लोकमत सत्याग्रह / जनता को गारंटीड और समय पर सेवाएं देने का दावा करने वाले लोक सेवा केंद्रों पर लोग परेशान हैं। सेवाएं तो मिल रहीं हैं लेकिन समय सीमा में नहीं, देर से सुविधा मिल रही है। छोटी-छोटी सेवाओं के लिए एक-एक माह का समय लग रहा है।
नौबत यह है कि जिस तरह लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर परेशान होते हैं, वैसे ही लोक सेवा केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। आवेदकों की भीड़ भी केंद्रों पर है जिस कारण घंटो समय भी लग रहा है। सोमवार को जनता की सुविधाओं को प्रदान करने वाले लोक सेवा केंद्रों का जायजा लिया। आवेदकों ने बताया कि सेवा तो मिल जाती है लेकिन समय भी काफी लग जाता है।
लोक सेवा केंद्र: कलेक्ट्रेट
कलेक्ट्रेट में स्थित लोक सेवा केंद्र कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर प्रवेश करते ही मिलता है। सोमवार की दोपहर टीम लोक सेवा केंद्र पहुंची तो यहां आवेदकों की भीड़ लगी थी। हर काउंटर पर आवेदक थे और अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसके अलावा प्रवेश द्वार पर मिले काउंटर पर भी लोग खड़े थे। लोक सेवा केंद्र के स्टाफ की कुछ कुर्सियां खालीं पड़ीं थीं, यहां आवेदक उनके आने का इंतजार कर रहे थे। यहां अंदर ही एक केबिन बना हुआ था उसमें दो लोग बैठे थे। काउंटर का सिस्टम ठीक नहीं मिला, यहां आवेदक और स्टाफ का संवाद ठीक से नहीं हो पा रहा था।
लोक सेवा केंद्र: मुरार
लोक सेवा केंद्र मुरार पर भी लोगों का आवागमन लगा हुआ था, यहां आवेदक अपनी अपनी रसीदें लेकर पहुंच रहे थे। यहां स्टाफ मौजूद था जो लोगों के लिए सेवाओं के आवेदन लेकर रसीद काट रहा था। इसके अलावा कुछ आवेदक ऐसे भी थे जो अपने प्रमाण-पत्र व अन्य दस्तावेज लेने पहुंचे थे।
300 से ज्यादा सेवाएं लोक सेवा केंद्र पर
लोक सेवा केंद्रों पर 300 से ज्यादा सेवाएं लोगों के लिए हैं जिसमें केंद्र से लेकर राज्य सहित लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत आने वाली सेवाओं को शामिल किया जाता है। ग्वालियर जिले में आठ लोक सेवा केंद्र हैं जो अलग-अलग प्रोवाइडरों को टेंडर प्रक्रिया के जरिये मिले हुए हैं। मध्य प्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2010 देश का पहला ऐसा अधिनियम है, जिसके तहत नागरिकों को तय समय सीमा में सार्वजनिक सेवाएं मिलती हैं। इस अधिनियम को लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बना था।
प्रमाण पत्र में लगा एक माह
मैंने लोक सेवा केंद्र पर एक माह पहले जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन लगाया था, इसके बाद आवेदन को हस्तिनापुर भेज दिया गया। वहां से पता चला कि निरस्त हो गया। इसके बाद दोबारा आवेदन किया। अब एक माह बाद प्रमाण पत्र मिल सका है।
-नारायण सिंह बघेल, आवेदक


