लोकमत सत्याग्रह / कनाडा ने भारत पर मंगलवार को नए आरोप लगाए हैं। जस्टिन ट्रूडो के पुलिस अधिकारियों ने कहा कि भारत सरकार ने कनाडा में खालिस्तानियों और साउथ एशियाई मूल के लोगों को टारगेट करने के लिए आपराधिक गैंग लॉरेंस ग्रुप का इस्तेमाल किया है।
कनाडाई पुलिस विभाग RCMP में असिस्टेंट कमिश्नर ब्रिजिटी गौविन ने कहा कि लॉरेंस गैंग का भारतीय सरकार के एजेंट्स के साथ कनेक्शन है।
इससे पहले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार के एजेंट्स पर खुफिया जानकारी जुटाने, टारगेट किलिंग, कनाडा के नागरिकों को धमकाने और हिंसा में शामिल होने का आरोप लगाया।
RCMP के सबूतों का हवाला देते हुए ट्रूडो ने कहा-
कनाडा से निकाले गए भारत के 6 डिप्लोमैट्स उन गतिविधियों में शामिल थे, जिससे लोगों को खतरा है। कनाडा ने इस मामले को लेकर भारत के साथ काम करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन भारत ने हर बार मदद से इनकार कर दिया।
भारत ने ट्रूडों के आरोप पर पलटवार कर इन्हें बेबुनियाद बताया है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि कनाडा वही बिना कोई पुख्ता सबूत दिए रटे-रटाए आरोप दोहरा रहा है। हमारे हाई-कमिश्नर को टारगेट किया जा रहा है। भारत ने कहा-
वही पुराने ट्रूडो हैं, वही पुराने बयान दोहरा रहे हैं और उन्हीं पुरानी वजहों से।
3 दिन में भारत–कनाडा के बीच क्या–क्या हुआ?
13 अक्टूबर: कनाडा ने भारत को एक चिट्ठी भेजी। इसमें कहा कि भारतीय हाई-कमिश्नर संजय कुमार वर्मा और दूसरे डिप्लोमैट्स एक मामले में संदिग्ध हैं। कनाडा ने मामले की जानकारी नहीं दी पर इसे निज्जर मामले से जोड़कर देखा गया।
14 अक्टूबर: भारत ने अपने डिप्लोटमैट्स को संदिग्ध बताए जाने पर विरोध जताया और कनाडा के राजदूत को तलब किया। कुछ ही घंटों बाद भारत ने संजय कुमार वर्मा और दूसरे डिप्लोमेट्स को वापस बुला लिया। देर रात खबर आई की कनाडा ने भी भारत से अपने 6 राजदूतों को वापस आने का आदेश दिया है।
15 अक्टूबर: कनाडा के प्रधानमंत्री ने निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट्स के सीधेतौर पर शामिल होने का आरोप लगाया।
दावा– अमित शाह के इशारे पर खालिस्तानियों पर हमला हुआ ट्रूडो ने एक बार फिर भारत से संबंध खराब होने के बाद अमेरिका और ब्रिटेन को अप्रोच किया है। ट्रूडो ने ब्रिटिश PM कीर स्टार्मर से भी बात की है। ट्रूडो ने कहा, “हम दोनों ने अपने नागरिकों की सुरक्षा और कानून का शासन बनाए रखने के मुद्दे पर चर्चा की।”
इसके अलावा ट्रूडो ने अमेरिका और फाइव आइज देशों के नेताओं से बात करने की जानकारी भी दी है। फाइव आइज में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा और न्यूजीलैंड शामिल हैं। ट्रूडो ने कहा कि हमने भारत को लेकर सभी देशों से रिपोर्ट साझा की है।
इस बीच अमेरिकी मीडिया हाउस वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया है कि गृह मंत्री अमित शाह और रॉ एजेंसी ने मिलकर कनाडा में खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और खालिस्तानी आतंकियों पर हमले की इजाजत दी थी।
वॉशिंगटन पोस्ट ने एक कनाडाई अधिकारी के हवाले से बताया कि भारतीय डिप्लोमैट्स कई लोगों पर कनाडा जाने की इजाजत के बदले खुफिया जानकारी देने का दबाव बनाते थे।
इस काम का नेतृत्व कनाडा में भारत के हाई कमिश्नर संजय वर्मा करते थे। रिपोर्ट के मुताबिक 12 अक्टूबर को कनाडा के NSA ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को एक मीटिंग में इसकी जानकारी भी दी थी।
कनाडा पुलिस ने कहा, भारतीय एजेंट्स ने कई जानकारियां जुटाईं कनाडाई पुलिस के कमिश्नर माइक दुहेमे ने प्रेस कॉन्फ्रेस भी की। उन्होंने कहा कि कनाडा में भारतीय राजनयिक और अधिकारियों ने अपने पद का गलत इस्तेमाल कर गुप्त तरीके से भारत सरकार के लिए जानकारियां जुटाई हैं। इसके लिए भारतीय अधिकारियों ने एजेंट्स का इस्तेमाल किया। इनमें से कुछ एजेंट्स को भारत सरकार के साथ काम करने के लिए धमकाया गया और उन पर दबाव बनाया गया।
उन्होंने बताया कि भारत ने जो जानकारी जुटाई, उसका इस्तेमाल दक्षिण एशियाई लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। हमने भारत सरकार के अधिकारियों को इसके सबूत दिए थे और उनसे हिंसा को रोकने और सहयोग करने की अपील की थी।’
दोनों देशों के बीच तनाव की वजह खालिस्तानी आतंकी निज्जर, पिछले साल हत्या हुई थी 18 जून 2023 की शाम को कनाडा के सरे शहर के एक गुरुद्वारे से निकलते समय निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो ने पिछले साल 18 सितंबर को भारत सरकार पर निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसे भारत ने खारिज किया था।
इसके बाद 3 मई को निज्जर की हत्या के 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ये तीनों आरोपी भारतीय हैं। कनाडाई पुलिस ने कहा कि इन पर पुलिस कई महीनों से नजर रखे हुई थी। उन्हें यकीन है कि इन्हें भारत ने निज्जर को मारने का काम सौंपा था। तब भारत ने इस मामले पर कहा था कि यह कनाडा का आंतरिक मामला है।
ट्रूडो के लिए निज्जर का मुद्दा अहम क्यों कनाडा में अक्टूबर 2025 में संसदीय चुनाव हैं। खालिस्तान समर्थकों को कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की पार्टी का बड़ा वोट बैंक माना जाता है। हालांकि, पिछले महीने ही ट्रूडो सरकार में शामिल खालिस्तान समर्थक जगमीत सिंह की NDP पार्टी ने अपना समर्थन वापस ले लिया है।
गठबंधन टूटने की वजह से ट्रूडो सरकार अल्पमत में आ गई थी। हालांकि 1 अक्टूबर को हुए बहुमत परीक्षण में ट्रूडो की लिबरल पार्टी को एक दूसरी पार्टी का समर्थन मिल गया था। इस वजह से ट्रूडो ने फ्लोर टेस्ट पास कर लिया था।
2021 की जनगणना के मुताबिक, कनाडा की कुल आबादी 3.89 करोड़ है। इनमें 18 लाख भारतीय हैं। ये कनाडा की कुल आबादी का 5% हैं। इनमें से 7 लाख से अधिक सिख हैं, जो कुल आबादी का 2% हैं।



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