वन भूमि पर टीआई की पत्नी का होटल,अब बेदखली करेगा विभाग

लोकमतसत्याग्रह/सरकार की जमीनों का जबदस्त बंदरबांट करने का एक और मामला ग्वालियर में सामने आया है। इस बार कोई कब्जाधारी नहीं बल्कि खुद पुलिस ही है। खुद टीआई की पत्नी के नाम पर ग्वालियर के घाटीगांव में हाइवे पर होटल खड़ा कर लिया गया।

खास बात यह कि जिस भूमि पर होटल बनाया गया उसका हाइवे के लिए अधिग्रहण भी हाे चुका था और मुआवजा पाने वाले से टीआई विनय शर्मा की पत्नी प्रियंका शर्मा ने रजिस्टर्ड विक्रय पत्र संपादित कर लिया। यह दो बीघा पांच बिस्वा भूमि है। इस मामले में टीआइ की पत्नी ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की जो खारिज हो गई। इसके बाद जिला न्यायालय में दावा लगाया वहां से शासन ने देर से पक्ष पेश किया तो स्टे मिला लेकिन कोर्ट ने तथ्यों के आधार पर अपील को खारिज कर वन भूमि ही माना। इसमें वन विभाग टीआइ की पत्नी पर केस भी दर्ज कर चुका है और तत्कालीन वन अफसरों ने टीआइ के खिलाफ एसपी-कलेक्टर को पत्र भी लिखे थे। अब इस मामले में शिकायत के बाद वन विभाग बेदखली की कार्रवाई करेगा।

·  इस मामले में शिकायतकर्ता संकेत साहू ने शिकायत में बताया है कि जिले की घाटीगांव तहसील के अंतर्गत ग्राम दौरार के सर्वे नंबर 1221 रकवा 0.272 हेक्टेयर हल्का नंबर 5 को प्रियंका शर्मा पत्नी विनय शर्मा निवासी अर्जुन नगर थाटीपुर ग्वालियर ने मुन्नाबाबु गुप्ता से रजिस्टर्ड विक्रय पत्र से नौ जनवरी 2019 को खरीद ली थी जिसकें बाद प्रियंका शर्मा ने सीमांकन के लिए नायब तहसीलदार वृत्त घाटीगांव को आवेदन दिया।

·  तहसीलदार के साथ मिलकर एकांगी सीमांकन करा लिया जबकि भूमि वन विभाग की है। सीमांकन कराने के बाद तत्कालीन तहसीलदार घाटीगांव के साथ मिलकर नामांतरण करा लिया। साथ ही डायवर्सन भी करा लिया जिसके बाद प्रियंका शर्मा ने ग्राम दौरार के सर्वे नंबर 1221 / 1 रकवा 0.2760 हैक्टेयर पर खसरों में अपना नाम चढ़वाया। उक्त भूमि पर ” मधुवन रेस्टोरेंट ” बनाने के लिए चारों तरफ लोहे की तार फेंसिंग लगवा ली गई।

·  सर्वे नंबर 1221 वादग्रस्त भूमि 16 जनवरी 1969 को गजट नोटिफिकेशन के द्वारा ग्राम दौरार की 560.342 हैक्टेयर भूमि संरक्षित वन भूमि घोषित की गयी थी जिसका वन क्षेत्र का व्यवस्थापन कर नक्शा तैयार किया गया था जिसकें अनुसार सर्वे नंबर 1221 का 2 बीघा 5 बिस्वा भूमि वन क्षेत्र की भूमि घोषित की गयी जो पी-294 का भाग है। इस भूमि पर निजी मालिकाना हक नहीं हो सकता। 25 मई 2019 को वन भूमि पर कब्जा करने को लेकर प्रियंका शर्मा पर मामला भी दर्ज किया गया।

·  इसके बाद प्रियंका शर्मा ने हाइकोर्ट में याचिका लगाई जो खारिज कर दी गई फिर जिला कोर्ट में दावा लगाया जिसमें शासन की ओर से तीन माह से ज्यादा समय होने पर पक्ष पेश किया तो स्टे मिल गया। इसके बाद कोर्ट ने तथ्यों के आधार पर प्रियंका शर्मा का दावा खारिज कर वन भूमि ही माना। इस मामले में अब शिकायतकर्ता संकेत साहू ने डीएफओ से बेदखली किए जाने की शिकायत की है।

यहां भी गडबड़: समय निकलने के बाद पेश किया था पक्ष

इस वन भूमि के मामले में शासन की ओर से तीन माह बीत जाने के बाद पक्ष पेश किया गया था इसलिए कोर्ट ने प्रियंका शर्मा को स्टे दिया लेकिन तथ्यों के परीक्षण में पाया कि प्रियंका शर्मा ने जिस मुन्नालाल से रजिस्टर्ड विक्रय पत्र किया उसे पार्टी ही नहीं बनाया। प्रियंका शर्मा की ओर से 24 अप्रैल 2019 को दावा जिला कोर्ट में लगाया गया कोर्ट ने सात मार्च 2020 को स्टे दिया और सात मार्च 2020 से सात जून 2020 तक शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने पक्ष नहीं रखा। शासन की अपील खारिज हो गई। 27 अप्रैल 2024 को प्रियंका शर्मा का दावा खारिज हो गया। शासन की ओर से समय पर पक्ष रखने का जिम्मा लोक अभियोजक विजय शर्मा का था।

घाटीगांव के दौरार में वन भूमि पर रेस्टोरेंट बनाकर कब्जा किये जाने का मामला सामने आया है जिसमें कब्जाधारी का दावा न्यायालय से खारिज हो गया है। कब्जाधारी प्रियंका शर्मा के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई जल्द की जाएगी।

अंकित पांडेय, डीएफओ,ग्वालियर

वन भूमि की जगह पर रेस्टोरेंट नहीं बनाया गया है, इस मामले में न्यायालय ने दस्तावेज मांगे थे। दस्तावेज दे दिए गए हैं। मामला न्यायालय में चल रहा है। वन विभाग बेदखली की कार्रवाई नहीं कर रहा है।

विनय शर्मा, निरीक्षक

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