंगे और आनुपातिक आधार पर प्रीमियम का रिफंड भी प्राप्त कर सकेंगे । उदाहरण के लिए, यदि ग्राहक ने प्रीमियम राशि के रूप में 12,000 रुपये का भुगतान किया है और छह महीने के बाद वह पॉलिसी बंद करने का फैसला लेता है, तो उस ग्राहक को 6000 रुपये का रिफंड मिलेगा।

साथ ही जब भी कोई कंपनी ग्राहक के स्वास्थ क्लेम को अस्वीकार करती है तो उस समय भी पॉलिसीधारकों के पास पॉलिसी बंद करने और कुछ रिफंड प्राप्त करने का विकल्प होगा।

4) कंपनियों द्वारा दावों को खारिज करना मुश्किल किया गया है

IRDAI ने बीमा कंपनियों से “दावा समीक्षा समिति “(CRC) नामक एक समिति गठित करने को कहा। यह समिति उन दावों की समीक्षा करेगी, जिन्हें बीमा कंपनी ने खारिज कर दिया है।

ग्राहक का क्लेम बीमा कंपनी द्वारा केवल इस समिति की मंजूरी के बाद ही खारिज किया जा सकता है। साथ ही,क्लेम ख़ारिज करने की स्थिति में बीमा कंपनी को पॉलिसी दस्तावेज़ के विशिष्ट नियमों और शर्तों के संदर्भ के साथ अस्वीकृति का कारण भी बताना होगा।

5) बार-बार डॉक्यूमेंट देने की जरूरत नहीं

IRDAI ने बीमा कंपनियों या थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर्स (टीपीए) को क्लेम के समय आवश्यक दस्तावेज सीधे अस्पताल से इकट्ठा करने का निर्देश दिया है।
साथ ही वे क्लेम पास करने के लिए पॉलिसीधारक ग्राहकों को इन दस्तावेज़ों को बार बार जमा करने के लिए ज़ोर नहीं दे सकते।

Leave a comment