लोकमतसत्याग्रह/परिषद में बिना चर्चा के ही एजेंडे पास होने पर ऐसा लगा कि परिषद शुरू होने से पहले ही सत्तादल के अवधेश कौरव और नेता प्रतिपक्ष हरिपाल के बीच एजेंडे के बिंदुओं को लेकर आम सहमति बन चुकी थी। पार्षद ने कहा कि सत्तापक्ष और निगम अफसर आपस में मिले हुए हैं, क्योंकि जिस एजेंडे को शुरुआत में परिषद में लाना था, उसे एमआईसी ने चुपचाप पास कर दिया।
नगर निगम परिषद की बैठक में शुक्रवार को एजेंडे पर चर्चा हुई। इसमें सवा घंटे के भीतर ही एजेंडे सभी छह बिंदुओं को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। पहली बार है जब पक्ष और विपक्ष एक साथ खड़े नजर आए। जिन्होंने एक दूसरे का विरोध न करते हुए सर्वसम्मति से एजेंडा पास कराया। परिषद में बिना चर्चा के ही एजेंडे पास होने पर ऐसा लगा कि परिषद शुरू होने से पहले ही सत्तादल के अवधेश कौरव और नेता प्रतिपक्ष हरिपाल के बीच एजेंडे के बिंदुओं को लेकर आम सहमति बन चुकी थी।
हालांकि इस बीच एक बिंदु सागरताल पर व्यवसायिक और आवासीय परिसर बनाने को लेकर पार्षद बृजेश श्रीवास ने सत्तापक्ष और निगम अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए। पार्षद ने कहा कि सत्तापक्ष और निगम अफसर आपस में मिले हुए हैं, क्योंकि जिस एजेंडे को शुरुआत में परिषद में लाना था, उसे एमआईसी ने चुपचाप पास कर दिया। निगमायुक्त ने फाइल तक नहीं पढ़ी जिसमें तमाम सारी गड़बड़ थी। जो निगम अफसर एक फाइल नहीं पढ़ सकता वह शहर का विकास क्या करेगा।
सागरताल पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और डीपीआर भी बन चुकी है। अब परिषद से अनुमति लेने का क्या मतलब है, पहले इसकी जांच की जाए। इस पर सत्तापक्ष के अवधेश कौरव ने गलती स्वीकार करते हुए कहा कि भ्रम-बस एमआइसी ने एजेंडे को पास किया लेकिन जब गलती का अहसास हुआ तो परिषद में लाया गया। इस पर नेता प्रतिपक्ष हरिपाल ने कहा कि एमआईसी सदस्य ने अपनी गलती मान ली है, अत: डीपीआर तैयार की जाए, इसके लिए सहमति देते हैं।
इस पर सभापति मनोज तोमर ने डीपीआर तैयार करने के साथ ही निर्देश दिए कि मौके पर चल रहे निर्माण कार्य की जांच की जाए। जिस अधिकारी द्वारा निर्माण कार्य शुरू कराया है उसके खिलाफ कार्रवाई कर 15 दिवस में अवगत कराएं। इस मौके पर उपायुक्त मुनीष सिकरवार व अन्य अफसर मौजूद रहे।
पेनल सभापति किया नियुक्त
नगर निगम परिषद के साधारण सम्मेलन का आयोजन सभापति मनोज सिंह तोमर की अध्यक्षता में निगम परिषद कार्यालय में किया गया। बैठक में अनेक बिंदुओं पर चर्चा कर निर्णय लिए गए।इसके साथ निर्णय लिया गया कि सभापति की अनुपस्थिति में पेनल सभापति के रूप में पार्षद गिर्राज कंसाना एवं मंजू दिग्विजय सिंह राजपूत काम करेंगी।
इन बिंदुओं पर बनी सर्वसहमति
- कैंटोनमेंट बोर्ड से नागरिक क्षेत्र को पृथक कर नगर निगम में शामिल किया जाए। इस पर सभापति ने स्वीकृति प्रदान करते हुए कहा कि कैंटोनमेंट के विलय करने में आने वाले खर्च को नगर निगम शासन से मांग करे।
- मध्य प्रदेश राजपत्र प्राधिकार से प्रकाशित क्रमांक 46 भोपाल 13 नवंबर 2020 के अनुसार गत वर्ष की भांति वित्तीय वर्ष 2024-25 में कलेक्टर गाइडलाइन अनुसार सम्पत्ति कर की दरों के निर्धारण किया जाए। जिस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जो लोग गार्बेज शुल्क क्या युक्तियुक्तकरण किया जाए। जो लोग संपत्तिकर पहले दे चुके हैं और गार्बेज शुल्क दे रहे उन्हें समायोजित किया जाए। इसके साथ ही 6 प्रतिशत की छूट के साथ संपत्तिकर जमा करने की तिथि 30 अगस्त तक निर्धारित की जाए। इस पर सभापति ने निगमायुक्त को निर्देश दिए कि उक्त ठहराव के संबंध में जो भी निर्णय लिए गए हैं उनका पालन कराना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
- बजट संशोधन क्रमांक 20 जीएल कोड क्रमांक 2308004 प्रपत्र 7 में पूर्वानुसार राशि से 20 करोड का प्रावधान किया जाना आवश्यक है ताकि निविदा उपरांत श्रमिकों का वेतन भुगतान संभव हो सके।जिसे सर्वसहमति से स्वीकार कर लिया गया ।
- मध्य प्रदेश मक्षेविविकलि के द्वारा नगर निगम सीमा में पोल व ट्रांसफार्मर के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र दिये जाने की बात परिषद के सामने रखी गई। जिसमें बताया गया कि नगर निगम 500 रुपये प्रति पोल और 2000 रुपये प्रति ट्रांसफार्मर रखने की राशि निगमायुक्त कोष में लेने का निर्णय किया है। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बिजली विभाग अक्सर नगर निगम को किसी न किसी मुद्दे पर परेशान करता है और बिजली कटौती के साथ लंबे चौड़े बिल भी थमाता है। इसलिए जो राशि निर्धारित की गई उसे बढ़ाकर 2000 रुपये प्रति पोल और 5000 रुपये प्रति ट्रांसफार्मर की जाए।जिस पर दोनों ही दलों ने सहमति जताई तो सभापति ने उक्त प्रस्ताव को स्वीकृत करते हुए प्रति -पोल 2000 रूपये एवं ट्रांसफार्मर पर 5000 हजार रूपये करने के निर्देश दिए।
- हुरावली स्थित निगम भूमि पर व्यावसायिक एवं आवासीय अत्याधुनिक परिसर के निर्माण हेतु डीपीआर बनाने एवं निविदा आमंत्रण करने की स्वीकृति के संबंध में स्वीकृति चाही गई। इस पर पार्षद जितेन्द्र मुदगल ने कहा कि इसमें व्यवसायिक क्षेत्र में पार्षदों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। जिस पर दोनों ही दलों के पार्षदों ने मौन स्वीकृति दी। सभापति ने कहा कि डीपीआर की स्वीकृति दी जाती है पर परीक्षण करने के उपरांत निविदा जारी करने का निर्णय लिया जाएगा।


