इजराइल नहीं थकने वाला !

एक छोटी सी आबादी वाले यहूदी समाज की चुनौती के सामने ,छप्पन देश ,करोड़ों की आबादी , बेशुमार पैसा ,जेहादी धमकियां सब कुछ खोखला साबित हो रहा है ।

भरत सिंह परमार :- 05/october/2024

यहूदियों की यह विलक्षण खूबी है,वो लोग जो सदियों दरबदर भटकते रहे , विपरित परिस्थितियों में भी जिन्होंने अपनी जिजीविषा को खत्म नहीं होने दिया । जब 1948 में उन्हें अपना राज्य मिला तो ,हर यहूदी उसके लिए अपना सर्वस्व लगते हुए जी रहा है। निश्चित ही प्रधानमंत्री नेतन्याहू पुराने प्रधानमंत्रियों, से अलग हैं। इसलिए बहुत से यहूदी उनसे असहमत भी रहते हैं लेकिन हर यहूदी यह भी जानता है कि उन्हें नष्ट करने का संकल्प लिए दुश्मन कौन है? और इसलिए सारा यहूदी समाज युद्ध के साथ “वीर भोग्या वसुंधरा” के सनातनी सिद्धांत में विश्वास रखता हैं।

जाहिर है इजराइल मिशन पूरा होने तक थकेगा नहीं। पश्चिम एशिया में लड़ाई बढ़ेगी। इजराइल की सेना गाजा, वेस्ट बैंक, लेबनान और सीरिया में मौजूद, छुपे इस्लामी लड़ाकों को खत्म करके दम लेगी। ऐसा होना ईरान की नाक कटना है। इसलिए ईरान लड़ाई के मोड में है। मंगलवार को 180 ईरानी मिसाइलों का इजराइल पर हमला मामूली नहीं था। इजराइल ने सभी को मार गिराने का दावा किया लेकिन एक साथ तेज रफ्तार की इतनी बैलेस्टिक मिसाइलों में कुछ तो सफल हुई होंगी। उसका प्रतिरोधक इंटरसेप्टर आइरन डोम सिस्टम सौ प्रतिशत कामयाब नहीं था।

तभी सबक सिखाने के लिए इजराइल मिसाइल से जवाब देगा। यदि इजराइल ने ईरान के एटमी ठिकानों पर हमला किया तो ईरान मरता क्या न करता से जवाब देने को मजबूर होगा। दरअसल प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके हार्डकोर सलाहकारों का हमास, हिजबुल्लाह की लीडरशीप को मारने की सफलताओं से हौसला बुलंद है। जिससे खतरा था उस ईरान के हमले कागजी साबित हो रहे हैं तो इजराइली चाहेंगे कि लेबनान में सेना भीतर आखिर तक घुसे और हिजबुल्लाह को पूरी तरह खत्म करे। अब तक की घटनाओं से जाहिर है कि हिजबुल्लाह भी कागजी शेर है। पहले बताया जाता था कि उसके जखीरे में एक लाख बीस हजार मिसाइलें हैं। इजराइल से सटी लेबनानी सीमा पर खंदकों-सुरंगों का ऐसा जाल बना रखा है कि इजराइली सेना भेद नहीं सकेगी। लेकिन इजराइल लेबनान में दस हजार सैनिकों की डिवीजन घुसा रहा है। उसके सिर्फ आठ सैनिकों की मौत की खबर है। लग रहा है कि इजराइली सेना लेबनान के दूसरे छोर तक जा कर हिजबुल्लाह को मिट्टी में मिला कर ही दम लेगी।

इसलिए ईरान कब तक गीदड़भभकी देता रहेगा? आमने-सामने की लड़ाई से भागा रहेगा? फिलहाल ईरान गिड़गिड़ाने की कूटनीति कर रहा है। मतलब और वह लड़ाई नहीं चाहता वाली कूटनीति। उसे एटमी ठिकाने बचाने हैं। लेकिन नेतन्याहू क्यों मौका चूकेंगे? इसलिए यह परिदृश्य असंभव नहीं है कि अपने इस्लामी लड़कों , हिजबुल्लाह, हमास, हूती, सीरियाई शिया लड़ाकों को ईरान पूरी तरह खत्म होने दे। वह इजराइल को जवाब देने से भाग रहा है ।

Leave a comment