लोकमतसत्याग्रह/धोखाधड़ी के मामले में जांच के आदेश होने के बाद भी अचानक इंदौर के कारोबारी साबिर खान को गिरफ्तार करने का मामला यूनिवर्सिटी पुलिस के गले की फांस बन गया है। इसमें कारोबारी के वकील आशीष चतुर्वेदी का कहना है कि यूनिवर्सिटी पुलिस ने छोड़ने के एवज में 10 लाख रुपये की मांग की थी। फरियादी की ही गाड़ी से इंदौर पुलिस गई। जिस गाड़ी में पुलिस आरोपित को लेकर आ रही थी, उस गाड़ी के ग्वालियर की सीमा में प्रवेश करते ही पीछे फरियादी की गाड़ी लग गई। यानि फरियादी से पुलिस सीधे संपर्क में था। आशीष का कहना है- इस मामले में भोपाल तक पुलिस अधिकारियों से शिकायत की जाएगी और इस मामले को कोर्ट में भी ले जाया जाएगा।
इंदौर के रहने वाले साबिर खान पर ग्वालियर निवासी जितेंद्र नागवानी ने धोखाधड़ी की एफआइआर यूनिवर्सिटी थाने में दर्ज कराई थी। इस मामले में साबिर की ओर से आवेदन दिया गया। उसमें जो तथ्य सामने आए, उन्हें देखने के बाद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल ने छह बिंदुओं पर जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद इस मामले की समीक्षा होनी थी। केस डायरी यूनिवर्सिटी थाने से हटाकर सिरोल थाने भेज दी गई। अचानक यह केस डायरी सिरोल से यूनिवर्सिटी थाने पहुंच गई। अचानक सभी गंभीर आपराधिक प्रकरणों को छोड़कर यूनिवर्सिटी थाने के सब इंस्पेक्टर फोर्स के साथ इंदौर रवाना हो गए। जांच के आदेश होने के बाद भी घर से खींचकर पकड़ा। सीसीटीवी कैमरे में यह नजर आ रहा है। इ आशीष ने जब पुलिस अधिकारियों से शिकायत की थी, तभी गैर जमानती धाराओं में एफआइआर होने के बाद भी साबिर को थाने से छोड़ना पड़ा।
यह प्रकरण मेरे संज्ञान में आया है। मैं इसे दिखवा रहा हूं। धोखाधड़ी के मामलों में जांच के बाद ही एफआइआर, गिरफ्तारी होती है।
-अरविंद सक्सेना, आइजी, ग्वालियर जोन।


