सुख में सुने या दुख मेें कल्याण करती है भागवत कथा

भितरवार में धनवंतरी दास महाराज की श्रीमद्भागवत कथा आरंभ

लोकमत सत्याग्रह /जीतेन्द्र ओझा/ भितरवार ।श्रीमद्भागवत कथा का माहत्म समझाते हुए व्यासपीठ पर विराजमान अंतरराष्ट्रीय भागवत कथा वक्ता धनवंतरी दास महाराज ने कहा कि परीक्षत कथा सुनते सुनते प्रभुधाम चले गए। कथा से उनकी जीवन और मृत्य दोनों धन्य हो गए। इस मौके पर  दंदरौआ धाम महंत श्री रामदास जी महाराज, धूमेश्वर धाम महंत श्री अनिरुद्ध वन महाराज जी ने व्यास पूजन ,कथा का पूजन किया कथा के परीक्षित जगदीश सिंह यादव, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष वीनू पटेल,नगर परिषद उपाध्यक्ष मन्नू यादव, बलवीर सिंह यादव पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष शिवप्रताप सिंह यादव  आदि ने भागवत महापुराण का पूजन किया। भागवत वक्ता धनवंतरी दास महाराज ने सोमवार को प्रथम दिन कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि कि आप ग्रहस्थ हो या संन्यासी, चाहे परमहंस क्यों न हो जाएं, कथा सबका कल्याण करती है। भागवत कथा से सरल कल्याण का दूसरा मार्ग नहीं हैं, इसलिए कथा का पठन करें, कीर्तन करें श्रवण करें।  जिस रूप में भी कथा का  सेवन करेंगे, मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा।

गाजे-बाजे के साथ निकली कलश यात्रा

– धर्मध्वनि से गुंजायमान हुआ नगर, जगह-जगह हुआ शोभायात्रा का भव्य स्वागत

भितरवार। हवेली परिवार की ओर से खेड़ापति माता मंदिर परिसर में  श्रीमद् भागवत कथा से पूर्व सुबह पार्वती नदी दियादाह घाट वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ विशाल कलश यात्रा निकाली गई। 500मीटर लंबी कलशयात्रा में दो कतारों में महिलाएं सिर पर कलश लेकर चली आयोजकों के परिजनों द्वारा श्रीमद् भागवत ग्रंथ को सिर को लेकर चल रहे थे नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर एवं यात्रामार्ग में पेय पदार्थों के स्टॉल लगाकर स्वागत किया।पीताम्बरी साड़ी पहने सुबह 9 बजे से ही दियादाह घाट  पर महिलाओं को जुटना शुरू हो गया था।कलश पूजन के बाद यात्रा आरंभ हुई, जिसमें कलशधारी महिलाओं के साथ बड़ी संख्या में पुरूष भी चल रहे थे।अंदर बाजार होते हुए नया बस स्टैंड होकर मेंन तिराहा होते हुए गोलेश्वर महादेव हौकर खेड़ापति माता मंदिर परिसर पहुंची। बग्घी पर संत श्री अनिरुद्ध वन महाराज जी धूमेश्वर धाम,भागवत वक्ता धनवंतरी दास महाराज सवार थे।बैंडबाजों पर निकल रही भजनों की मधुर ध्वनि समूचे वातावरण को धर्ममय बना रही थी।कलश यात्रा में बग्घी पर प्रमुख रूप से धूमेश्वर धाम के संत श्री अनिरुद्ध वन महाराज, भागवत वक्ता धनवंतरी दास महाराज बग्गी पर सवार होकर चल रहें थे।

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