डीआरडीई में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 20 से

लोकमत सत्याग्रह /ग्वालियर। रक्षा अनुसंधान एवं विकास स्थापना (डी.आर.डी.ई.) में ‘रसायन-जैव रक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी विकास की प्रगति में शैक्षणिक जगत और औद्योगिक क्षेत्र को सक्रिय और समन्वित करने हेतु राष्ट्रीय सम्मेलन का आज 20 एवं 21 सितंबर को डी.आर.डी.ई. के तानसेन मार्ग स्थित परिसर में किया जा रहा है। सम्मेलन में महानिदेशक (जैवविज्ञान) डी.आर.डी.ओ. मुख्यालय दिल्ली डॉ. यू.के सिंह, कोवैक्सीन के जनक भारत बायोटैक के डॉ. कृष्णा एल्ला उपस्थित रहेंगे।   

डी.आर.डी.ई. के निदेशक डॉ. मनमोहन परीडा ने बताया कि इस सम्मेलन का मूल उद्देश्य रसायन-जैव रक्षा क्षेत्र की प्रगति में योगदान करने वाले समस्त भागीदारों (वैज्ञानिक, शिक्षा जगत, उद्योग) को एक स्थान पर एकत्र कर परस्पर विचार-विमर्श एवं भविष्य की कार्ययोजना का निर्माण है। इस आयोजन में देश के अग्रणी वैज्ञानिक संस्थानों जैसे आई. आई.टी. दिल्ली, राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान, बंगलूरु, सी.एस.आई.आर., टी.आई.एफ.आर., राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान आदि शिक्षा जगत के महत्त्वपूर्ण संस्थानों के वैज्ञानिक,  एवं भारत बायोटेक, भारत इलैक्ट्रॉनिक्स, ट्राइडेंट, एल. एण्ड टी., अरविंद मिल्स लि., जैसे निजी उद्यमों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। आयोजन सचिव एवं डी.आर.डी.ई. के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए. के. गोयल ने बताया कि सी.बी.आर.एन. खतरे सार्वजनिक स्वास्थ्य, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए चिंता का विषय हैं। सीबीआरएन रक्षा से संबंधित आपातकालीन तैयारियों को बढ़ाने, संभावित खतरों के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को प्रबंधित करने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सम्मेलन सभी हितधारकों को आतंकवाद और युद्ध के मौजूदा परिदृश्य में रसायन जैव रक्षा के विभिन्न पहलुओं और संभावनाओं पर विचार-विमर्श और चर्चा करने और भविष्य में किसी भी अप्रिय रसायन जैव आपातकाल के लिए भारत को आत्मनिर्भर और बेहतर रूप से तैयार करने की दृष्टि से उचित सिफारिशें, कार्ययोजना प्रदान करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा। इस दो-दिवसीय पाठ्यक्रम में प्रतिभागियों को ऐसे ही अनुसंधान कार्यों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक रूप से देखना का अवसर मिलेगा।  

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