लोकमतसत्याग्रह/शहर में आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी करने के भले ही लाख दावे किए जाएं, लेकिन हकीकत यह है कि कुत्तों की धरपकड़ पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है। निगम ने एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर का संचालन सिद्धांत सोसायटी फार एनिमल केयर को दिया था, लेकिन वेतन भुगतान के विवाद के चलते कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया।
कुत्तों को पकड़ने के लिए एबीसी सेंटर के नोडल अधिकारी अनुज शर्मा ने कार्यशाला प्रभारी शैलेंद्र सक्सेना को एक डॉग कैचिंग गाड़ी के रूप में ट्रैक्टर-ट्राली उपलब्ध कराने के लिए गत दो अगस्त को पत्र लिखा, लेकिन 11 दिन में भी वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया। यह पूरा मामला तब सामने आया, जब मंगलवार को नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष हरिपाल की पत्नी पूर्व पार्षद आशा यादव स्वयं डाॅग बाइट की शिकार हो गईं।
एबीसी सेंटर का संचालन करने वाली ठेकेदार फर्म ने साढ़े 14 लाख रुपए के भुगतान का पहला बिल लगाया था। यह बिल लंबे समय से अपर आयुक्त विजय राज के स्तर पर लंबित पड़ा हुआ है। अपर आयुक्त ने इस मामले में कुछ आपत्तियां लगाई थीं, जिनका निराकरण कर दिया गया।
इसके बावजूद भुगतान न होने पर ठेकेदार फर्म ने गत एक अगस्त को पत्र लिखकर सेंटर का संचालन बंद कर दिया। अभी तक ठेकेदार फर्म द्वारा शहर में कुत्तों की धरपकड़ कराई जा रही थी। जब सेंटर का संचालन बंद हो गया, तो अगले ही दिन सेंटर के नोडल अधिकारी शर्मा ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली उपलब्ध कराने का पत्र लिखा।


