लोकमतसत्याग्रह/बिजली कंपनी में अमले की कमी 2 लाख 88 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रही है, लेकिन बिजली अफसर स्वीकृति पद के अनुरूप मैदानी अमला होने का दावा कर रहे हैं। जबकि कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी मैदानी अमला कम होने के कारण भर्ती की मांग का चुका है।
कर्मचारी संगठन और बिजली कंपनी के अफसर इस मामले को लेकर कई बार आमने-सामने भी आ चुके हैं, लेकिन बिजली कंपनी बीस साल पुराने स्वीकृत पदों के आदेश पर ही चल रही है। ऐसे में वर्षा के दौरान बिजली गुल होने पर उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति बहाल होने के लिए पांच से छह घंटे का इंतजार करना पड़ता है।
शहर वृत्त में स्वीकृत पद के विपरीत करीब 600 लाइन स्टाफ की कमी है। लाइन स्टाफ की कमी के चलते समय पर फाल्ट की समस्या का निराकरण नहीं हो पाता। वर्षा में यह समस्या ज्यादा विकराल हो जाती है। क्योंकि लाइन स्टाफ के पास इस दौरान 200 से ज्यादा शिकायत होती है।
इन शिकायतों को दूर करने में अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुंचने में लाइन स्टाफ को पांच से छह घंटे छोड़िए आठ से दस घंटे तक लग जाते हैं। इसके बावजूद बिजली कंपनी के अफसर मैदानी अमले की कमी को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। जबकि कर्मचारी संगठन कंपनी में कर्मचारियों का सेटअप तैयार कर भर्ती किए जाने की मांग कर चुके हैं।
जरूरत के हिसाब से 50 फीसद अमला कम
- बिजली कंपनी के अफसर भले ही मैदानी अमले की कमी से इनकार कर रहे हैं, लेकिन कंपनी में जरुरत के हिसाब से करीब पचास फीसद अमले की कमी है। इसी की वजह से बहुत सारी दिक्कतें हो रही हैं। उपभोक्ताओं को समय पर बिजली नहीं मिल रही है।
- बिजली बंद होने पर उसे दोबारा बहाल करने में समय लग रहा है। बिलों में गड़बड़ियां हैं। मौसम खराब होने की स्थिति में बंद बिजली को कम कर्मचारियों के कारण समय पर चालू नहीं कर पा रहे हैं। उपभोक्ता शिकायत करते हैं, मानसिक दबाव रहता है। सुधार कार्यों के लिए स्टैंडर्ड मापदंड के अनुसार उपकरण नहीं हैं।
हर जोन में लाइन स्टाफ की कमी
- शहर वृत्त के हर जोन में लाइन स्टाफ की कमी है। इसके साथ ही जूनियर इंजीनियर भी कम है। स्वीकृत पद के हिसाब से 39 अधिकारी व कर्मचारी पदस्थ रहने की बात अफसर करते हैं। लेकिन सब स्टेशन, फीडर व उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने के कारण स्वीकृत पद कम पड़ रहे हैं।
- ऐसा अफसर भी मानते हैं, लेकिन खुलकर कहने से डरते हैं। यह वजह है कि उपभोक्ताओं को बिजली समस्या से जूझना पड़ रहा है। हालांकि कर्मचारी संगठन कई बार कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठा चुके हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो सकी है।
फैक्ट फाइल
- नियमित कर्मचारी: 100 से 150
- आउटसोर्स कर्मचारी: 1100
- लाइन स्टाफ: 600
- लाइन स्टाफ की कमी: 600
अधिकारी कर्मचारियों की कोई कमी नहीं है। स्वीकृत पद 39 हैं उनके हिसाब से सभी जोन व कार्यालयों में पर्याप्त स्टाफ है। बिजली समस्या का निराकरण के लिए कर्मचारी पहुंचते हैं। विशेष परिस्थितियों में ही देरी होती है।
नितिन मांगलिक, महाप्रबंधक, शहर वृत्त
उपभोक्ताओं की बढ़ी संख्या, बिजली सब स्टेशनों व लाइनों में हुए विस्तार के अनुरूप मैदानी अमला पर्याप्त नहीं है। हम कर्मचारियों की भर्ती की मांग के लिए कई बार ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन बीस साल पुराने स्वीकृत पदों के हिसाब से ही कंपनी चल रही है।
एलके दुबे, प्रदेश अध्यक्ष, मध्य प्रदेश संविदा एवं ठेका श्रमिक कर्मचारी संघ इंटक


