पैसिव इनकम का बढ़ता ट्रेंड, यह तरीके हैं कारगर

लोकमतसत्याग्रह/अब पैसिव इनकम का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। पैसिव इनकम..यानी आय का ऐसा स्त्रोत, जिसमें सिर्फ पैसा लगाने की ही जरूरत होती है। इसके बाद हर माह या निर्धारित समय पर आपको रिटर्न मिलता रहता है। एक्टिव इनकम के साथ अब पैसिव इनकम को भी लेकर लोग नए-नए विकल्प तलाश रहे हैं। पहले रेंटल इनकम को पैसिव इनकम का सबसे प्रमुख स्त्रोत माना जाता था, लेकिन अब कई विकल्प लोगों के पास हैं। अगर आप भी पैसिव इनकम पाना चाहते हैं तो कुछ ऐसे विकल्प हैं, जिनसे पैसा भी सुरक्षित है और लाभ भी अधिक है।

कमर्शियल प्रापर्टी

यह पारंपरिक तरीका है। लोग अब रेसिडेंशियल प्रापर्टी की जगह कमर्शियल प्रापर्टी लेने पर अधिक फोकस कर रहे हैं। यह रेंटल इनकम का सबसे बड़ा स्त्रोत है। कमर्शियल प्रापर्टी में दुकान, आफिस स्पेस शामिल हो सकता है। इसे खरीदने के बाद किराये पर दे दिया जाता है। इससे हर माह एक निश्चित आय मिलती है। कई लोग तो इकठ्ठा पैसा लगाने की जगह आधी रकम बैंक से लोन लेते हैं। किश्त का जो पैसा है, वह रेंटल इनकम से जाता है। इससे अधिक लाभ होता है। प्रापर्टी के दाम बढ़ ही रहे हैं, इससे दो लाभ होते हैं।

ईटीएफ

एसआइपी की तुलना में अब ईटीएफ का आप्शन पैसिव इनकम के रूप में अधिक चुना जा रहा है। इसकी दो सबसे बड़ी वजह हैं- एक्सपेंस लोड और एक्जिट लोड एसआइपी की तुलना में बहुत कम है। इसमें निवेश का सबसे बेहतर तरीका एक्सपर्ट बताते हैं- एसआइपी एक निर्धारित तिथि पर बैंक से आटो डेबिट हो जाती है। लेकिन ईटीएफ में तभी पैसा लगाएं, जब मार्केट डाउन जाए। इससे अप्स-डाउन का जो ट्रैक बनेगा, वह बेहतर रिटर्न देगा। ईटीएफ में 20 से 26 प्रतिशत तक का औसत रिटर्न मिला है। जो सबसे ज्यादा है। रिस्क फैक्टर भी कम है, क्योंकि पैसा तभी लगाया जा रहा है जब मार्केट डाउन है।

क्राउड फंडिंग

एक्सपर्ट बताते हैं- एक अकेला व्यक्ति किसी बड़े निवेश को करेगा तो उसे अधिक पैसे की जरूरत होगी और रिस्क भी बड़ा होगा। इसलिए क्राउड फंडिंग यानि समूह में निवेश बेहतर विकल्प है। इसमें एक बड़ी रकम को अलग-अलग लोगों का एक समूह मिलकर निवेश करता है। कम रकम की जरूरत होती है, रिस्क कम होता है। मुनाफा बराबर होता है। यह इस समय सबसे ज्यादा ट्रेंड में है।

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