लोकमत सत्याग्रह / ग्वालियर। खदान खरीदने के नाम पर धोखाधडी केस में थाना प्रभारी हुए कोर्ट में हाजिर। पुलसि ने सीडी व पैन ड्राइव पेश करने के साथ सप्लीमेंटरी चालान पेश किया। न्यायालय ने टीआई से कहा कि जज ने इंदरगंज थाना प्रभारी को फटकारा और दी हिदायद।
HIGHLIGHTS
- खदान खरीदने के दौरान हुई धोखाधड़ी का मामला
- कोर्ट के नोटिस के बाद हाजिर हुए थे टीआई
- कोर्ट ने लापरवाही बरतने के लिए स्पष्टीकरण भी मांगा
जिला न्यायालय में चल रहे खदान खरीदने के नाम पर धोखाधड़ी के मामले में आखिरकार इंदरगंज थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह कुशवाह नोटिस जारी होने के बाद कोर्ट में हाजिर हुए। उनके रवैये पर नाराजगी जताते हुए जज ने उन्हें हिदायत देते हुए कहा कि न्यायालय से मिले निर्देशों को गंभीरता से लें और उसी के हिसाब से अपने कर्तव्यों का निष्पादन करें।
अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो न्यायालय उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा। टीआइ ने न्यायालय में न सिर्फ साक्ष्य के तौर पर सीडी और पेन ड्राइव पेश की बल्कि सप्लीमेंटरी चालान भी पेश किया। गौरतलब है कि उक्त मामले में कई बार बुलावा भेजने के बाद भी इंदरगंज थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह कुशवाह कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे थे। इसके चलते न्यायालय ने उन्हें नोटिस भेज कर जवाब तलब किया।
कोर्ट ने नोटिस में कहा कि टीआइ कोर्ट में पेश नहीं हुए और न ही किसी प्रकार की सूचना दी। ऐसे में टीआइ के खिलाफ क्यों न धारा-29 पुलिस अधिनियम और धारा-175 भादसं के अंतर्गत दंडनीय कार्रवाई की जाए। कोर्ट में उनसे इसका स्पष्टीकरण भी मांगा गया।
यह था मामला
बता दें कि कई वर्ष पहले खदान लेने के नाम पर लोगों से ठगी करने का मामला सामने आया था। जिसमें लोगों के पैसे हड़प लिए गए थे। इस मामले में साक्ष्य के रूप में सीडी पेश की जानी थी, जो किसी वजह से टूट गई। ऐसे में फरियादी ने उसी सीडी की दूसरी कापी पेश करने की बात कही। जिसके बाद कोर्ट ने उसे इंदरगंज थाने के माध्यम से सीडी पेश करने के लिए निर्देशित किया। लेकिन सीडी सहित चालान की प्रति जमा नहीं करवाई जा रही थी।
बार काउंसिल को सात दिन में करना होगा छह हजार वकीलों का पंजीयन
- पूरे प्रदेश के छह हजार कानून की पढ़ाई कर चुके युवाओं के लिए राहत की खबर है। हाई कोर्ट की प्रिंसिपल बेंच ने सात दिन में ला में स्नातक उत्तीर्ण कर चुके युवाओं का पंजीयन करने का आदेश दिया है। स्टेट बार काउंसिल को सुनवाई के दौरान बुधवार को स्पष्ट निर्देश देते हुए चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैथ ने कहा है कि सभी कानून की पढ़ाई कर चुके युवाओं का लंबित पंजीयन स्टेट बार काउंसिल की जिम्मेदारी है जो उन्हें एक सप्ताह के भीतर पूरा करना होगा।मामले के याचिकाकर्ता अधिवक्ता मानवर्धन सिंह तोमर ने बताया कि प्रदेश में पिछले चार महीनों से स्नातक उत्तीर्ण अधिवक्ताओं के पंजीकरण नहीं किए गए हैं, जिसके चलते न तो युवा अधिवक्ता कोर्ट में प्रैक्टिस कर पा रहे हैं और न ही सिविल जज की परीक्षा में आवेदन कर पा रहे हैं। ग्वालियर के 1200 युवा अधिवक्ताओं सहित पूरे प्रदेश के लगभग छह हजार ऐसे युवा अधिवक्ता हैं जिनके पंजीयन वर्तमान में लंबित हैं।
- इन युवा अधिवक्ताओं के पंजीयन की जिम्मेदारी राज्य बार काउंसिल की थी, जब राज्य बार काउंसिल की ओर से पंजीयन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो इस मामले को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है।


