लोकमतसत्याग्रह/ग्वालियर पुलिस ने बहोड़ापुर स्थित ट्रांसपोर्ट नगर में मिसब्रांड कोल्डड्रिंक की फैक्ट्री पकड़ी है। यहां पेप्सिको कंपनी की स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की बोतल में पानी और फ्लेवर, एसेंस मिलाकर बनाई लोकल ड्रिंक भरकर बाजार में बेची जा रही थी। 700 पेटी मिसब्रांड एनर्जी ड्रिंक पुलिस को मिली है। यहां से स्टिंग एनर्जी ड्रिंक के रैपर, खाली बोतल, ढक्कन और मशीन बरामद हुई है। 700 पेटी तो भरी हुई बरामद हुई हैं, जिन्हें ग्वालियर के आसपास ग्रामीण इलाकों में सप्लाय करने की तैयारी थी। आरोपित आशीष शर्मा निवासी मुरैना को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उस पर कापीराइट एक्ट के तहत एफआइआर दर्ज की गई है। उससे पूछताछ चल रही है।
एसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि बहोड़ापुर स्थित ट्रांसपोर्ट नगर में मिसब्रांड कोल्डड्रिंक की फैक्ट्री संचालित होने की सूचना मिली थी। सूचना पर सीएसपी अशोक सिंह जादौन, बहोड़ापुर थाना प्रभारी जितेंद्र तोमर और फोर्स को यहां भेजा गया। यहां काफी मात्रा में पेप्सिको कंपनी की स्ट्रिंग एनर्जी ड्रिंक की भरी हुई बोतलें मिली। यहां से 700 पेटी एनर्जी ड्रिंक बरामद हुई। एक पेटी में 30 बोतलें थी, इस तरह करीब 21 हजार बोतलें यहां से बरामद की गई हैं। फैक्ट्री संचालित करने वाले आशीष शर्मा को गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ की जा रही है।
उप्र भेज चुका 600 पेटी, ग्रामीण इलाकों और बाहरी क्षेत्रों में होती है सप्लाई
उप्र भेज चुका 600 पेटी, ग्रामीण इलाकों और शहर के आउटर से लेकर हाइवे तक सप्लाय: आशीष शर्मा ने पुलिस को बताया कि वह उप्र के अलग-अलग जिलों में अब तक 600 पेटी भेज चुका है। ग्रामीण इलाकों के साथ शहर के आउटर से लेकर हाइवे तक वह मिसब्रांड कोल्डड्रिंक बेचता है। यहां दुकानदारों को सस्ते में मिलती है तो वह खरीदते हैं। इसे पूरे दाम पर बेचते हैं, उन्हें असली बताकर ही बेची जाती थी।
मात्र 2 रुपये में तैयार हो जाती है एनर्जी ड्रिंक, गाजियाबाद से फ्लेवर और दिल्ली से आता है पैकिंग मटेरियल
जिस एनर्जी ड्रिंक को असली बताकर बेचा जा रहा था, वह मात्र 2 रुपये में तैयार हो जाती है। सीएसपी अशोक जादौन ने बताया कि पानी में फ्लेवर, एसेंस मिलाकर ड्रिंक तैयार कर ली जाती है। गाजियाबाद से फ्लेवर मिल जाता था। यहां से स्टिंग के अलावा, हर कोल्डड्रिंक का फ्लेवर मिल जाता है। जो मिलता जुलता है। एक बार में पीने पर सामान्य व्यक्ति समझ ही नहीं सकता। इसे बाजार में 18 रुपये में बेचा जाता है। ग्रामीण इलाकों में सस्ती बेची जाती थी, इसलिए 15 रुपये में मिल जाती थी और इसकी खूब बिक्री होती थी।
अवि नाम से रजिस्ट्रेशन
आशीष ने नवंबर माह में ही फैक्ट्री शुरू की है। उसने फूड विभाग से अवि नाम से ब्रांड का रजिस्ट्रेशन कराया था। 150 पेटी इस ब्रांड की भी बरामद हुई। अवि की आड़ में वह बड़े ब्रांड की ड्रिंक बनाकर बेचने लगा था।


