लोकमतसत्याग्रह/सिथौली क्षेत्र में 400 किलोवाट का विद्युत सब स्टेशन न बन पाने से नो कट जोन की जनता की उम्मीद टूट रही है। सब स्टेशन का निर्माण सिर्फ इसलिए नहीं हो पा रहा है कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के लिए आवंटित जमीन पर अतिक्रमण कर लिए गए हैं। जबकि प्रोजेक्ट को काफी समय पहले पूरा कर लिया जाना था।
इसके साथ ही आमजन को बिजली की समस्या से राहत पहुंचाने का एक और प्रोजेक्ट मोनोपोल टावर खड़े करने की अनुमति नहीं मिल पाने के चलते अटका पड़ा। इस प्रोजेक्ट के पूरे होने से शहरवासियों को बिजली ट्रिपिंग सहित फाल्ट की समस्या से निजात मिलती, लेकिन मार्च माह में पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट अब तब अटका पड़ा है। बिजली कंपनी के अनुसार जिला प्रशासन को पत्र लिखे लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
220 केवीए सब स्टेशन से बिजली के लिए आमजन को निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे न केबल बिजली का लास हो रहा है बल्कि तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि 400 किलोवाट का सबस्टेशन तैयार हो तो पूरे ग्वालियर को ओवरलोडिंग की समस्या से निजात मिल जाए। मध्यप्रदेश ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकारियों ने जब 400 किलोवाट के सब स्टेशन निर्माण के लिए सर्वे कराया ताे वहां अतिक्रमण मिला। इसके लिए कंपनी ने जिला प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन मदद नहीं मिल सकी। ऐसे में आमजन को फायदा पहुंचाने वाला प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पा रहा है।
32 हेक्टेयर भूमि को भू-अर्जन अधिनियम के तहत किया था अर्जित
विद्युत पारेषण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सिथौली पर मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने 32 हेक्टेयर निजी भूमि को भू-अर्जन अधिनियन के तहत अर्जित की थी। जिस पर कंपनी ने 220 केवी सबस्टेशन बनाया। साथ ही 400 केवीए सब स्टेशन के लिए जमीन खाली छोड़ दी। अब कंपनी 400 केवीए सब स्टेशन स्थापित करना चाहती है, लेकिन उस जमीन पर अतिक्रमण होने के कारण सब स्टेशन का निर्माण अटक गया है।
मोनोपोल खड़े करने में निजी जमीन का पेंच फंसा
मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी को शहर में 39 मोनोपोल टावर खड़े करने हैं। इनमें से वह 26 टावर खड़े कर पाई है। 12 टावर खड़े करने की अनुमति नहीं मिलने के कारण प्रोजेक्ट अटक गया है। निजी जमीन का पेंच फंसा होने के कारण कंपनी को दिक्कत आ रही है। इस बाधा को दूर करने के लिए कंपनी जिला प्रशासन को पत्राचार कर चुकी है, लेकिन अब तक बाधा दूर नहीं हो सकी है। जबकि पावर ट्रांसमिशन कंपनी को मोनोपोल टावर प्रोजेक्ट मार्च 2024 में पूरा करना था।
हमारे दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट जमीन की बाधा के चलते अटके हैं। इन बाधाओं को दूर करने के लिए हम प्रशासन से पत्राचार कर चुके हैं, लेकिन अब तक न तो सिथौली की जमीन से अतिक्रमण हटे न ही मोनोपोल टावर खड़े करने के लिए अनुमति मिली।
शशिकांत ओझा, जनसंपर्क अधिकारी, एमपी ट्रांसको, जबलपुर


