भागवत कथा: भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का महत्व

भितरवार में खेडापति माता मंदिर पर आयोजित भागवत कथा श्रवण करने उमड़े श्रद्धालु

लोकमत सत्याग्रह /जीतेन्द्र ओझा/  भितरवार ।इस संसार में जिसने भी अपनी शक्ति पर अंहकार किया है, भगवान ने उसका हमेशा अंहकार तोड़ा है। इन्द्रराज ने इसी प्रकार स्वयं पर अहंकार किया था और अंहकार को तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्णा ने बाल लीलाओं में गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाकर भक्तों की रक्षा की थी।यह बात भागवत वक्ता धनवंतरी दास महाराज ने खेडापति माता मंदिर प्रांगण में

हवेली परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में मंगलवार को गोवर्धन पर्वत धारण कथा का वृतांत सुनाते हुए भक्तों के समक्ष दिए।उन्होंने कहा कि गोकुल में अचानक तेज बारिश हो गई और इन्द्रदेव को यह अंहकार गया कि मैं इस बारिश से संपूर्ण गोकुल को नदी के बहाव में ले जाऊंगा परन्तु भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाकर सभी गोकुलवासियों को पर्वत के नीचे खड़ा कर संपूर्ण लोगों की सुरक्षा कर इन्द्र का घमंड दूर किया और उसी दिन से गोवर्धन पूजा होने लगी। इस अवसर पर व्यास जी ने कहा कि समय का सदुपयोग ही जीवन जीने की कला है, समय से मूल्यवान कुछ भी नहीं है। बीता हुआ समय वापस नहीं सकता है इसलिए समय का सम्मान करते हुए कार्य करना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जीवन में मनुष्य को प्रभु की भक्ति में अपना ध्यान लगाना चाहिए। इससे ही मनुष्य के जीवन में कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन को प्रभु की भक्ति में लगाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अपने जीवन में मनुष्य को जीवन यापन के लिए कर्मशील रहते हुए प्रभु चरणों से प्रेम करना चाहिए। सच्चा प्रेम, अथाह प्रेम और वास्तविक प्रेम जैसा मीराबाई, प्रहलाद, धु्रव, धन्ने जट्ट आदि ने किया। मात्र इतना करने से मनुष्य का कल्याण होगा।

व्यासजी ने कहा कि मानव के सभी दुखों की जड़ उसका अहंकार और स्वार्थ है, जबकि इसके विपरीत दीनता और नि:स्वार्थता मानव के सुखों का बीज है। इन दोनों वृत्तियों की उत्पत्ति होने पर बाकी सभी शुभ वृत्तियां बिना बुलाए अपने आप आ जाती हैं। इस शुभ वृत्तियों का बल रूपी सूर्य सभी मलिन वृत्तियों की मैल अपनी शक्ति से भस्म कर देता है। फिर मनुष्य नि:संकोच होकर अपने प्राणों को गुरु के ऊपर न्योछावर हुए अमृतरस का पान कर मुक्त स्वरूप हो जाता है। इसी को आत्मिक शांति कहा जाता है।उन्होंने कहा कि संसार में अनेक अवगुण हैं और आप में इतनी शक्ति नहीं कि संसार को सुधार सको। लेकिन ईश्वर ने जो बुद्धि-विवेक दिया है उसका उपयोग कर अपने में सुधार करो। जब आप अपने में सुधार कर लोगे तो हर चीज सुधरी हुई नजर आएगी। इसके लिए आपको सिर्फ प्रभु में ह्रदय से समर्पित हो जाना है, जिससे मनुष्य को संसार के आवागमन से मुक्ति मिल सकती

अहंकार विनाश का कारण है। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को अहंकार रहित जीवन जीने की कला सिखाती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का सुनने का व्यक्ति जब संकल्प करता है उसी समय परमात्मा उसके हृदय में आकर निवास कर लेते हैं। भगवान की कथा ऐसी है इसका ज्यों-ज्यों पान करते हैं त्यों-त्यों इच्छा बढ़ती जाती है। कथा रस कभी घटता नहीं निरन्तर बढ़ता रहता है। नित्य नए आनंंद की अभिवृद्धि होती रहती है। इस अवसर पर परीक्षित जगदीश सिंह यादव, बलवीर सिंह यादव,नगर परिषद उपाध्यक्ष मन्नू यादव ने गोवर्धन महाराज की पूजा और छप्पन भोज लगाया गया भगवान की मनमोहक झांकी सजाई गई इस अवसर पर अभिताभ सिंह हरसी, परशुराम पवैया, प्रदीप माहेश्वरी, संतोष यादव सुनमान सिंह, देवेन्द्र सिंह राजकुमार सिंह महेश सिंह रामेश्वर सिंह सोबरन सिंह सतंप्रकाश सिंह लोकेंद्र सिंह शिवप्रताप सिंह कमल सिंह महेंद्र सिंह बलवीर सिंह चंद्रभान सिंह नरेंद्र सिंह सुनील सिंह विनोद यादव, जीतेंद्र सिंह मन्नू यादव हजारों सहित अनेक श्रृद्धालू उपस्थित थे।

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