ग्वालियर में बिरला नगर स्टेशन के करीब रेलवे ट्रैक पर मिली लोहे की रॉड, ट्रेन पलटाने की साजिश

ट्रैन पलटाने के प्रयासों की एकरूपता को सरकारों को गंभीरता से लेकर दोषिओं पर आतंकवाद निरोधक कानूनों के तहत कार्यवाही करने की आवश्यकता है ।

एक रेल दुर्घटना कई पारंपरिक आतंकवादी हमलों से ज्यादा जान माल का नुकसान करने के लिए पर्याप्त है । जिस प्रकार से पुरे देश में पकडे गए समुदाय विशेष के युवकों द्वारा चोरी , झपटमारी आदि छोटे अपराधों बहाने दिए जा रहे हैं और सामान्य धाराओं में उनको गिरफ्तार किया जा रहा है ये भविष्य में किसी बड़ी आतकवादी घटना का आधार बन सकता है।

देश में कई जगहों पर ट्रेनों को दुर्घटनाग्रस्त करने के प्रयास के कई मामले सामने आए हैं। अब ग्वालियर में भी ऐसा ही चौंकाने वाला सामने आया। ग्वालियर में दिल्ली की ओर जाने वाले रेलवे ट्रैक पर बिरलानगर स्टेशन के नजदीक लोहे की छड़े रखी पायीं गई। हालांकि, समय रहते इसका पता लग जाने से उस तरफ जा रही मालगाड़ी को रोक दिया गया। इसके चलते बड़ी घटना टल गई। आरपीएफ व जीआरपी ने इस मामले में जांच शुरू कर दी। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

ट्रैक पर लोहे की छड़

घटनाक्रम के मुताबिक ग्वालियर बिरलानगर स्टेशन के पास गुड्स ट्रैक पर देर रात लोहे की छड़ें रखीं मिलीं। इसी ट्रैक पर स्पीड से मालगाड़ी आ रही थी लेकिन मालगाड़ी को समय रहते रोक दिया गया। इससे दुर्घटना होने से बच गई। इसके बाद पूरे रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। घटना के बाद ग्वालियर जीआरपी और आरपीएफ ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अज्ञात आरोपियो के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और उनका पता लगाया जा रहा है।

सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

जीआरपी थाना प्रभारी एमपी ठक्कर ने बताया है कि इसकी मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच की जा रही है। रेल की पटरी पर यह लोहे की छड़ कहां से आई और किसने रखी है? इसके साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी के माध्यम से भी जानकारी जुटाई जा रही है। गोरतलब है कि इससे पहले कानपुर, खंडवा सहित अन्य जगहों पर ट्रेनों को पलटाने के प्रयास के कई मामले सामने आए हैं। इस बार यह प्रयास ग्वालियर में भी किया गया। ग्वालियर में रेलवे ट्रैक पर लोहे की छड़े रख दी गईं लेकिन समय रहते माल गाड़ी को रोक दिया गया।

पहली छड़ यदि ट्रेन के पहिए से कट भी जाती, तो ट्रेन को झटका लगता और तब तक दूसरी छड़ पहिए के नीचे आ जाती। ऐसे में ट्रेन के डिरेल होने की पूरी संभावना थी। इस घटना की जानकारी मिलते ही पूरे दिन झांसी मंडल से प्रयागराज मुख्यालय तक हलचल मची रही, क्योंकि इससे पहले भी उत्तर मध्य रेलवे के अंतर्गत विभिन्न स्टेशनों के आसपास ट्रेन पलटाने का षड्यंत्र रचा जा चुका है।

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