भरत सिंह परमार : 26-SEPTEMBER 2024
ग्वालियर में आगामी पांच अक्टूबर को बांग्लादेश -भारत के क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया है ,
परन्तु खेल के उत्साह और रोमांच के बीच यह जानना भी जरुरी है की जिस देश बांग्लादेश का ये खिलाडी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं वह वर्तमान में अपने यहाँ रहने वाले हिन्दू अल्पसंख्यकों के साथ कैसी बर्बरता कर रहा है।
वर्तमान बांग्लादेश में तेज़ी से “काफिर -कुफ्र” के सिद्धांत वाली अराजकता फैल रही है क्योंकि मुस्लिम कट्टरपंथी इस देश और समाज के हर पहलू पर हावी होने लगे हैं, जिसमें बांग्लादेशी सेना भी शामिल है।
अभी हाल ही में 19 सितंबर को, मुस्लिम भीड़ ने बांग्लादेश के चटगाँव पहाड़ी इलाकों में “चकमा और त्रिपुरी “समुदायों के खिलाफ़ हिंसक हमले किए। भीड़ ने हिंदुओं और बौद्धों दोनों को निशाना बनाते हुए 200 से ज़्यादा घरों और दुकानों को नष्ट कर दिया।

स्थानीय रिपोर्टों से पता चला है कि ये हमले सिर्फ़ हिंसा की अराजक घटनाएँ नहीं थीं। बल्कि, योजनापूर्वक भीड़ को बांग्लादेश सेना के एक ब्रिगेडियर सहित उच्च-श्रेणी के सैन्य अधिकारियों का समर्थन प्राप्त था। इस चौंकाने वाले खुलासे ने हिन्दुओं की चिंता और बढ़ा दी है कि अब सेना भी अल्पसंख्यक हिन्दुओं , बौद्धों ,ईसाइयों के खिलाफ़ चल रहे नस्लीय सफ़ाई अभियान में शामिल है।
सेना की मिलीभगत का यह पहला मामला नहीं है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सेना के जवान हिन्दुओं के घरों को जलते हुए देखते रहे और हस्तक्षेप करने से इनकार करते रहे।
शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश में स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। कट्टरपंथी मुस्लिम तत्वों ने सत्ता के रिक्त स्थान को भरते हुए देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। नीतियों को प्रभावित करने से लेकर हिंसक भीड़ का समर्थन करने तक, कट्टरपंथी समूहों ने खुद को बांग्लादेशी समाज के ताने-बाने में पिरो लिया है।
चटगांव का पहाड़ी इलाका जो 95 % हिन्दू आबादी होने के बावजूद भी 1947 में पाकिस्तान को दे दिया गया था ,(1971 में बांग्लादेश के निर्माण से पहले यह क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान ही कहलाता था)। इससे पहले भी यहाँ के मूलनिवासी ” चकमा और त्रिपुरी” समुदाय के लोगों को भेदभाव का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन अब बांग्लादेश जिहादियों के कब्जे में आने के बाद खतरा अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। हाल के हमलों में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर डर पैदा करने और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने का पैटर्न अपनाया गया है। दिघिनाला, रंगमती और खगराछारी जैसे इलाकों में मुस्लिम भीड़ ने गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों के घरों और व्यवसायों को व्यवस्थित रूप से नष्ट कर दिया है।
मंदिरों पर भीषण हमले
पिछले दिनों हिंसा से ग्रस्त बांग्लादेश से का एक वीडियो सामने आया था जो सनातन धर्म की सच्ची भावना को दर्शाता है। इस वीडियो में एक हिन्दू पुजारी मुस्लिम भीड़ से अपने देवता की मूर्ति को बचाने के लिए ,अपने देवता को एक साधारण कपड़े में लपेटकर मंदिर से दूर ले जाता हुआ दिखाई देता है। यह वीडियो दिखाता है कि अगर कोई समाज सबक नहीं लेता है तो इतिहास खुद को कैसे दोहराता है।आज के दौर का यह वीडियो सनातनियों को उस समय में वापस ले जाता है जब हिंदुओं ने इस्लामिक आक्रमणकारियों का मुकाबला करने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देना पड़ा था।
आज, बांग्लादेश के हिंदू समुदाय को एक भयावह चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। हिन्दुओं के विरुद्ध लगभग एकजुट वैश्विक समुदाय की चुप्पी के साथ उनका अस्तित्व मिटाया जा रहा है। हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है, लूटा जा रहा है, उजाड़ा जा रहा है और जलाया जा रहा है। इस्लामी हिंसा की लहरों में मूर्तियों को अपवित्र किया जा रहा है। इस्कॉन मंदिर, काली मंदिर और हिंदू पूजा के कई अन्य स्थानों पर इस्लामी हमले के द्रश्य सामने आ रहे है। इसलिए, उस हिन्दू पुजारी द्वारा अपने देवता को ले जाने का वीडियो बांग्लादेश के हिंदुओं द्वारा सामना की जाने वाली क्रूरता की वास्तविकता को उजागर करता है।
मीडिया और सरकार का इनकार
इस बीच, बांग्लादेशी , भारतीय वामपंथी ,और वैश्विक मीडिया इन हमलों के पीछे इस्लामिक कट्ट्टरता को कम करके दिखाने में लगे हुए हैं हैं।बांग्लादेशी रिपोर्टों ने अपनी सुविधाजनक रूप से उन्नीस सितम्बर की हिंसा को “आदिवासी संघर्ष” के रूप में लेबल किया है, इस तथ्य को अनदेखा करते हुए कि मुस्लिम भीड़ ने हिंदू और बौद्ध समुदायों पर हमला किया। यह मीडिया कवरेज इन हमलों की वास्तविक प्रकृति को छिपाने और जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास करता दिखाई देता है। गलत सूचनाओं और मीडिया संस्थानों की मिलीभगत के कारण, बड़ा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय बांग्लादेश में हो रहे क्रांतिकारी परिवर्तन से काफी हद तक अनजान है।
भारत विभाजन के बाद 1947 में बना पूर्वी पाकिस्तान हो या 1971 में बना बांग्लादेश , भारत से कट कर इस भूमि का अब तक का इतिहास हिन्दुओं के रक्त से रंजित ही रहा है , ऐसे में यदि भारत जो की एक हिन्दू बहुसंख्यक राष्ट्र है वहां पर बांग्लादेशी टीम की आवभगत करना बहुत ही निंदनीय है।

