छत्तीसगढ़ में गैंगस्टर अपराधियों पर एनकाउंटर का प्रभाव

लोकमत सत्याग्रह  / हेमंत वर्मा / राजनांदगांव – क्या गैंगस्टर अपराधियों की छत्तीसगढ़ में छुट्टी होने वाली है बड़ा सवाल

जितेंद्र शुक्ला दुर्ग एसपी को  भला बुरा कहने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अब इस एनकाउंटर को देखकर शायद अपने वक्तव्य पर पछता रहे होंगे

एनकाउंटर शूटआउट मुठभेड़ जैसे शब्द आमतौर पर यूपी और मुंबई जैसे शहरों में देखने को मिलता है लेकिन छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में 12 साल बाद एनकाउंटर दहशत का पर्याय अमित जोश हिस्ट्रीशीटर का  पुलिस एनकाउंटर  ने  छत्तीसगढ़ की साय सरकार का ध्यान पूरे देश ने अपनी ओर खींचा साय सरकार का यह पहला साय साय अटैक था छत्तीसगढ़ में साय सरकार का पहला एनकाउंटर छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री से लेकर बड़े-बड़े मंत्री अपनी सरकार की पीठ थपथपा रहे हैं और बड़े-बड़े  विचार  व्यक्त कर रहे हैं कि अपराधियों की खैर नहीं छत्तीसगढ़ में अब बड़े गुंडे आपराधिक तत्व नजर बंद हो जाए एक तरह से साय सरकार का यह खुला चैलेंज लेकिन इसके इतर अगर कुछ माह पहले भिलाई दुर्ग की एक राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा किया जाए तो देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी के समय कांग्रेस के लोगों ने विरोध प्रदर्शन स्वरूप रैली निकाला जिस पर तत्कालीन एसपी वर्तमान एसपी जितेंद्र शुक्ला ने कड़ी कारवाई करते हुए हल्का आंशिक बल प्रयोग किया एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर कानूनी कारवाई की जिससे बौखला कर छत्तीसगढ़ के ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जितेंद्र शुक्ला पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि वह भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं और एसपी गुंडे की तरह काम कर रहे हैं उन्होंने सीधा-सीधा एसपी पर गुंडागर्दी करने का आरोप लगाया था लेकिन अब इस एनकाउंटर को देखकर शायद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपनी बातों पर दुख महसूस कर रहे होंगे क्योंकि जिस तरीके से अदम्य साहस एवं सूझबूझ से जितेंद्र शुक्ला ने अपनी पूरी फील्डिंग सजा दी थी उसे हिसाब से उनकी तारीफ बनती ही बनती है और बेहद करीबी सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार जितेंद्र शुक्ला को इस साहस भरे कारनामे के लिए राजधानी रायपुर या बिलासपुर में बतौर एसपी पद स्थापना किए जाने की जानकारी सूत्र को हवाले से मिल रही है छत्तीसगढ़ में अब तक हुए एनकाउंटर की अगर बात किया जाए तो पहला एनकाउंटर 1988 में बूढ़ातालाब श्याम टॉकीज के पास मुन्ना तिवारी उर्फ संतोष जिसकी पूरी दहशत राजधानी रायपुर में सुनाई देती थी उनका पहला एनकाउंटर किया गया इसी तरह दूसरा एनकाउंटर 2001 में दुर्ग के अंजोरा में कुख्यात सुखविंदर सिंह उर्फ शोक जो कि छत्तीसगढ़ के नंबर वन डान तपन सरकार का करीबी और शूटर भी था उस मुठभेड़ में शोक मारा गया था इसी तरह 2003 राजीव शर्मा तत्कालीन क्राइम ब्रांच के टीआई उस समय तपन सरकार का पूरे छत्तीसगढ़ में बोलबाला था तपन का बेहद ही करीबी  गोविंद विश्वकर्मा उस पर दर्जनों मामले दर्ज थे वह हर वक्त लोडेड पिस्टल लेकर चलता था उसका एनकाउंटर भी पुलिस ने किया था इसी तरह 2012 में अपराधी गतिविधियों की सूचना पर तत्कालीन क्राइम ब्रांच प्रभारी सुरेश ध्रुव अपनी टीम के साथ मकान में दबिश देने गए थे लेकिन वहां पर चुन्नू जो की खतरनाक बदमाश था उसने पुलिस पर फायरिंग कर दी थी जवाबी फायरिंग में उस पर पुलिस ने गोली बरसाई थी और वह मुठभेड़ में मारा गया था अब यानी की 2024 12 साल बाद साय सरकार ने भिलाई के ही कुख्यात अपराधी अमित जोश को मार गिराया पुलिस ने 16 राउंड फायरिंग की वही अमित जोश ने अपने बचाव के लिए 6 से 7 बार गोली चलाई एक गोली पुलिस की गाड़ी में फंस गई जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली जोश के पैर में लगी इस दौरान वह भागते हुए अपना बचाव करते रहे पुलिस ने दूसरी बार फायरिंग की जिसमें तीन गोली उसे लगी और उसकी वहां पर मौत हो गई अब अगर अमित जोश की अपराधी गतिविधि पर नजर डाला जाए तो वह सेक्टर 6 में का निगरानी बदमाश था उसके खिलाफ दुर्ग भिलाई अलग-अलग थानों में हत्या हत्या के प्रयास जैसे करीब 35 मामले दर्ज है इसमें भिलाई नगर में 25 सुपेला में एक दुर्ग में एक निवाई थाना कुरसीपार में एक पदमानापुर में दो एफआईआर उनके खिलाफ दर्ज है अमित जोश भिलाई में हुए गोली कांड में मुख्य आरोपी था पुलिस को गुप्तचर सूचना से जानकारी प्राप्त हुई कि अमित जोश भिलाई आया हुआ है और एसपी जितेंद्र शुक्ला की निगरानी में एक विशेष टीम का गठन किया गया और उसे शूट आउट कर दिया क्या लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यूपी की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी माफिया अपराधियों पर एनकाउंटर का पैटर्न अपनाया जाएगा देखा जाए तो छत्तीसगढ़ और यूपी की भौगोलिक संरचना राजनीति पुलिससिंग जमीन आसमान का अंतर है यहां पर छत्तीसगढ़ में पुलिस और अपराधियों की जबरदस्त गठजोड़ है यही वजह है कि यहां पर अपराधी पुलिस पर हावी है पुलिस अपराधी पर हावी नहीं हो पा रही है हालांकि एक एनकाउंटर कर देने से पुलिस को सर आंखों में चढ़ाना भी उचित नहीं है क्योंकि छत्तीसगढ़ में अमित जोश जैसे कई बड़े-बड़े माफिया और गैंगस्टर है जो अभी भी अपना  वर्चस्व कायम रखे हुए हैं जिसे तोड़ पाना छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए न सिर्फ चुनौती है बल्कि यह एक असंभव सा प्रतीत होने वाला कार्य है

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