सावन का पहला सोमवार: अचलेश्वर महादेव पर रुद्राभिषेक करने उमड़े श्रद्धालु

लोकमतसत्याग्रह/सुखद संयोग है कि देवाधिदेव महादेव के प्रिय श्रावण मास की शुरुआत सोमवार से होगी। सावन माह पूरे पांच सोमवार होंगे। श्रावण मास का समापन भी सोमवार से होगा। पहले सोमवार को पांच शुभ योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्ध नामक शुभ योग का निर्माण भी हो रहा है। जैसा कि इसके नाम से जानकारी मिल रही है कि यह योग सभी कार्यों को सिद्ध करता है। नगर के प्रमुख शिव मंदिरों व शिवालयों में विशेष तैयारी की गई है। मंदिरों को फूलों से सजाया गया है। शिवालयों में आधी रात से अभिषेक भी शुरू हो गए हैं।

नगर में शिवभक्तों की आस्था का केंद्र अचलेश्वर मंदिर पर पहले सोमवार को 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शनों व जल अर्पित करने के लिए आने की संभावना को ध्यान में रखते हुए तैयारी की गई है। इसके अलावा प्राचीन कोटेश्वर, गुप्तेश्वर व गिरगांव महादेव के दर्शनों के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

अचलेश्वर मंदिर पर 54 सेवादारी तैनात, महिला पुरुषों की अलग-अलग होगी कतार

  • अचलेश्वर मंदिर संचालन समिति ने श्रावण मास के पहले सोमवार को शिवभक्तों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। समिति के अध्यक्ष पूर्व सेवानिवृत्त न्यायाधीश उच्च न्यायालय एनके मोदी के निर्देशन में मंदिरों को फूलों से सजाया गया है। इसके साथ ही तड़के से 54 के लगभग सेवादारियों की तैनाती की गई।
  • मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश व निकलने के लिए तीन द्वार बनाए गए हैं। चौथे सड़क मार्ग के द्वार से श्रद्धालु बाहर से ही दर्शन करे सकेंगे। पं. सुदामा ने बताया कि नंदी द्वार, एमएलबी कालेज व दूरसंचार विभाग गेट से श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे और निकल सकेंगे। सेवादारियों के आधार कार्ड की फोटो कापी लेने के साथ, यह सूची पुलिस को भेजी गई है।

सीसीटीवी कैमरे से होगी निगरानी

मंदिर के गर्भगृह के अलावा चारों तरफ के सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। इसका कंट्रोल रूम मंदिर के कार्यालय में बनाया है। जहां से शरारती तत्वों की निगरानी की है।

महीने की शुरुआत सोमवार से

भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना 22 जुलाई सोमवार से शुरू हो रहा है। इस बार पांच सोमवार पड़ेंगे, सावन माह सोमवार से शुरू होकर सोमवार को ही समाप्त होगा। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार सावन का पवित्र महीना जितना खास होता है उससे कई गुना अधिक महत्व इस माह में पड़ने वाले सोमवार का माना गया है। श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार का अपना विशेष महत्व है।

पहले सोमवार को महामायाधारी की पूजा

पूजा क्रिया के बाद शिव भक्तों को च्ऊं लक्ष्मी प्रदाय ह्री ऋण मोचने श्री देहि-देहि शिवाय नम: का मंत्र 11 माला जाप करना चाहिए। इस मंत्र के जाप से लक्ष्मी की प्राप्ति, व्यापार में वृद्धि और ऋण से मुक्ति मिलती है।

दूसरा सोमवार- महाकालेश्वर की पूजा

श्रद्धालु को च्ऊं महाशिवाय वरदाय हीं ऐं काम्य सिद्धि रुद्राय नम: मंत्र का रुद्राक्ष की माला से कम से कम 11 मामला जाप करना चाहिए। महाकालेश्वर की पूजा से सुखी गृहस्थ जीवन, पारिवारिक कलह से मुक्ति, पितृ दोष व तांत्रिक दोष से मुक्ति मिलती है।

तीसरा सोमवार- अर्द्धनारीश्वर की पूजा

इन्हें प्रसन्न करने के लिए च्ऊं महादेवाय सर्व कार्य सिद्धि देहि-देहि कामेश्वराय नम: मंत्र का 11 माला जाप करना श्रेष्ठ माना गया है। इनकी विशेष पूजन से अखंड सौभाग्य, पूर्ण आयु, संतान प्राप्ति, संतान की सुरक्षा, कन्या विवाह, अकाल मृत्यु निवारण व आकस्मिक धन की प्राप्ति होती है।

चौथे सोमवार -तंत्रेश्वर शिव की आराधना

इस दिन कुश के आसन पर बैठकर च्ऊं रुद्राय शत्रु संहाराय क्लीं कार्य सिद्धये महादेवाय फट् मंत्र का जाप 11 माला भक्तों को करनी चाहिए। तंत्रेश्वर की कृपा से समस्त बाधाओं का नाश, अकाल मृत्यु से रक्षा, रोग से मुक्ति व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

पांचवां सोमवार

शिव का रुद्राभिषेक करें,इसके बाद उन्हें फल, पुष्प, धूप, बेलपत्र, अक्षत आदि चीजें अर्पित करते जाएं। फिर भगवान शिव का नाम लेते हुए देसी घी का दीपक जलाएं। इस दौरान शिव जी के मंत्रों का जाप करते रहना चाहिए, इससे सकारात्मकता का स्तर बढ़ता है।

बाबा महाकाल की सवारी आज मुरार भ्रमण के लिए निकलेगी

बाबा महाकाल की भव्य नगर भ्रमण यात्रा मुरार में निकाली जाएगी। सोमवार को शाम 4 बजे श्री गिर्राज मंदिर, मुरार से बाबा महाकाल पालकी में सवार होकर निकलेंगे जो नगर के घासमंडी, सब्जी मंडी, एमएच चौराहा, सिंहपुर रोड, बारादरी चौराहा, सदर बाजार, अग्रसेन चौराहा, बजाजखाना होते हुए वापस गिर्राज मंदिर पहुंचेंगी। मार्ग में कई स्थानों पर बाबा महाकाल की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा की जाएगी।

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