लोकमत सत्याग्रह / केंद्र की योजना में शासकीय विभाग ही रुकावट बन रहे हैं और इसे जरूरी नहीं बता रहे हैं। इसी वजह से भिंड में तो खाता भी नहीं खुला है।अंचल में अब भी हर घर नल की योजना पूरी नहीं हुई है। कहीं ठेकेदार, कहीं सरपंच तो कहीं अफरों के कारण ही प्रोजेक्ट में लेटलतीफी हो रही है।
- नल-जल योजना: अंचल में 53 प्रतिशत ही सफल, जिम्मेदार ही बन रहे रोड़ा
- योजना को चार साल हो गए, मार्च 2025 तक होना है पूरा
- भिंड में नहीं खुला खाता, दतिया में अभी शुरुआत
ग्वालियर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना को चार साल हो चुके हैं, अप्रैल से अक्टूबर के बीच विभाग ने एक लाख 50 हजार 204 आबादी को नल से पानी देने का टारगेट रखा था, लेकिन 80 हजार 143 लोगों को ही इसका लाभ मिल पाया है, इस प्रकार 53 प्रतिशत सफलता मिली है। केंद्र की योजना में शासकीय विभाग ही रुकावट बन रहे हैं और इसे जरूरी नहीं बता रहे हैं। इसी वजह से भिंड में तो खाता भी नहीं खुला है।
दतिया में भी खासी मशक्कत के बाद कुछ माह पहले ही काम शुरू हुआ है। ग्वालियर में काम ठीक रफ्तार से चल रहा है, लेकिन बाकी जिलों में अब भी रफ्तार धीमी है। कुल मिलाकर अंचल में अब भी हर घर नल की योजना पूरी नहीं हुई है। कहीं ठेकेदार, कहीं सरपंच तो कहीं अफरों के कारण ही प्रोजेक्ट में लेटलतीफी हो रही है। इतना ही नहीं अंचल के जिन गांवों में योजना के तहत पाइप लाइन डालने के लिए सड़कों की खोदाई की गई है, वहां भी अभी करीब 82.14 किमी सड़कों के रेस्टोरेशन का काम होना बाकी है।
बता दें, 15 अगस्त 2019 को नल जल योजना की शुरुआत हुई थी। इस प्रोजेक्ट को मार्च 2025 में पूरा होना है। इस योजना में ग्वालियर के 532, दतिया के 603, गुना के 1243, अशोक नगर के 812, शिवपुरी 1262, मुरैना 753, श्योपुर में 509 और भिंड के 881 गांव शामिल हैं। इसमें समूह योजना में 2564 गांव, एकल योजना में 3983 गांव और ओवरलैप वाले 1296 गांव शामिल हैं।
281 में काम पूरा, सर्टिफिकेट बने परेशानी
नल जल योजना में अप्रैल से अक्टूबर माह के बीच ग्वालियर के 32, दतिया के 16, गुना के 40, अशोक नगर के 61, शिवपुरी के 50, मुरैना के 42, श्योपुर के 16, भिंड के 24 गांवों में काम पूरा हो चुका है। खास बात ये है कि एक साल पहले काम पूरा होने के बाद भी अब तक प्रमाणित का सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया है। मुख्य अभियंता ने जब ठेकेदारों की क्लास ली तो उनका कहना था कि क्या करें, हर जगह हैंडओवर के लिए अजीब-अजीब मांग की जा रही है। इसी वजह से दिक्कतें आ रही है।
मुख्य अभियंता खुद कर रहे मानीटरिंग
ग्रामीण पीएचई के मुख्य अभियंता आरएलएस मौर्य खुद इस प्रोजेक्ट की मानीटरिंग कर रहे हैं। जिन गांवों में सड़कों के रेस्टोरेशन का काम नहीं हुआ, वहां के ठेकेदारों से जवाब तलब किया गया है। जिन स्थानों पर ठेकेदारों की लापरवाही पाई गई, उन पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं दतिया में काम शुरू नहीं होने की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर से संपर्क स्थापित कर काम शुरू कराया गया। भिंड में भी काम शुरू कराने के लिए लगातार कलेक्टर और संभागायुक्त से चर्चा की जा रही है। इससे शासन की योजना का लाभ सभी को मिल सके।
कितने गांवों में उखड़ी हैं सड़कें
- जिला गांवों की संख्या कितने किमी बनना है
- ग्वालियर 16 15.05 किमी
- दतिया 29 12.1 किमी
- गुना 2 1.35 किमी
- अशोक नगर 0 0
- शिवपुरी 32 9.82 किमी
- मुरैना 2 1.02 किमी
- श्योपुर 9 4.8 किमी
- भिंड 18 38 किमी
- ल 108 82.14 किमी
कहां कितना काम हुआ पूरा
ग्वालियर संभाग:-ग्वालियर में 52, दतिया में 45, गुना में 26, अशोकनगर में एक और शिवपुरी में 55, कुल 179 गांवों में 70 से 90 प्रतिशत तक काम हो चुका है, जबकि 154 गांवों में 90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है।
चंबल संभाग:-मुरैना में 57, श्योपुर में 36 और भिंड में 86 गांव यानी कुल 179 गांवों में 70 प्रतिशत से अधिक काम हुआ है। वहीं 128 गांवों में 90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हुआ है।
कितने गांवों में काम पूरा हुआ
जिला कुल गांव काम पूरा हुआ प्रमाणित हैंडओवर
ग्वालियर 469 230 134 146
दतिया 452 137 45 35
गुना 427 311 252 241
अशोक नगर 197 180 106 96
शिवपुरी 536 192 112 117
मुरैना 705 189 58 100
श्योपुर 325 140 74 59
भिंड 872 155 87 47
कुल 3983 1534 868 841


