रामलीला: सीता हरण का भावुक मंचन

रामलीला में स्थानीय कलाकारों द्वारा किया जा रहा है सुंदर अभिनय, मंचन देखने उमड़ी भीड़

लोकमत सत्याग्रह /जीतेन्द्र ओझा/ भितरवार -राक्षसी शूर्पणखा विलाप करती हुई लंका के राजा रावण के पास पहुंचती है। रावण अपने मामा मारीच की मदद से सीता जी के हरण का षड्यंत्र रचता है। मारीच स्वर्ण मृग बनकर कुटिया के पास पहुंचता है। जिसे देख सीता जी जिद पर अड़ जाती हैं कि उन्हें सोने का हिरण चाहिए। जब राम उस हिरण को पकड़ने जाते हैं तो वह लक्ष्मण को सुरक्षा के लिए छोड़कर जाते हैं। उधर जब राम के हाथों मारीच का वध होता है तो वह लक्ष्मण बचाओ की आवाज निकालता है। सीता ये आवाज सुनकर घबरा जाती हैं और लक्ष्मण को राम की रक्षा के लिए भेजती हैं। लक्ष्मण जाने से पहले एक रेखा खींचकर जाते हैं और सीता जी को इसे पार करने से मना करते हैं। इसी बीच साधू वेष बनाकर रावण भिक्षा मांगने पहुंचता है। जब रेखा के अंदर से सीता उसे भिक्षा देती है तो वह रेखा से बाहर आकर ही भिक्षा लेने की बात कहता है। जैसे ही सीता जी रेखा को पार करती हैं तो रावण उनका हरण कर लेता है।यह दृश्य था काली माता मंदिर परिसर में जनता श्रीकृष्ण कला पथक मंडल द्वारा जारी रामलीला में मंगलवार को रामलीला में सीता हरण,शवरी मिलन,सुग्रीव मित्रता,का मंचन किया गया।लीलामंचन के दौरान लंकापति रावण जनक नंदनी सीता को लेकर आकाश मार्ग से जाता है। सीता जी विलाप करती हुईं रक्षा के लिए पुकारती हैं। तभी पक्षीराज जटायु माता सीता की रक्षा के लिए उड़ान भरकर रावण को समझाते हैं। हटधर्मी रावण जटायु की बात को अनसुना करता हैं, तभी रावण और जटायु के बीच युद्ध होता है। रावण जटायु के दोनों पंख काट देता है। इसके बाद जटायु पृथ्वी पर गिरते हैं। जटायु का प्रभु राम के प्रति त्याग व आत्मसमर्पण ने दर्शकों को भावुक कर दिया।सीता की खोज में भटकते राम-लखन को जटायु मिलते हैं।और बताते हैं कि लंकापति रावण सीता जी का हरण कर लें गया और अपने प्राण त्याग देता है।प्रभू श्रीराम जटायु का अंतिम संस्कार करते हैं।प्रभु श्रीराम भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता की खोज में जंगल में भटक रहे हैं। दूर कहीं से उन्हें जय श्रीराम की आवाज सुनाई देती है। पास जाने पर देखते हैं कि एक बुजुर्ग महिला कुटी में प्रभु के नाम का जप कर रही है। कुटी में प्रवेश करते ही महिला अपना परिचय प्रभु भक्त शबरी के रूप में देती है।
अपने प्रभु को घर आया देख शबरी प्रेम से अभिभूत होकर प्रभु को चख कर मीठे बेर खिलाती है तो प्रभु भी भक्त की निष्ठा को देखते प्रेमपूर्वक जूठे बेर खाते है
शबरी द्वारा भगवान राम और लक्ष्मण का सत्कार करते हुए बेर खिलाती हैं। बेर खिलाते समय वो हर बार चखती है। भगवान श्री राम भक्त के प्रेम प्रबल के पाले पड़कर उसके अतिथि सत्कार को स्वीकार कर बेरों को स्वाद पूर्व खाते हैं। वही,लक्ष्मण जी झूठ बेरों को नहीं खाते हैं। शबरी भगवान श्री राम का आभार मानती हुई सीता जी की खोज में वानराज सुग्रीव से मिलने की बात कहती है। उनका पता ऋषिमुख पर्वत पर होना बताती है।प्रभू श्रीराम अनुज सहित उसी ओर जाते हैं इधर भाई बाली के डर से ऋषिमुख पर्वत पर रहने वाले सुग्रीव को गुप्तचरों द्वारा दो वनवासियों का आने की सूचना मिलती है। सुग्रीव, हनुमानजी को राम और लक्ष्मण की जानकारी लगाने के लिए भेजते हैं। राम और लक्ष्मण के पास हनुमानजी साधु के भेष में पहुंचते हैं। इसके बाद हनुमान जी श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर सुग्रीव के पास पहुंचते है। यहां श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता होती है।रामलीला की आरती साहू समाज द्वारा कि गई इस अवसर पर श्रीकृष्ण कला पथक मंडल के सभी पदाधिकारी उपस्थित

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