लोकमतसत्याग्रह/सड़क हादसे समेत अन्य तरह की दुर्घटनाओं के बेहतर इलाज की उम्मीद में लोग अंचल के सबसे बड़े अस्पताल जयारोग्य के ट्रामा सेंटर में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही उनकी दिक्कत बढ़ा रही है। लंबे-चौड़े आइसीयू में जिम्मेदार एक एयर कंडीशनर तक नहीं लगवा पाए हैं। ऐसे में लगातार बढ़ रहे तापमान में गंभीर मरीजों का बुरा हाल है। रविवार को यहां की स्थिति देखी तो पता चला कि एक पेशेंट वेंटीलेटर पर था और गर्मी की वजह से स्वजन उसके पास खड़े होकर हाथ पंखे से हवा कर रहे थे।
ट्रामा सेंटर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त हैं। बावजूद इसके यहां हालात खराब हैं। आइसीयू ही नहीं जनरल वार्ड में भी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जनरल वार्ड में दिखावे के लिए एक कूलर लगा रहा है, लेकिन उसमें पानी नहीं भरा जा सकता। कूलर के पानी का टेंक खराब है। इस स्थिति में बिना पानी के लिए कूलर को चलाना पड़ता है। जिससे वह गर्म हवा फेंकता है। वार्ड में भर्ती मरीजों को गर्मी से बचाने के लिए स्वजनों को घर से पंखे लेकर आना पड़ रहे हैं। ट्रामा सेंटर में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि सीनियर डाक्टर तक मरीज को देखने नहीं आते। मरीजों को जूनियर डाक्टरों के हवाले रहते हैं।
ड्यूटी का नियम भी नहीं मानते डाक्टर
नियमों के हिसाब से आइसीयू में राउंड द क्लाक डाक्टर की ड्यूटी होनी चाहिए, लेकिन आइसीयू में डाक्टर इस नियम को नहीं मानते। हालत यह है कि मरीज को जरूरत होने पर डाक्टर को आन काल बुलाया जाता है। दंत चिकित्सक बुलाने पर भी नहीं आते। ऐसे में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जबड़े में चोट लगने पर ट्रामा सेंटर पहुंचने वाले मरीजों को काफी दिक्कत हाेती है।
स्वजन बोले-घबराहट होती है, किससे कहें?
ट्रामा सेंटर के आइसीयू में भर्ती मरीज के साथ स्वजन गर्मी के मारे बेहाल हैं। मरीज के स्वजन रामप्रसाद कहते हैं कि गर्मी के मारे घबराहट होती है। कुछ ऐसी ही स्थिति अन्य मरीज व उनके तीमारदारों ने भी बताई। इनका कहना था कि इन समस्याओं पर बात करें तो आखिर किससे? आइसीयू में कहीं से हवा नहीं आती, ऐसे में घुटन होने लगती है। इसके बावजूद जिम्मेदार चुप्पी साधकर बैठे हैं।
18 से 25 डिग्री के बीच रहना चाहिए आइसीयू का तापमान
आइसीयू का तापमान 18 से 25 डिग्री के बीच मेंटेन रहना चाहिए। यहां पेशेंट को रखा ही इसलिए जाता है कि वह कंफर्टेबल रहे। आइसीयू में किसी भी तरह का एयर फ्लो नहीं होता, इसलिए वहां एसी बंद होने पर तापमान तेजी से बढ़ता है। एयर फ्लो इसलिए भी नहीं रखा जाता, क्योंकि पेशेंट को किसी भी तरह के संक्रमण से बचाना होता है।
डा. दिलीप कोठारी, पूर्व विभागाध्यक्ष, निश्चेतना विभाग, जेएएच
ट्रामा सेंटर को लेकर संबंधित जिम्मेदारों से जानकारी ली जाएगी। साथ ही उनको व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए जाएंगे।
डा.आरकेएस धाकड़, डीन, जीआरएमसी


