‘संस्कृत भारत की अस्मिता की पहचान करने वाली भाषा है’:डॉ. मनोज पाण्डेय

लोकमत सत्याग्रह/नीरज वैधराज /सागर / मध्य प्रदेश

सागर./डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग एवं संस्कृत भारती महाकौशल प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में दशदिवसीय संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण शिविर का आयोजन संस्कृत विभाग के संस्कृत संभाषण कक्ष में किया गया। दिनांक 26 सितम्बर 2024 शिविर का उद्घाटन हुआ।

शिविर के उद्घाटन सत्र में संस्कृत भारती के महाकौशल प्रान्त के संगठन मंत्री डॉ. मनोज पाण्डेय महोदय ने कहा कि संस्कृत भारत के अस्मिता की पहचान करने वाली भाषा का नाम है, संस्कृत का व्यावहारिक अनुप्रयोग भारतीय मानस को अपनी मूल संस्कृति से जोड़ने का संतोष उपलब्ध कराता है। संपूर्ण भारत में संस्कृत ही एक ऐसी भाषा है जो सर्वत्र समाद्रत है।

दशदिवसीय शिविर में संस्कृत भारती के सूचिन्तित और सुव्यवस्थित पाठ बिंदुओं का सुरुचि पूर्ण अभ्यास शिविर में प्रतिभा करने वाले प्रतिभागियों के व्यक्तित्व में संस्कृत भाषा का सुंदर सन्निवेश कराने में समर्थ होगा, कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर आनंदप्रकाश त्रिपाठी महोदय ने संस्कृत के महत्त्व को बताते हुए कहा संस्कृत देव वाणी के रूप में प्रतिष्ठित विश्व की प्राचीनतम भाषा है, हिंदू परंपरा में व्यक्ति के जीवन के आरंभ से लेकर उसकी मृत्यु पर्यंत संस्कृत भाषा का उपयोग विविध संस्कारों के माध्यम से आज भी सतत रूप से किया जाता है, संस्कृत भाषा से व्यक्ति का जीवन सुसंस्कृत होता है विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर भवतोष इन्द्रगुरु महोदय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में संस्कृत के महत्त्व को रेखांकित किया और बताया की नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा को जानने के लिए प्रत्येक विषय के विद्यार्थी को संस्कृत का ज्ञान अपेक्षित है।

कार्यक्रम में संयोजक एवं संस्कृत भारती के सागर जिला अध्यक्ष डॉ. शशिकुमार सिंह महोदय ने दश दिवस तक चलने वाले संस्कृत संभाषण शिविर के पाठ चर्चा और उसमें आयोजित होने वाले विविध कार्यक्रमों से प्रतिभागियों को परिचित कराया कार्यक्रम की संचालन कार्यक्रम का संचालन डॉ. किरण आर्या महोदया ने किया तथा डॉ. रामहेत गौतम महोदय ने आभार ज्ञापन किया।

दिनाँक 7 अक्टूबर 2024 को संस्कृत विभाग के संस्कृत सभागार कक्ष में दशदिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का समापन समारोह आयोजित किया गया जिसमें प्रतिभा करने वाले लगभग 100 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया गया तथा उपहार स्वरूप ‘संस्कृत वदतु’ पुस्तक भेंट की गई कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर आनंदप्रकाश त्रिपाठी महोदय ने प्रतिभागियों के मुख से धारा प्रवाह संस्कृत संभाषण को देखकर अत्यधिक प्रसन्नता व्यक्त की और शिविर की सफलता के लिए आयोजकों को बधाई दी उन्होंने कहा वर्षों बाद संस्कृत संभाषण शिविर का आयोजन विभाग में हुआ यह शिविर प्रतिभागियों को लाभान्वित करेगा और वह यदि शिविर में कराए गए अभ्यास को सतत रूप में जारी रखेंगे तो संस्कृत भाषा उनके व्यक्तित्व की पहचान बन जाएगी शिविर के संयोजक डॉ.शशिकुमार सिंह ने बताया कि शिविर में संस्कृत संभाषण दक्षता परीक्षा का भी आयोजन किया गया इसमें शिक्षा नायक स्नातक की छात्रा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में रामरतन पाण्डेय महोदय के द्वारा रु. 500 की नगद राशि से शिक्षा नायक को सम्मानित किया गया कार्यक्रम का संचालन संस्कृत माध्यम से संस्कृत विभाग के शोध छात्र गुलशन कुमार के द्वारा किया गया तथा चित्रांश कन्हौआ के द्वारा आभार ज्ञापन किया गया. इस अवसर पर संस्कृत विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ.संजय कुमार, डॉ. रामहेत गौतम, डॉ. किरण आर्या एवं डॉ. नौनिहाल गौतम उपस्थित रहे.

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